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संसद में पेश हुआ आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, जानें आम आदमी के लिए क्यों है खास?

Economic Survey: संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश कर दिया गया है. यह दस्तावेज सिर्फ सरकार की आर्थिक तस्वीर नहीं दिखाता, बल्कि यह भी बताता है कि आने वाले समय में आम लोगों की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ सकता है. महंगाई, रोजगार, आय, कर्ज और विकास हर मोर्चे पर सर्वेक्षण आम आदमी के लिए कई अहम संकेत देता है. इस आर्थिक सर्वेक्षण में केंद्र सरकार ने मौजूदा वर्ष में 7.4 फीसदी की दर से अर्थव्यवस्था बढ़ने की बात कही है. जबकि आने वाले वर्ष यानी 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 प्रतिशत से 7.2 फीसदी तक बढ़ सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस आर्थिक सर्वेक्षण में आम आदमी के लिए क्यों है खास. 

1. महंगाई से राहत की उम्मीद

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है और ऐतिहासिक रूप से निचले स्तरों के आसपास बनी हुई है. इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलता है, क्योंकि रोजमर्रा की चीजों खाने-पीने का सामान, ईंधन और सेवाओं—की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का दबाव कम रहता है. हालांकि सर्वेक्षण ने यह भी कहा है कि भविष्य में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए सरकार और रिजर्व बैंक सतर्क नजर बनाए रखेंगे.

2. रोजगार और आय के बेहतर संकेत

सर्वेक्षण में कहा गया है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और निजी निवेश में भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में उद्योगों और सेवाक्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, आईटी और सर्विस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ने से युवाओं के लिए नौकरी के मौके बढ़ने की उम्मीद है.

3. मजबूत बैंकिंग सिस्टम, आसान कर्ज

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार बैंकों, कंपनियों और परिवारों की बैलेंस शीट पहले से ज्यादा मजबूत हुई है. इससे आम आदमी को फायदा यह होगा कि होम लोन, एजुकेशन लोन और बिजनेस लोन जैसे कर्ज अपेक्षाकृत आसान शर्तों पर मिल सकते हैं. बैंकिंग सिस्टम मजबूत होने से कर्ज देने की क्षमता भी बढ़ती है.

4. सरकारी खर्च से बढ़ेगी गतिविधि

सार्वजनिक पूंजीगत व्यय यानी सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है. सड़क, रेलवे, हाउसिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से न सिर्फ विकास तेज होगा, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा होंगे.

भविष्य की ग्रोथ का भरोसा

सर्वेक्षण का अनुमान है कि भारत की मध्यम अवधि की विकास क्षमता करीब 7 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है. इसका मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत बनी हुई है, जिसका फायदा आम नागरिकों की आय, अवसर और जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखाई देने की उम्मीद है. 

कुल मिलाकर आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 आम आदमी के लिए राहत और उम्मीद का संदेश देता है. महंगाई पर नियंत्रण, रोजगार के बेहतर संकेत, मजबूत बैंकिंग सिस्टम और लगातार विकास. ये सभी बातें बताती हैं कि आने वाला समय आम लोगों के लिए अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है. 

यह भी पढ़ें - Economy Survey: भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने दी जानकारी

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5जी सेवाएं अब देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध, दूरसंचार घनत्‍व 86.76 प्रतिशत पर पहुंचा : आर्थिक सर्वेक्षण

नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। देश में 5जी सेवा अब 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध है और दूरसंचार घनत्व 86.76 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह जानकारी गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में दी गई।

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि पिछले दशक में भारत के दूरसंचार क्षेत्र का तेजी से विस्‍तार हुआ और गांव तथा शहर के बीच बंटी हुई पहुंच की दूरी को कम किया गया है, जिससे दूरसंचार घनत्‍व के 75.23 प्रतिशत से बढ़कर 86.76 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

सर्वेक्षण में आगे कहा गया कि यह परिवर्तन सरकार के डिजिटल रूप से सशक्‍त राष्‍ट्र के दृष्टिकोण को दर्शाता है। ये सभी प्रयास दूरसंचार इकोसिस्‍टम को तैयार करने जैसे- समावेशित (समावेशी विकास को गति प्रदान करने के लिए संपर्क स्थापित करना), विकसित (प्रदर्शन, सुधार और परिवर्तन), त्‍वरित (तेज विकास और आसान समाधान) और सुरक्षा (सुरक्षित और संरक्षित) पर केंद्रित थे।

इसके अतिरिक्त आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि औद्योगिक अनुमान के अनुसार जून 2025 तक भारत की स्‍थापित डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1280 मेगावॉट थी, जिसमें लगभग 130 निजी तौर पर संचालित डेटा सेंटर और केंद्र तथा राज्‍य स्‍तर पर सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित 49 डेटा सेंटर थे।

आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, तेजी से डिजिटलीकरण और क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईओटी और 5जी जैसी तकनीकों के कारण डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक बढ़कर लगभग 4 गीगावॉट होने का अनुमान है।

अंतरिक्ष में हुए विकास पर आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि भारत वर्तमान में 56 सक्रिय अंतरिक्ष संपत्तियों का संचालन कर रहा है जिसमें 20 संचार उपग्रह, 8 नेविगेशन उपग्रह, 04 वैज्ञानिक उपग्रह, 21 पृथ्‍वी–अवलोकन ग्रह और 03 प्रौद्योगिकी प्रदर्शन अभियान शामिल हैं। अंतरिक्ष अवसंरचना को मजबूत करने के साथ वर्ष 2025 के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है जिसमें भारत स्‍वायत्‍त उपग्रह डॉकिंग (स्‍पाडैक्‍स) हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है और साथ ही अंतरिक्ष मिशनों का विस्‍तार और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी है। इसके अतिरिक्‍त स्‍वदेशी क्रायोजनिक चरण वाले जीएसएलवी-एफ15 ने 29 जनवरी, 2025 को एनवीएस-02 उपग्रह का प्रक्षेपण किया था जो श्रीहरिकोटा से 100वां प्रक्षेपण था।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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