Karnataka CEO ने दिए गलत घोषणा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई के आदेश
बेंगलुरु, एक अक्टूबर कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी. अंबुककुमार ने बृहस्पतिवार को चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करें जिन्होंने फॉर्म में जान-बूझकर गलत बयान या घोषणाएं की हैं। यह निर्देश ऐसे आरोपों के बीच दिया गया है कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं। सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के जिला चुनाव अधिकारियों और चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को भेजे गए एक संदेश में, मुख्य चुनाव अधिकारी अंबुककुमार ने कहा कि उनके कार्यालय को एआईआर प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जाने और इन फॉर्म के असली न होने के आरोपों के बारे में जानकारी मिली है।
सीईओ ने संबंधित ईआरओ को निर्देश दिया कि वे उन आवेदकों के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई करें, जिन्होंने जानबूझकर फॉर्म 6, फॉर्म 6ए, फॉर्म 7 या फॉर्म 8 में गलत बयान या घोषणाएं की थीं। वहीं, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत आए आवेदनों की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार निर्वाचन आयोग पर दबाव डाल रहे हैं।
Kotdwar: व्यापारी से मारपीट और धमकी के आरोप में 'मोहम्मद दीपक' गिरफ्तार
(कल देर रात जारी खबर को पुन: जारी करते हुए) देहरादून, दो अक्टूबर ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से चर्चित कोटद्वार के जिम संचालक दीपक कुमार को एक व्यापारी के साथ कथित तौर पर अभद्रता एवं मारपीट करने और उसे जान से मारने की धमकी देने के मामले में बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर यह कार्रवाई की गई।
पुलिस के मुताबिक, दीपक को कोटद्वार निवासी व्यापारी संजीव टोंक की शिकायत पर की गई जांच के बाद शाम को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि टोंक ने कोटद्वार कोतवाली में दी तहरीर में आरोप लगाया कि दीपक ने उनके साथ अभद्रता और गाली-गलौज की तथा उन्हें जान से मारने की धमकी दी। शिकायत के आधार पर आरोपी दीपक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) और धारा 352 (जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरों और अन्य तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर मामले में बीएनएस की धारा 196 (धर्म, जाति, आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने या सौहार्द बिगाड़ने संबंधी अपराध) और धारा 115 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) भी जोड़ी गईं। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया सामने आया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को अपशब्द कहने के साथ ही उसे जान से मारने की धमकी भी दी। उसने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपी की गतिविधियों और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दीपक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 170 (संज्ञेय अपराध को होने से रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत गिरफ्तार किया गया।
सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने बृहस्पतिवार देर शाम कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में फ्लैग मार्च भी निकाला। दीपक कुमार इस साल जनवरी में उस समय चर्चा में आए थे, जब कोटद्वार में कुछ लोगों ने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। दीपक ने दुकानदार के समर्थन में हस्तक्षेप किया और विरोध कर रहे लोगों से बहस के दौरान अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद वह इसी नाम से चर्चित हो गए।
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