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VIral Video: गुजरात के मोरबी में 'हिलता' कुआं बना रहस्य, भूकंप नहीं तो आखिर क्या है असली वजह?

Viral News: गुजरात के मोरबी जिले में एक गांव के कुएं का पानी लगातार हिलने की घटना ने स्थानीय निवासियों को हैरान कर दिया। इस असामान्य नजारे को देखकर लोगों के मन में यह आशंका पैदा हो गई कि कहीं यह भूकंप से जुड़ी कोई घटना तो नहीं है।

लहराते पानी के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद इस रहस्यमयी घटना को देखने के लिए लोगों की भीड़ मौके पर जुटने लगी। हालांकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस घटना का भूकंपीय गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।

भूकंप नहीं, यह है असली कारण
जिला भूवैज्ञानिक जेएस वाधेर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि कुएं का पानी हिलने की वजह भूकंप या टेक्टोनिक हलचल है। वाधेर ने स्पष्ट करते हुए कहा, "यह भूकंपीय गतिविधि नहीं है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ऊपरी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद भूजल का रिचार्ज हो रहा है, और चट्टानों के छिद्रों में फंसी हवा बाहर निकल रही है, जिसके कारण कुएं में यह हलचल पैदा हो रही है।"

अधिकारियों के मुताबिक, ऊपरी इलाकों में हाल ही में हुई तेज बारिश से भूजल रिचार्ज की प्रक्रिया काफी बढ़ गई है। जब पानी भूमिगत चट्टानी संरचनाओं में रिसता है, तो यह चट्टानों में फंसी हवा को दरारों और छिद्रों के जरिए बाहर की ओर धकेल सकता है।

इस तरह बाहर निकलती हवा से पानी की सतह पर बुलबुले और लगातार लहरें बन सकती हैं, जिससे यह भ्रम पैदा होता है कि कुआं हिल रहा है।

इस साल गुजरात में असामान्य रूप से सक्रिय रहा मानसून
इस वर्ष गुजरात में मानसून काफी सक्रिय रहा है, और राज्य के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है। अरब सागर और मध्य भारत के ऊपर लगातार बने कम दबाव के क्षेत्रों की वजह से व्यापक स्तर पर बारिश हुई, जिसके चलते सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात भी बने। इसके साथ ही राज्यभर में जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भूकंप विज्ञान संस्थान ने भी की पुष्टि
इस क्षेत्र में किसी भी तरह के कंपन दर्ज न होने से यह वैज्ञानिक व्याख्या और मजबूत होती है। अधिकारियों ने इस संबंध में गांधीनगर स्थित भूकंप विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ISR) से भी सलाह ली, जिसने पुष्टि की कि इस क्षेत्र में कोई सक्रिय फॉल्ट लाइन मौजूद नहीं है और किसी भी तरह की भूकंपीय गतिविधि दर्ज नहीं हुई है।

सतर्कता के तौर पर भेजी जाएगी वैज्ञानिक टीम
हालांकि प्रारंभिक आकलन के बावजूद प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। मोरबी जिला कलेक्टर स्वप्निल खरे ने बताया कि गुजरात सरकार को इस घटना की जानकारी दे दी गई है, और गांधीनगर से एक वैज्ञानिक टीम विस्तृत जांच के लिए मौके पर पहुंचेगी।

खरे ने कहा, "हमने इस बारे में गुजरात सरकार को सूचित कर दिया है, और आगे की जांच के लिए गांधीनगर से एक टीम मौके का दौरा करेगी।"

विशेषज्ञ करेंगे जांच
विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल से जुड़ी ऐसी हलचलें भले ही आम न हों, लेकिन तेज बारिश और एक्विफर (जलभृत) रिचार्ज के दौरान इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि भूजल रिचार्ज और फंसी हवा का बाहर निकलना ही इसका सबसे संभावित कारण है, फिर भी वैज्ञानिक कई अन्य संभावनाओं की भी जांच करेंगे। इनमें भारी मानसूनी रिचार्ज के कारण भूजल दबाव में उतार-चढ़ाव शामिल है, जो कुएं के पानी में लयबद्ध हलचल पैदा कर सकता है।

