उपचुनाव: CPI(M) ने TVK पर मतदाताओं को नकदी बांटने का लगाया आरोप
चेन्नई, एक अक्टूबर तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पैसे बांट रहा है। उपचुनाव मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों में होने हैं। माकपा की तमिलनाडु इकाई के सचिव पी. षणमुगम ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में निर्वाचन अधिकारियों से मतदाताओं को प्रलोभन देने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई करने की मांग की।
उन्होंने उन राजनीतिक दलों के नेताओं से भी स्पष्टीकरण मांगा, जिन पर ‘‘उपचुनाव में मतदाताओं को’’ पैसे देने का आरोप है। षणमुगम ने कहा कि उन्होंने 30 सितंबर को मदुरांतकम विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों का दौरा किया था। उन्होंने, ‘‘कुछ गांवों में लोगों ने हमसे कहा कि अन्य पार्टियां पैसे दे रही हैं, जबकि माकपा केवल पर्चे बांट रही है।
मैंने उनसे पूछा कि कौन-कौन सी पार्टियां पैसे दे रही हैं। मतदाताओं ने कहा कि टीवीके ने सबसे ज्यादा पैसे दिए हैं।
Karnataka CEO ने दिए गलत घोषणा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई के आदेश
बेंगलुरु, एक अक्टूबर कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी. अंबुककुमार ने बृहस्पतिवार को चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करें जिन्होंने फॉर्म में जान-बूझकर गलत बयान या घोषणाएं की हैं। यह निर्देश ऐसे आरोपों के बीच दिया गया है कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं। सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के जिला चुनाव अधिकारियों और चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को भेजे गए एक संदेश में, मुख्य चुनाव अधिकारी अंबुककुमार ने कहा कि उनके कार्यालय को एआईआर प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जाने और इन फॉर्म के असली न होने के आरोपों के बारे में जानकारी मिली है।
सीईओ ने संबंधित ईआरओ को निर्देश दिया कि वे उन आवेदकों के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई करें, जिन्होंने जानबूझकर फॉर्म 6, फॉर्म 6ए, फॉर्म 7 या फॉर्म 8 में गलत बयान या घोषणाएं की थीं। वहीं, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत आए आवेदनों की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार निर्वाचन आयोग पर दबाव डाल रहे हैं।
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