मूवी रिव्यू- ‘प्रेम कीटाणु’:प्यार की तलाश में निकले वीर पहाड़िया की कहानी में है हंसी, उलझन और एक मजेदार ट्विस्ट; जानिए कैसी है फिल्म
कॉलेज में किसी पर दिल आ जाए तो लगता है कहानी बस इतनी सी है, लेकिन कभी प्यार पूरा होने से पहले ही कोई नया मोड़ आ जाता है और फिर वही कहानी चार साल बाद एक बिल्कुल अलग दुनिया में लौटती है। फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ इसी प्यार, दोस्ती और जिंदगी के बदलते रंगों को हल्के फुल्के अंदाज में लेकर चलती है। फिल्म हंसाती है, रिलेट करती है और बीच बीच में जिंदगी की थोड़ी सी कड़वी सच्चाई भी दिखा देती है। फिल्म की कहानी कैसी है कहानी बनारस के इंजीनियरिंग कॉलेज से शुरू होती है। एडमिशन के दौरान विशाल ठाकुर (वीर पहाड़िया) और सुहानी (आफिया सैयद) पहली बार आमने सामने आते हैं। पहली मुलाकात नोकझोंक में बदलती है और दोनों एक दूसरे को श्राप दे बैठते हैं कि चार साल तक विशाल की कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनेगी और सुहानी का कोई बॉयफ्रेंड नहीं होगा। इसके बाद दोनों अलग अलग कॉलेज चले जाते हैं। चार साल की कॉलेज लाइफ में विशाल की जिंदगी में प्यार की दस्तक तो होती है, लेकिन बात मुकम्मल नहीं हो पाती। उधर सुहानी अपनी पढ़ाई और फिर करियर की तरफ बढ़ती है। चार साल बाद दोनों की जिंदगी कॉलेज से निकलकर नौकरी की दुनिया में पहुंच चुकी है। सुहानी को अच्छी नौकरी मिलती है, जबकि विशाल को करियर और जिंदगी की अपनी जद्दोजहद से गुजरना पड़ता है। फिर दोनों की मुलाकात होती है और यहीं से पुरानी कहानी नए हालात में दोबारा खुलती है। फिल्म सिर्फ यह नहीं पूछती कि दोनों प्यार में पड़ेंगे या नहीं, बल्कि यह भी देखती है कि वक्त के साथ बदले दो लोग एक दूसरे की जिंदगी में फिर जगह बना पाएंगे या नहीं। इसी के साथ दोस्ती, परिवार और जिम्मेदारियां कहानी को थोड़ा और बड़ा बनाती हैं। फिल्म में एक्टिंग कैसी है वीर पहाड़िया विशाल के किरदार में सहज हैं। कॉलेज के मस्तमौला लड़के से लेकर जिंदगी की परेशानियों से जूझते युवा तक वह किरदार के बदलाव को स्वाभाविक रखते हैं। आफिया सैयद की यह पहली फिल्म है और वह सुहानी के किरदार में फ्रेश लगती हैं। वीर के साथ उनकी नोकझोंक और केमिस्ट्री फिल्म के रोमांटिक हिस्सों में अच्छी लगती है। निखिल विजय फिल्म की जान हैं। मगन अरोड़ा बनकर उनकी कॉमिक टाइमिंग, पंच और वीर के साथ झगड़बंदी कई जगह जबरदस्त मजा देती है। कहानी जहां थोड़ी धीमी पड़ती है, निखिल वहां माहौल फिर से गर्म कर देते हैं। अपारशक्ति खुराना ने अपने किरदार को पूरे अंदाज में निभाया है और उसे इंटरेस्टिंग रखा है। हां, किरदार की लिखावट थोड़ी और मजबूत होती तो उनकी परफॉर्मेंस का असर और बढ़ सकता था। फिल्म का डायरेक्शन कैसा है? अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म को हल्का और यूथफुल रखा है। कॉलेज की मस्ती से लेकर नौकरी और जिम्मेदारियों वाली जिंदगी तक टोन बदलता है, लेकिन फिल्म जरूरत से ज्यादा भारी नहीं होती। राइटर दीपक किंगरानी, जिन्हें सिर्फ एक बंदा काफी है के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिल चुका है, ने रिश्तों, दोस्ती और कॉमेडी को सहज अंदाज में पिरोया है। स्क्रीनप्ले की अच्छी बात यह है कि कहानी सिर्फ रोमांस पर नहीं टिकी। परिवार और दोस्ती को भी जगह मिलती है। हां, बीच में रफ्तार थोड़ी ढीली पड़ती है और कुछ मोड़ पहले से भांपे जा सकते हैं। इमोशनल हिस्सों में थोड़ा और ठहराव होता तो कहानी का असर और बढ़ता। तकनीकी तौर पर फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट रंगीन और यूथफुल है। कॉलेज और बनारस का माहौल कहानी को अपनी अलग फील देता है। फिल्म का म्यूजिक कैसा है ‘कहो तो’, ‘तू मेरा रइयो’ और ‘इश्क का गुलाम’ फिल्म के रोमांटिक और यूथफुल मूड को अच्छे से सपोर्ट करते हैं। गाने कहानी से अलग नहीं लगते और फिल्म की फील को बनाए रखते हैं। