Explainer: ड्रैगन का हैकर दांव! कैसे पूर्व अमेरिकी अधिकारी बनकर US में फैला रहा साइबर जाल?
Dragon Hacker: अमेरिका में AI से जुड़ी नीतियों पर काम करने वाले विशेषज्ञों को निशाना बनाने का एक नया साइबर अभियान सामने आया है. साइबर सुरक्षा कंपनी प्रूफपॉइंट के मुताबिक, चीन से जुड़े हैकर्स अमेरिकी अधिकारियों और AI विशेषज्ञों की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को फर्जी ईमेल भेज रहे हैं. इन ईमेल के जरिए उन्हें फर्जी वेबसाइटों पर ले जाकर पासवर्ड चुराने की कोशिश की गई.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रूफपॉइंट ने इस हैकर समूह को TA419 नाम दिया है. कंपनी के मुताबिक, यह समूह कम से कम अप्रैल 2025 से अमेरिका और जापान के थिंक टैंक, विश्वविद्यालयों, रक्षा कंपनियों और कानून से जुड़ी संस्थाओं में काम करने वाले लोगों को निशाना बना रहा है. हालिया अभियान में खास तौर पर AI नीति से जुड़े विशेषज्ञों पर ध्यान दिया गया.
पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारी के नाम से भेजे ईमेल
हैकर्स ने पूर्व अमेरिकी सरकारी अधिकारी लिन पार्कर के नाम का इस्तेमाल कर AI विशेषज्ञों को ईमेल भेजे. इन संदेशों में AI से जुड़ी किसी समिति में शामिल होने या किसी प्रोजेक्ट में सहयोग करने का प्रस्ताव दिया गया. बातचीत आगे बढ़ने के बाद उन्हें एक लिंक भेजा गया, जो देखने में सामान्य फाइल शेयरिंग या OneDrive जैसी सेवा का लगता था, लेकिन वास्तव में वह पासवर्ड चुराने वाली फर्जी वेबसाइट थी.
पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारी भी बने निशाना
रॉयटर्स के मुताबिक, ऐसे लक्ष्यों में एलेक्स एंगलर भी शामिल थे, जो पहले व्हाइट हाउस में काम कर चुके हैं और अब पेन सेंटर ऑन मीडिया, टेक्नोलॉजी एंड डेमोक्रेसी का नेतृत्व करते हैं. उन्हें पार्कर के नाम से एक ईमेल मिला था, जिसमें नए AI नीति प्रोजेक्ट से जुड़ने का प्रस्ताव दिया गया था. एंगलर को संदेश संदिग्ध लगा और अन्य लोगों से पुष्टि करने के बाद उन्हें पता चला कि ईमेल फर्जी था.
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सिर्फ तकनीक नहीं, AI नीति पर भी नजर
प्रूफपॉइंट के अनुसार, इस अभियान में AI रेगुलेशन, एक्सपोर्ट कंट्रोल और अमेरिका की राष्ट्रीय AI रणनीति पर काम करने वाले विशेषज्ञों को निशाना बनाया गया. कंपनी का आकलन है कि इसका मकसद केवल तकनीक चुराना नहीं, बल्कि अमेरिका में AI नीति कैसे बन रही है, इसकी जानकारी जुटाना भी हो सकता है.
चीन ने साइबर जासूसी के आरोपों से किया है इनकार
रॉयटर्स के मुताबिक, वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया. चीन लंबे समय से साइबर जासूसी में शामिल होने के आरोपों से इनकार करता रहा है. वहीं, पूर्व अमेरिकी अधिकारी पार्कर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच AI को लेकर प्रतिस्पर्धा को देखते हुए AI नीति से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश संभव है.
पहली बार नहीं है चीनी सेंधमारी
अमेरिका में चीनी हैकिंग और साइबर जासूसी के आरोपों से जुड़े कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं. इनमें सरकारी संस्थानों, टेलीकॉम कंपनियों, टेक्नोलॉजी सिस्टम और बड़ी होटल कंपनियों से जुड़ा डेटा निशाना बनाए जाने के मामले शामिल हैं.