जांचकर्ता यह भी अध्ययन करेंगे कि क्या कुएं की खास आकृति और गहराई भूमिगत दबाव तरंगों को बढ़ा रही है, जिसे 'वेल सेइश' (well seiche) या रेजोनेंस नामक प्रक्रिया के तौर पर जाना जाता है। एक अन्य संभावना यह भी हो सकती है कि यह कुआं किसी भूमिगत दरार या गुहा से जुड़ा हो, जिसके चलते यह सतह के नीचे होने वाले बदलावों के प्रति खासतौर पर संवेदनशील हो।

उम्मीद है कि यह जांच उस सटीक भूवैज्ञानिक प्रक्रिया का पता लगाएगी, जो इस असामान्य हलचल के पीछे जिम्मेदार है, जिससे उन निवासियों को स्पष्टता मिलेगी जो इस घटना को भूकंप की पूर्व चेतावनी मानकर आशंकित थे।

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Xi Jinping US Visit: अभी तो सिर्फ ट्रेलर सामने आया है, पूरी पिक्चर दिसम्बर में सामने आयेगी, तब दुनिया का हैरान होना तय है

वॉशिंगटन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वागत के लिए जिस स्तर का राजकीय सम्मान दिखाया गया, उसे देखकर पूरी दुनिया हतप्रभ है। लेकिन सितम्बर में अमेरिका में दिखी यह कूटनीति सिर्फ ट्रेलर है क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है जोकि दिसम्बर में दिखाई जायेगी। वैसे वॉशिंगटन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वागत का दृश्य मई में बीजिंग में हुए ट्रंप-शी शिखर संवाद की याद दिला रहा है। जिस तरह चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग ने ट्रंप का भव्य स्वागत किया था और बाद में झोंगनानहाई में स्वयं उनकी अगवानी की थी, उसी तरह अब अमेरिका पहुंचने पर ट्रंप ने प्रोटोकॉल से हटकर ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर स्वयं शी जिनपिंग का स्वागत किया। सैन्य बैंड, लाल कालीन, सम्मान गार्ड और लड़ाकू विमान के फ्लाईपास्ट के बीच हुआ यह स्वागत केवल राजकीय औपचारिकता नहीं, बल्कि अमेरिका-चीन संबंधों में चल रही कूटनीतिक गर्माहट का बड़ा संकेत माना जा रहा है। साथ ही करीब छह दशक में किसी विदेशी नेता के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से बेस पर इस तरह की व्यक्तिगत अगवानी असाधारण मानी जा रही है।

देखा जाये तो शी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के रिश्ते प्रतिस्पर्धा और सहयोग के बीच एक नए संतुलन की तलाश में हैं। व्यापार शुल्क, दुर्लभ खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेदों का कारण बने हुए हैं, लेकिन दोनों पक्ष अब टकराव को नियंत्रित रखने और बातचीत जारी रखने पर जोर दे रहे हैं। व्यापार युद्ध के बाद बनी अस्थायी व्यापार-समझ को आगे बढ़ाने की कोशिश भी इसी दिशा का संकेत है।

इसे भी पढ़ें: अमेरिकी धरती पर खड़े होकर ट्रंप को घेरना आसान नहीं, मगर मैक्रों, पेजेशकियन, अहमद अल-शरा और सिल्वा ने ये कर दिखाया

शी जिनपिंग ने भी साफ संकेत दिया है कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी की बजाय साझेदार के रूप में संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अत्याधुनिक तकनीक में दोनों के बीच होड़ जारी है, ताइवान का प्रश्न बेहद संवेदनशील बना हुआ है और व्यापार तथा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भी मतभेद कायम हैं। इसलिए वॉशिंगटन में हो रही बातचीत को पूर्ण समझौते की बजाय तनाव कम करने और संबंधों को स्थिर रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

