SIR में नाम छूट गया? घबराएं नहीं! चुनाव आयोग ने 20 राज्यों में शुरू कराया बड़ा अभियान, घर-घर पहुंचेंगे BLO
मतदाता सूची को लेकर देशभर में छिड़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने एक अहम फैसला लिया है. आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को विशेष मतदाता नामांकन अभियान चलाने का निर्देश दिया है, ताकि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान छूटे हुए, पहली बार वोट डालने वाले और युवा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जा सकें
यह अभियान किन राज्यों में चलाया जाएगा?
यह विशेष अभियान उन 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चलाया जाएगा, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इनमें बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य भी शामिल हैं, जहां SIR को लेकर पहले ही सबसे ज्यादा सियासी गर्मी देखी जा चुकी है.
आयोग ने यह निर्देश कब और कैसे जारी किया?
चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखित रूप से यह निर्देश भेजा है. आयोग ने अपने पत्र में साफ कहा है कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है, वहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी लगातार अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत छूटे हुए और नए पात्र युवा मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू करेंगे.
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Drishyam The Conclusion Review: अजय देवगन का माइंड गेम, जयदीप से जबरदस्त टक्कर, पढ़ें रिव्यू
फिल्म : दृश्यम: द कन्क्लूजन
स्टार कास्ट : अजय देवगन, तब्बू, जयदीप अहलावत, श्रिया सरन,
Stars : 4.5
Drishyam The Conclusion Review: अजय देवगन की 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' देखने के बाद सबसे पहले जो बात दिमाग में आती है, वो यही है कि जब बॉलीवुड एक अच्छी सेस्पेंस थ्रीलर बनाता है, तो मजा आ जाता है। विजय सालगांवकर की कहानी एक बार फिर दर्शकों को ऐसे माइंड गेम में लेकर जाती है, जहां हर छोटी-सी चीज मायने रखती है। फिल्म देखने के बाद एक बात तो तय है विजय सालगांवकर को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
कहानी
फिल्म की कहानी के बारे में ज्यादा कुछ बताना ठीक नहीं होगा, क्योंकि 'दृश्यम 3' का असली मजा इसके सस्पेंस और ट्विस्ट में है। इसलिए यह रिव्यू पूरी तरह स्पॉइलर-फ्री है। फिल्म शुरुआत से ही आपको कहानी से जोड़ना शुरू कर देती है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, सवाल बढ़ते जाते हैं और आप खुद अंदाजा लगाने लगते हैं कि अब विजय सालगांवकर क्या करने वाला है।
इस बार 2 अक्टूबर के साथ-साथ 23 जुलाई की तारीख भी याद रहने वाली है। फिल्म का सस्पेंस लगातार बना रहता है, लेकिन असली खेल आखिरी हिस्से में शुरू होता है। खासकर अंतिम करीब 30 मिनट में जिस तरह के माइंड गेम देखने को मिलते हैं, वो फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है। फिल्म देखते हुए क्यूरोसिटी इतनी बढ़ जाती है कि आपका ध्यान स्क्रीन से हटाना मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि फोन देखने का भी मन नहीं करता, क्योंकि डर रहता है कि कहीं कोई जरूरी चीज मिस न हो जाए।
एक्टिंग
अगर 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' की सबसे बड़ी ताकत की बात करें तो अजय देवगन का नाम सबसे ऊपर आता है। विजय सालगांवकर के किरदार में अजय देवगन इतने सहज लगते हैं कि ऐसा लगता है जैसे यह किरदार उन्हीं के लिए लिखा गया हो।
कम बोलना, सामने वाले को ध्यान से ऑब्शर्व करना, बिना पैनिक किए सिचवेशन को समझना और फिर अपने तरीके से पूरा माइंड गेम खेलना, अजय देवगन ने इन छोटी-छोटी चीजों को शानदार तरीके से निभाया है। उनके एक्प्रेशन कई बार बिना किसी डायलॉग के बहुत कुछ कह जाते हैं। इस फिल्म और पूरी दृश्यम फ्रेंचाइजी में उनके परफऑर्मेंस को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह उनके सबसे यादगार किरदारों में से एक है।
वहीं जयदीप अहलावत फिल्म में अलग ही एनर्जी लेकर आते हैं। उनकी पर्सनैलिटी और स्क्रीन प्रजेंस शानदार है। खासकर अजय देवगन के साथ उनके सीन्स काफी दमदार हैं। कई मौकों पर ऐसा लगता है कि जयदीप का किरदार विजय सालगांवकर पर भारी पड़ रहा है। दोनों के बीच का आमना-सामना फिल्म के सबसे इंटरेस्टिंग हिस्सों में से एक है।
श्रेया सरन ने भी शानदार काम किया है। खासकर कोर्ट वाला सीन काफी प्रभावशाली है और उनका परफॉर्मेंस फिल्म में इमोशनल वेट लेकर आता है। वहीं तब्बू एक बार फिर अपने किरदार में शानदार नजर आती हैं। और फिर आते हैं गायतोंडे...इस किरदार को देखकर आपके चेहरे पर अपने आप स्माइल आ जाती है।
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डायरेक्शन
अभिषेक पाठक ने फिल्म को काफी अच्छी तरह से हैंडल किया है। सस्पेंस थ्रीलर में सबसे जरूरी चीज होती है कि दर्शक की क्यूरोसिटी बनी रहे और Drishyam 3 इस मामले में काफी हद तक सफल होती है।
फिल्म को इस तरह से रखा गया है कि कहानी धीरे-धीरे खुलती है और दर्शक लगातार सोचता रहता है कि आगे क्या होने वाला है। खासकर पहला हाफ में अजय देवगन और जयदीप अहलावत का आमना-सामना शानदार तरीके से फिल्माया गया है।
अभिषेक पाठक ने कहानी को सिर्फ ट्विस्ट के भरोसे नहीं छोड़ा, बल्कि कैरेक्ट्रर्स और उनके माइंड गेम पर भी पूरा ध्यान दिया है। यही वजह है कि फिल्म आपको अंत तक engage करके रखती है।
राइटिंग
आमिल कीयन खान और परवेज़ शेख ने कहानी को इंटरेस्टिंग बनाए रखने में अच्छा काम किया है। फिल्म लगातार ऐसे सवाल खड़े करती है जिनके जवाब जानने की क्यूरोसिटीबनी रहती है।
फाइनल वर्डिक्ट
कुल मिलाकर, Drishyam 3 एक सस्पेंस थ्रीलर है, जिसमें कहानी, डायरेक्शन और परफॉर्मेंस तीनों मिलकर अच्छा इमपेक्ट छोड़ते हैं। अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर के किरदार में शानदार हैं, जबकि जयदीप अहलावत की मौजूदगी फिल्म को और इंटरेस्टिंग बना देती है।
ऐसी फिल्म देखकर सच में प्राउड फील होता है कि हां, हिंदी सिनेमा में अभी भी ऐसी कहानियां बनाई जा रही हैं जो दर्शकों को शुरुआत से लेकर अंत तक स्क्रीन से बांधकर रख सकती हैं।
बॉलीवुड में अच्छी सस्पेंस थ्रीलरर्स वैसे भी कम देखने को मिलती हैं और Drishyam 3 उस कमी को काफी हद तक पूरा करती है। अगर आपको सस्पेंस थ्रीलर और माइंड गेम वाली फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म आपको एंटरटेन करने वाली है। और हां, एक बात याद रखिए—विजय सालगांवकर को कभी भी हल्के में मत लेना!
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