1. 2026: अमेरिकी सरकारी एजेंसियां बनीं निशाना
अगस्त 2026 में अमेरिका ने एक कथित चीनी हैकिंग अभियान को नाकाम करने का दावा किया. रिपोर्टों के मुताबिक, इस अभियान में अमेरिकी न्याय विभाग, नासा, फेडरल रिजर्व और सीनेट से जुड़े सिस्टम को निशाना बनाया गया था. हमले के लिए क्यूस्कैन और क्यूटीआराउटर जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी.
2. 2024-25: ‘साल्ट टाइफून’ और टेलीकॉम नेटवर्क पर हमला
‘साल्ट टाइफून’ नाम से पहचाने गए एक चीनी हैकिंग समूह पर अमेरिकी टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क को निशाना बनाने का आरोप लगा. इस मामले में फोन कॉल से जुड़े रिकॉर्ड और दूसरी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाए जाने की बात सामने आई. इसी अवधि में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियानों और ट्रेजरी विभाग को भी साइबर हमलों का सामना करना पड़ा.
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3. 2021-23: माइक्रोसॉफ्ट सिस्टम और अहम बुनियादी ढांचे पर खतरा
2021 में Microsoft Exchange Server को बड़े साइबर हमले का सामना करना पड़ा. इसके अलावा अमेरिकी अधिकारियों ने चीनी हैकर्स पर पानी और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े सिस्टम को निशाना बनाने के आरोप भी लगाए. इन घटनाओं ने महत्वपूर्ण सेवाओं की साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई.
4. 2014-18: स्टारवुड होटल से बड़े पैमाने पर डेटा चोरी
अमेरिका में चीनी साइबर जासूसी से जुड़े पुराने मामलों में Starwood Hotels का मामला भी प्रमुख है. होटल कंपनी के सिस्टम में 2014 में सेंध लगने के बाद लंबे समय तक हमलावरों की पहुंच बनी रही. 2018 में सामने आई जानकारी के अनुसार, करीब 50 करोड़ ग्राहकों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी प्रभावित हुई थी. अमेरिकी अधिकारियों ने बाद में इस मामले को चीनी खुफिया गतिविधियों से जोड़ा था.
हर साल 600 अरब डॉलर तक का नुकसान
चीनी हैकिंग और साइबर जासूसी से अमेरिका को आर्थिक, रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. हालांकि इस नुकसान का कोई एक आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, कुछ अनुमानों में बौद्धिक संपदा की चोरी से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को हर साल 200 अरब से 600 अरब डॉलर तक का नुकसान होने की बात कही गई है.
इसके अलावा नासा, अमेरिकी सीनेट, फेडरल रिजर्व, ट्रेजरी और अन्य संवेदनशील सरकारी संस्थान भी साइबर हमलों का निशाना रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण डेटा और गोपनीय जानकारी की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं. टेलीकॉम कंपनियों पर हुए हमलों में करोड़ों लोगों से जुड़ा डेटा और निगरानी प्रणालियों से संबंधित जानकारी प्रभावित होने की बात सामने आई है. अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि चीनी हैकर बिजली, पानी और परिवहन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे में घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं, जिससे भविष्य में किसी बड़े संकट या संघर्ष के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है.
अमेरिका कर रहा ये उपाय
चीनी हैकिंग और साइबर जासूसी से निपटने के लिए अमेरिका ने अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति को और मजबूत किया है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) और साइबर सुरक्षा एजेंसियां हैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म और डोमेन पर कार्रवाई कर रही हैं. हाल में QScan और QTRouter जैसे कथित चीनी हैकिंग प्लेटफॉर्म के डोमेन जब्त किए गए. साथ ही नासा, न्याय विभाग, सीनेट और फेडरल रिजर्व जैसी संवेदनशील सरकारी संस्थाओं की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है.