लेकिन इस पूरी तस्वीर का एक और महत्वपूर्ण पहलू है भारत और रूस। दिसंबर में ट्रंप की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होने की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं। मोदी के दिसंबर में अमेरिका जाने की संभावना है, जहां चौदह और पंद्रह दिसंबर को फ्लोरिडा में होने वाली जी-20 बैठक के दौरान उनकी ट्रंप से द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है।

वहीं रूस ने अभी पुतिन-ट्रंप दिसंबर शिखर बैठक की पुष्टि नहीं की है। लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार पुतिन को दिसंबर में मियामी में होने वाली जी-20 बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है और वहां ट्रंप के साथ मुलाकात की संभावना है। हालांकि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और बैठक के एजेंडे पर चर्चा करना भी जल्दबाजी होगी।

देखा जाये तो इन संभावित मुलाकातों को हाल में नई दिल्ली में संपन्न हुए अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में देखना खासा महत्वपूर्ण है। भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन में नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच जिस स्तर का संवाद और सार्वजनिक गर्मजोशी दिखाई दी, उसने वैश्विक कूटनीति में खासा ध्यान खींचा। मोदी और शी ने द्विपक्षीय संबंधों, सीमा शांति, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की, जबकि मोदी और पुतिन ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।

ब्रिक्स सम्मेलन की तस्वीरें भी अपने आप में एक बड़ा कूटनीतिक संदेश थीं। एक ओर भारत और रूस के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध, दूसरी ओर भारत और चीन के बीच लंबे तनाव के बाद संवाद की वापसी। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण में मोदी, पुतिन और शी की साथ दिखाई देने वाली तस्वीरों को बदलती वैश्विक शक्ति समीकरणों के प्रतीक के रूप में देखा गया।

यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें ट्रंप की रणनीति को समझा जा सकता है। अमेरिका के सामने अब ऐसी दुनिया है जहां चीन, रूस और भारत तीनों के साथ उसके अलग-अलग स्तर के हित, मतभेद और संभावित सहयोग मौजूद हैं। चीन के साथ व्यापार और तकनीक, रूस के साथ यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा, जबकि भारत के साथ व्यापार, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग, तीनों रिश्ते एक-दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हैं।

भारत के मामले में रूस से उसके ऊर्जा संबंध और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता एक साथ चल रही हैं। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव ने दोनों देशों के बीच आर्थिक बातचीत को जटिल बनाया है। ऐसे में मोदी-ट्रंप वार्ता में व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक संबंध महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं।

इसलिए दिसंबर का संभावित कूटनीतिक दौर केवल अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातों की श्रृंखला नहीं होगा। सितंबर के नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी, पुतिन और शी की जुगलबंदी के बाद अब ट्रंप के सामने इन तीनों शक्तियों के साथ अपने संबंधों को अलग-अलग मोर्चों पर संभालने की चुनौती है। वॉशिंगटन में शी का भव्य स्वागत इसी व्यापक कूटनीतिक गणित की शुरुआत माना जा सकता है, जहां अमेरिका टकराव के साथ-साथ संवाद और समझौते के रास्ते भी खुले रखना चाहता है।

-नीरज कुमार दुबे

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कौन हैं प्रणवी उर्स, जिन्होंने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

Who Is Pranvi Urs: मैसूर की 23 वर्षीय गोल्फर प्रणवी उर्स ने एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है. जापान के नागोया में हुए महिला व्यक्तिगत स्ट्रोकप्ले इवेंट में उन्होंने 15-अंडर-पार 265 का शानदार स्कोर बनाकर देश को गोल्फ का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक दिलाया है. सात साल की उम्र से गोल्फ खेलने और पुरुषों के बीच प्रो टूर्नामेंट जीतने वाली प्रणवी की यह जीत भारतीय गोल्फ के लिए एक मील का पत्थर है. Sat, 3 Oct 2026 10:22:42 +0530

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