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Protein Rich Pulses: सिर्फ पनीर-अंडा ही नहीं, ये 5 दालें भी हैं प्रोटीन का अच्छा सोर्स

Protein Rich Pulses: भारतीय खाने में दालें काफी आम हैं और इन्हें अलग-अलग तरीकों से आसानी से खाया जा सकता है। दाल और फलियां प्रोटीन के साथ फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व भी देती हैं। मूंग, मसूर, चना, राजमा और सोयाबीन जैसी चीजें रोज के खाने में शामिल करके डाइट में प्लांट प्रोटीन बढ़ाया जा सकता है।  इन 5 दालों और फलियों को खाने में शामिल कर सकते हैं।

1. मूंग दाल
मूंग दाल हल्की और आसानी से बनने वाली दालों में से एक है। इसे दाल के अलावा खिचड़ी, चीला और स्प्राउट्स के रूप में भी खाया जा सकता है। सूखी मूंग दाल में प्रोटीन के साथ फाइबर भी पाया जाता है।

2. मसूर दाल
मसूर दाल रोज के खाने में आसानी से शामिल की जा सकती है। इसका इस्तेमाल दाल, सूप या दूसरी रेसिपी में किया जा सकता है। इसमें प्रोटीन के साथ फाइबर भी मिलता है, इसलिए यह रोज की डाइट में प्रोटीन बढ़ाने का आसान विकल्प हो सकती है।

3. चना दाल
चना दाल सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि प्रोटीन और फाइबर के लिए भी अच्छी मानी जाती है। इससे दाल के अलावा चीला, पकौड़ी और कई तरह की सब्जियां बनाई जा सकती हैं। सूखी चना दाल में प्रोटीन और फाइबर दोनों पाए जाते हैं।

4. राजमा
राजमा को आमतौर पर चावल के साथ खाना पसंद किया जाता है। इसमें प्रोटीन के साथ अच्छी मात्रा में फाइबर भी पाया जाता है। इसे सलाद या दूसरे व्यंजनों में भी शामिल किया जा सकता है। राजमा और दूसरी फलियां पौधे से मिलने वाले प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं।

5. सोयाबीन
अगर डाइट में प्रोटीन बढ़ाना चाहते हैं तो सोयाबीन को भी शामिल किया जा सकता है। इसे भिगोकर, पकाकर या इससे बने दूसरे पकवान के रूप में खाया जा सकता है।

दालों को ऐसे खाएं
सिर्फ एक ही तरह की दाल रोज खाने के बजाय अलग-अलग दालों को बारी-बारी से डाइट में शामिल करें। दाल को रोटी या चावल के साथ खाने से भोजन ज्यादा संतुलित बनाया जा सकता है। 

ध्यान रखें: दालों और फलियों को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। कुछ फलियों में ऐसे तत्व होते हैं जो उचित भिगोने और पकाने से कम होते हैं। खासकर राजमा को अच्छी तरह पकाना जरूरी है।

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Backward Walking Benefits: वॉकिंग में करें थोड़ा बदलाव, पीछे चलने से मिल सकते हैं ये 7 फायदे

Backward Walking Benefits:  उल्टा चलने का मतलब है सामान्य तरीके से आगे बढ़ने के बजाय पीछे की ओर कदम बढ़ाना। इसमें आपको अपने कदम छोटे और संभलकर रखने होते हैं। पीछे चलते समय शरीर को संतुलन बनाए रखने, पैरों की स्थिति समझने और आसपास की जगह का ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि कुछ लोगों के लिए यह सामान्य वॉक से अलग तरह की एक्सरसाइज बन सकती है। पीछे चलने से ये 7 फायदे मिल सकते हैं।

1. पैरों की मांसपेशियों को मिलती है अलग कसरत
पीछे चलने का तरीका आगे चलने से अलग होता है। ऐसे में पैरों की मांसपेशियों पर भी अलग तरह का दबाव पड़ता है। अगर आप रोज एक ही तरह से वॉक करते हैं, तो कुछ मिनट Backward Walking जोड़ना रूटीन में बदलाव ला सकता है।

2. शरीर का बैलेंस बेहतर रखने में मदद
पीछे चलते समय रास्ता सामने की तरह साफ दिखाई नहीं देता। इससे शरीर को अपना संतुलन बनाए रखने पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। नियमित अभ्यास से बैलेंस और बॉडी कंट्रोल पर काम किया जा सकता है।

3. घुटनों पर पड़ने वाला असर अलग हो सकता है
Backward Walking में पैर जमीन पर रखने और शरीर को आगे बढ़ाने का तरीका बदल जाता है। इस वजह से घुटनों और पैरों पर पड़ने वाला दबाव भी सामान्य वॉक से अलग हो सकता है।

4. चलने का तरीका और कदमों का कंट्रोल बेहतर हो सकता है
पीछे चलते समय आप तेजी से कदम नहीं बढ़ा सकते। हर कदम को संभालकर रखना पड़ता है। इससे पैरों की मूवमेंट और कदमों के बीच तालमेल पर ध्यान जाता है। धीरे-धीरे अभ्यास करने से चलने के तरीके पर बेहतर कंट्रोल बनाने में मदद मिल सकती है।

5. शरीर और दिमाग दोनों को एक्टिव रखता है
आगे चलना हमारे लिए रोज की सामान्य गतिविधि है, लेकिन पीछे चलना शरीर के लिए नया मूवमेंट है। इसलिए इसमें कदम रखने, दिशा बनाए रखने और संतुलन पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। इस तरह कुछ मिनट की Backward Walking रोज की वॉक को थोड़ा अलग और एक्टिव बना सकती है।

6. सामान्य वॉक को बना सकता है ज्यादा चैलेंजिंग
अगर रोज एक ही गति और तरीके से वॉक करने की आदत है, तो कुछ समय पीछे चलना वॉक को थोड़ा मुश्किल बना सकता है। इसमें शरीर को सामान्य वॉक से अलग तरीके से काम करना पड़ता है।

एक्सरसाइज में बदलाव बनाए रखना कई लोगों के लिए मोटिवेशन बढ़ाने वाला हो सकता है। Backward Walking को सामान्य वॉक के बीच थोड़े समय के लिए शामिल किया जा सकता है।

इन लोगों को रखना चाहिए खास ध्यान

  • अगर आपको बार-बार चक्कर आते हैं, बैलेंस बनाने में परेशानी होती है या घुटने, पैर अथवा कमर में दर्द रहता है, तो Backward Walking शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।
  • इस एक्सरसाइज में पीछे की तरफ चलते समय रास्ता पूरी तरह दिखाई नहीं देता, इसलिए लापरवाही से चोट लग सकती है।

नोट: Backward Walking कोई जटिल एक्सरसाइज नहीं है, लेकिन इसे करते समय सावधानी बहुत जरूरी है। सामान्य वॉक के साथ थोड़ी देर पीछे चलना पैरों की मांसपेशियों, बैलेंस और बॉडी कंट्रोल के लिए एक अलग तरह की कसरत बन सकता है। इसे धीरे-धीरे और सुरक्षित जगह पर ही अपनी वॉकिंग रूटीन में शामिल करें।

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