अधीर रंजन का ममता को कांग्रेस में लौटने का न्योता:कहा- बंगाल में अपना नेता चुन लेंगे; 30 साल पहले कांग्रेस छोड़कर TMC बनाई थी
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को ममता बनर्जी को दोबारा कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया। मुर्शिदाबाद में उन्होंने ममता से कहा कि उन्हें बचे हुए TMC विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए। चौधरी ने कहा कि कांग्रेस, बंगाल में ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार करने और उनके साथ काम करने को तैयार है। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से भी इस दिशा में कदम उठाने की अपील की। उन्होंने ममता बनर्जी से 6 अक्टूबर के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव जैसी पहल करते हुए रेजीनगर में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने को कहा। चौधरी ने बताया कि TMC के विधानसभा और संसदीय दलों में अलग-अलग बगावत हो चुकी है। इसलिए अब पार्टी के लिए अलग संगठन बनाए रखने की जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC बनाई थी। 2011 में पार्टी ने लेफ्ट फ्रंट का 34 साल पुराना शासन खत्म किया था। TMC 15 साल तक सत्ता में रही। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP सरकार चला रही है। ममता से कांग्रेस में लौटने की अपील चौधरी ने TMC के एक गुट की ओर से नंदीग्राम में कांग्रेस को हाल में दिए समर्थन का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को रेजीनगर में भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, “दोस्ताना पहल के तौर पर, जैसे उन्होंने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया, वैसे ही रेजीनगर में भी कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देना चाहिए।” नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन दे रहा ममता गुट नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट के उम्मीदवार ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद चुनाव मैदान से नाम वापस ले लिया था। गुट के पास उम्मीदवार नहीं बचने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था। यह घटनाक्रम चुनाव आयोग की ओर से प्रतिद्वंद्वी TMC गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित करने के कुछ घंटे बाद हुआ। दोनों गुटों के बीच मूल पार्टी पहचान को लेकर विवाद चल रहा है। TMC में विधानसभा और संसद के स्तर पर बगावत 2026 के विधानसभा चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा में TMC को 80 सीटें मिली थीं। इन चुनावों में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। चुनाव नतीजों के कुछ ही हफ्तों बाद TMC विधायक दल में भी बंटवारा हो गया। 58 बागी विधायकों ने निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने का समर्थन किया। विधानसभा अध्यक्ष ने इस प्रतिद्वंद्वी गुट को मान्यता दे दी। इसके बाद TMC के संसदीय दल में भी बगावत शुरू हो गई। बागी सांसदों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दी। विधानसभा के बागी अलग विधायी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, बागी सांसदों का समूह कम चर्चित NCPI के करीब चला गया है। इस समूह ने केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन दिया है। विधानसभा और संसद में एक साथ हुए इस टूट ने मामले को व्यापक बना दिया है। अब यह विवाद TMC की राजनीतिक पहचान, नेतृत्व और भविष्य को लेकर है। अधीर के बयान पर TMC की प्रतिक्रिया चौधरी ने ममता बनर्जी के कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के साथ हालिया जुड़ाव को भी अपनी अपील से जोड़ा। उन्होंने कहा, “जब उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन में सहारा लिया है, तो उन्हें पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए। बंगाल में हम कांग्रेस में आपके नेतृत्व में काम करेंगे।” चौधरी ने ममता बनर्जी से “अपना बोझ पीछे छोड़कर” कांग्रेस में आने को कहा। इसे उनके भतीजे और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर इशारा माना गया। हालांकि, TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी ऐसे प्रस्ताव पर तभी विचार करेगी, जब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आएगा। रॉय ने कहा, “चौधरी ने वही कहा, जो उन्हें