Gandhi Jayanti की पूर्व संध्या पर DTU ने Harijan Sevak Sangh में चलाया स्वच्छता अभियान
दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी (DTU) द्वारा महात्मा गांधी की जयंती की पूर्व संध्या पर और स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026’ के अंतर्गत 1 अक्टूबर 2026 को हरिजन सेवक संघ, दिल्ली में ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान का आयोजन किया गया। अभियान का उद्देश्य राष्ट्र के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता को रेखांकित करना तथा महापुरुषों के जीवन से सीख लेना था।
आज के इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की एचओडी (अकादमिक्स) डॉ. सरोज मलिक, समन्वयक डॉ. राजेश सिंह, संकाय सदस्यों डॉ. ऋचा एवं डॉ. शालू तथा बी.ए. एवं एम.ए. शिक्षा कार्यक्रमों के 20 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. संजीव राय ने छात्रों को सफ़ाई, जागरूकता, स्वावलंबन के परिप्रेक्ष्य में खादी ग्रामोद्योग के बारे में जानकारी दी।
विद्यार्थियों ने श्रमदान करते हुए परिसर की स्वच्छता एवं रख-रखाव में सक्रिय योगदान दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वच्छता को सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में समझना तथा विद्यार्थियों में स्वैच्छिक सेवा, नागरिक सहभागिता और श्रम की गरिमा की भावना विकसित करना था।
हरिजन सेवक संघ के साथ दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी के समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत आयोजित इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को महात्मा गांधी के जीवन, दर्शन और सादगी, स्वावलंबन, स्वच्छता, सामाजिक समानता तथा सामुदायिक सेवा जैसे मूल्यों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान किया। विद्यार्थियों ने स्वच्छता एवं श्रमदान के साथ-साथ टीमवर्क, अनुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता के महत्व को आत्मसात किया। विश्वविद्यालय ने इस पहल के माध्यम से भावी शिक्षकों को समाज के प्रति उत्तरदायी, संवेदनशील और समुदाय-केंद्रित नागरिक के रूप में विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। हरिजन सेवक संघ के परिसर में रहने वाले बच्चों ने चरखा चलाकर सूत बनाने की प्रक्रिया दिखाई।
Ethanol विवाद के बीच Bihar पहुँचे Nitin Gadkari, E-20 ईंधन से वाहनों को नुकसान के दावे करने वालों की कर दी खिँचाई
एथनॉल को लेकर देश में चल रही बहस के बीच जब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आज बिहार पहुंचे, तो वहां भी उनसे वही सवाल किया गया जो इन दिनों देशभर में उनसे पूछा जा रहा है। उनसे पूछा गया कि क्या पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है? गडकरी ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों को नुकसान पहुंचने की बात तथ्यों पर आधारित नहीं है।
हम आपको बता दें कि पटना में ‘बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 : द इमर्जिंग इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ का उद्घाटन करने पहुंचे गडकरी ने कहा कि देश की प्रमुख वाहन कंपनियां अपने वाहनों को शत-प्रतिशत एथनॉल से चलाकर परीक्षण कर चुकी हैं और इस संबंध में कोई शिकायत सामने नहीं आई है। गडकरी ने कहा, ‘‘संबंधित विभाग का मंत्री होने के नाते मैं जानता हूं कि सभी प्रमुख वाहन कंपनियों ने अपने वाहनों को 100 प्रतिशत एथनॉल के जरिये चलाकर भी देखा है और कोई शिकायत सामने नहीं आई है।’’
इसे भी पढ़ें: Nitin Gadkari ने बिहार को बाढ़ मुक्त करने के लिए Water Grid और ड्रेजिंग पर दिया जोर
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2022 से करीब चार करोड़ चार-पहिया और 20 करोड़ दोपहिया वाहन एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। गडकरी ने कहा कि यदि एथनॉल से वाहनों को नुकसान हो रहा है तो कोई सामने आकर इसकी शिकायत करके दिखाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एथनॉल मिश्रण की नीति केवल पेट्रोल में एक और ईंधन मिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कृषि को ऊर्जा और बिजली क्षेत्र से जोड़ने की बड़ी रणनीति है। उनके मुताबिक इससे किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुल रहे हैं और आने वाले समय में किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बन सकते हैं।
गडकरी ने कहा कि भारत करीब 22 लाख करोड़ रुपये मूल्य के पारंपरिक ईंधन का आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के कारोबार पर इसका असर पड़ सकता है, वे स्वाभाविक रूप से एथनॉल नीति को लेकर चिंतित हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि मक्के से एथनॉल बनाने और उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के फैसले से बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों की अतिरिक्त आय में करीब 45,000 करोड़ रुपये तक की वृद्धि हुई है। गडकरी ने सवाल उठाया कि किसानों के हित में आय बढ़ाना उन लोगों के हित साधने से बेहतर नहीं है, जिनसे भारत ईंधन आयात करता है?
गडकरी ने भविष्य के ईंधन और तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार नए विकल्पों पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि धान की भूसी से विमान ईंधन तैयार करने की दिशा में भी काम हुआ है। उनके मुताबिक आने वाला समय नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान का है और बिहार जैसे राज्यों को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। बिहार की संभावनाओं पर बात करते हुए गडकरी ने पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को निवेश का बड़ा आधार बताया। उन्होंने मखाने का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर उत्पादित होने वाले इस उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार के नई ऊंचाइयों पर पहुंचने की उम्मीद जताते हुए गडकरी ने राज्य में निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया। वहीं चौधरी ने निवेशकों से साफ शब्दों में कहा— ‘‘बिहार में विश्वास करें और बिहार में निर्माण करें।''
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