अमेरिका AI क्षेत्र को भी खास तौर पर सुरक्षित करने पर जोर दे रहा है, क्योंकि TA419 जैसे हैकर समूह AI विशेषज्ञों और पूर्व सरकारी अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर उन्हें निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा अमेरिकी प्रशासन तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा और AI से जुड़े सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर काम कर रहा है.
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मंजिल की ओर जाते विमान और फिर हवा में ही वारदात तेल अवीब जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट के साथ जो कुछ भी हुआ उसने सनसनी मचा रखी है. लेकिन कहते हैं जब हालात विपरीत हो और मौत सामने हो तो कई बार आम लोगों में से ही सुपर हीरो निकल कर आ जाते हैं. 30 सितंबर को फ्लाई दुबई के साथ ही वही हुआ और 174 लोगों की जान पांच लोगों ने बचा ली. 30 सितंबर 2026 की सुबह आसमान में एक पल और मौत की छाया. एक ऐसा जानलेवा खतरा जो पूरे विमान पर मंडरा रहा था.
दुबई से तेल हवी जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट एफz1073 जिसमें लगभग 174 यात्री सवार थे. 33,000 फीट की ऊंचाई पर सब कुछ सामान्य लग रहा था. अचानक कॉकपिट से चीखें सुनाई देने लगी और चीफ पायलट कैप्टन स्मित मच्छार खून से लथपथ हो गए. महज 2 मिनट से भी कम समय में विमान 17,000 फीट से भी ज्यादा नीचे आ गया. शायद क्रैश के कुछ मिनट बाकी थे. यात्री चिल्ला रहे थे. बच्चे रो रहे थे.
घायल कैप्टन स्मिथ का इलाज किया
विमान में सवार यात्रियों को लगा जैसे 91 दोबारा हो रहा हो. लेकिन उस पल कुछ किरदार आगे बढ़े और उन्होंने इतिहास लिख दिया. इनमें पहले नंबर पर खुद विमान के कैप्टन स्मिथ मछार हैं. जिन्होंने जख्मी हालत में भी जान की परवाह किए बगैर विमान के दूसरे यात्रियों को अलर्ट किया. उसके बाद यानी भायून जो एक यात्री थे लेकिन विमान का कंट्रोल संभाल लिया. हसाफ राजवान और जुका मानिस ने संदिग्ध को काबू करने में मदद की. जबकि डेंटिस्ट शोता मुसायब ने कुल्हाड़ी लगने से घायल कैप्टन स्मिथ का इलाज किया.
चार इजराइयली यात्री कॉकपिट ओर दौड़े
दुबई से तेल बुधवार को अभी जाने वाली फ्लाई दुबई की उड़ान में 174 यात्री सवार थे. तभी अचानक जब केबिन कुल्हाड़ी मारने की घटना को लेकर चीख पुकार मच गई तो चार इजराइयली यात्री कॉकपिट ओर दौड़े और उसके बाद हुई हाथापाई में हर एक ने अलग-अलग भूमिका निभाई. कैप्टन स्मिथ मचार हीरो नंबर वन. स्मित मचार पर ओमानी मूल के को पायलट ने कुल्हाड़ी से हमला किया था. लेकिन स्मिथ मचार खुद गंभीर रूप से घायल हो गए और लहूलुहान होने के बावजूद कैप्टन स्मित मचार ने हमलावर को विमान पर पूरा नियंत्रण लेने नहीं दिया. उन्होंने दर्द सहते हुए कॉकपेट का दरवाजा खोल दिया जिससे क्रू और यात्री अंदर आकर हमलावर को काबू कर सके. उनके साहस और अनुभव से विमान को काबू में किया गया. सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. जिससे 174 लोगों की जान बच गई.
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