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट प्यार की मस्ती, दोस्ती की शरारत और जिंदगी की थोड़ी सी कड़वी मिठास, ‘प्रेम कीटाणु’ इन तीनों का अच्छा कॉम्बिनेशन है। निखिल विजय खूब हंसाते हैं, वीर और आफिया की जोड़ी जमती है। थोड़ी कसावट की कमी जरूर है, लेकिन ये फिल्म मुस्कुराने और पुराने कॉलेज वाले दिनों को याद करने का अच्छा बहाना है।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला रिकर्व टीम ने रचा इतिहास, दक्षिण कोरिया को हराकर भारत को दिलाया 11वां गोल्ड
एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा है। दरअसल महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने पहली बार इस इवेंट में गोल्ड मेडल जीत लिया है। बता दें कि अंकिता भगत, कीर्ति और कुमकुम अनिल मोहोड़ की टीम ने फाइनल में मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को 5-3 से हराया। इस जीत के साथ भारत के गोल्ड मेडल की संख्या 11 हो गई है और कुल पदकों की संख्या 68 पहुंच गई है। भारत मेडल टैली में 7वें स्थान पर है।
हालांकि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच महिला रिकर्व टीम का फाइनल शुरुआत से ही काफी करीबी रहा। पहले दो सेट में दोनों टीमों के स्कोर बराबर रहे और मुकाबला 2-2 सेट पॉइंट पर आ गया। इसके बाद भारत ने तीसरा सेट 55-51 से अपने नाम कर बढ़त 4-2 कर ली। चौथे सेट में भी मुकाबला आखिरी तीरों तक पहुंचा। कुमकुम के आखिरी तीर पर 10 अंक और कीर्ति के एक तीर को 8 की जगह 9 अंक दिए जाने के बाद भारत ने सेट बराबर किया और 5-3 से गोल्ड अपने नाम कर लिया।
महिला रिकर्व तीरंदाजी में पहली बार भारत का गोल्ड
दरअसल अंकिता भगत, कीर्ति और कुमकुम अनिल मोहोड़ ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो एशियन गेम्स में भारतीय तीरंदाजी के लिए अब तक नहीं हुआ था। भारत ने महिला टीम रिकर्व इवेंट में पहली बार गोल्ड जीता है। इससे पहले इस इवेंट में भारतीय टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन ब्रॉन्ज मेडल रहा था। इस बार टीम ने फाइनल तक पहुंचने के बाद सीधे गोल्ड के लिए दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत टीम का सामना किया और 5-3 से जीत दर्ज की। दक्षिण कोरिया ने 1998 से इस इवेंट में लगातार गोल्ड जीता था। उसकी टीम इस बार भी मजबूत मानी जा रही थी लेकिन भारत ने फाइनल में दबाव के बीच बेहतर प्रदर्शन किया। पहले दो सेट बराबर रहने के बाद तीसरे सेट में भारत की 55-51 की जीत निर्णायक साबित हुई। चौथे सेट में भारत को जीत के लिए सेट जीतना जरूरी नहीं था बल्कि मुकाबला बराबरी पर रोकना भी पर्याप्त था। आखिरी तीरों में भारतीय टीम ने यही कर दिखाया।
एशियन गेम्स 2026 में भारत के आगे के मुकाबले
वहीं महिला रिकर्व टीम के गोल्ड के बाद भारत के खाते में 11 गोल्ड, 24 सिल्वर और 33 ब्रॉन्ज समेत कुल 68 मेडल हो गए हैं। भारत फिलहाल मेडल टैली में 7वें स्थान पर है। शुक्रवार को भारत के पास कई और मेडल जीतने के मौके हैं। बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन महिला 75 किग्रा के गोल्ड मेडल मुकाबले में चीन की बाओ ज़ियी के खिलाफ उतरेंगी। यह मुकाबला उनके जन्मदिन के दिन हो रहा है। रेसलिंग में सुजीत कलकल पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा वर्ग में मुकाबले के लिए उतरे हैं। वहीं तीरंदाजी में रिकर्व मिक्स्ड टीम और पुरुष टीम के मुकाबले भी भारत के लिए अहम हैं। मिक्स्ड टीम में कुमकुम और धीरज बोम्मदेवरा की जोड़ी ने फाइनल में जगह बनाई थी जबकि महिला रिकर्व टीम ने इससे पहले चीन को हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया था।
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