लगा। हमें इस पर कुछ नहीं कहना है। TMC अब एक अलग पार्टी है।” उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस आधिकारिक प्रस्ताव लेकर आती है, तो हम पार्टी में इस पर चर्चा करेंगे। TMC INDIA गठबंधन का पूरी तरह हिस्सा है।” चौधरी की “बोझ” वाली टिप्पणी पर रॉय ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी को लेकर कोई फैसला नहीं हो सकता। रॉय ने कहा, “वह हमारे नेता और राष्ट्रीय महासचिव हैं।” रॉय के बयान से चौधरी के निजी प्रस्ताव और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से संभावित औपचारिक पहल के बीच अंतर साफ हुआ। उन्होंने यह भी दोहराया कि TMC INDIA गठबंधन की अलग पार्टी है। BJP बोली- TMC का राजनीतिक मकसद खत्म हो चुका BJP ने कांग्रेस और TMC के बीच हुई इस बातचीत को लेकर कहा कि तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक मकसद खत्म हो चुका है। BJP के पश्चिम बंगाल प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, “TMC का जन्म CPI(M) से लड़ने के लिए कांग्रेस से अलग होकर हुआ था। TMC इसी मुद्दे के आधार पर सत्ता में आई थी।” उन्होंने कहा, “अब जब TMC खुद सत्ता से बाहर है, तो उसके पास कोई दूसरा उद्देश्य नहीं बचा है। वे कांग्रेस में शामिल होंगे या नहीं, यह उनका फैसला है। हम कांग्रेस, TMC और CPI(M) से लड़ने के लिए तैयार हैं।” कांग्रेस से अलग होकर बनी थी TMC चौधरी के प्रस्ताव के पीछे TMC का राजनीतिक इतिहास भी जुड़ा है। ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC बनाई थी। इसके बाद TMC ने कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट, दोनों को चुनौती देते हुए अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। 2011 में पार्टी ने लेफ्ट फ्रंट का 34 साल पुराना शासन खत्म किया था। TMC 15 साल तक सत्ता में रही। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP सरकार चला रही है। TMC आंतरिक विभाजन का सामना कर रही है। वहीं, कांग्रेस बंगाल में अपनी राजनीतिक जगह वापस पाने की कोशिश कर रही है। संभावित विलय सिर्फ दो विपक्षी दलों के बीच चुनावी समझौता नहीं होगा। इससे यह सवाल फिर उठेगा कि सत्ता गंवाने और विधानसभा-संसदीय दलों में टूट के बाद TMC अपनी अलग संगठनात्मक पहचान बचा पाएगी या नहीं। ममता बनर्जी के लिए चौधरी का प्रस्ताव राजनीतिक रूप से असामान्य समय में आया है। कांग्रेस छोड़कर TMC बनाने वाली नेता को अब कांग्रेस में लौटने का न्योता दिया जा रहा है। कांग्रेस ने बंगाल में उनके नेतृत्व में काम करने की पेशकश की है। ममता बनर्जी के कांग्रेस छोड़कर TMC बनाने के 28 साल बाद चौधरी ने अब इसके उलट राजनीतिक सफर का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत कांग्रेस और TMC के बचे हुए संगठन एक ही राजनीतिक छतरी के नीचे आ सकते हैं।
आज का एक्सप्लेनर:क्या वाकई 9/11 जैसी घटना होना तय था; उन 72 मिनटों की कहानी, खून से लथपथ कैप्टन स्मित ने कैसे बचाया
30 सितंबर 2026, सुबह 9 बजकर 21 मिनट। सऊदी अरब के आसमान में अचानक एक प्लेन मुंह के बल नीचे गिरने लगा। कुछ मिनट के भीतर 34 हजार फीट की ऊंचाई से 17 हजार फीट पर आ गया। रफ्तार भी 760 से बढ़कर 1110 किमी/घंटा हो गई। विमान में बैठे यात्री आखिरी प्रार्थना करने लगे। लेकिन कॉकपिट के भीतर खून से लथपथ एक ‘हीरो’ की हिम्मत और जज्बे ने सभी 180 जानें बचा लीं। नाम है- कैप्टन स्मित मच्छर। इजराइल के पीएम नेतन्याहू, भारतीय पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कैप्टन स्मित की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने 9/11 जैसा बड़ा हादसा होने से बचा लिया। आखिर कौन हैं स्मित मच्छर, कॉकपिट में क्या हुआ और क्या वाकई 9/11 जैसा हादसा टला; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकपिट में क्या हुआ कि अचानक गिरने लगा था विमान? जवाबः ये फ्लाईदुबई एयरलाइन का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान था। स्थानीय समयानुसार सुबह 7:05 बजे प्लेन ने UAE के दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी। कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित और एक को-पायलट मौजद था। फ्लाइट इजराइल के तेल अवीव शहर जा रही थी। करीब 8 बजे प्लेन 35,000 फीट की हाइट पर था। टेक ऑफ के करीब ढाई घंटे बाद तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा। प्लेन UAE के एयर स्पेस से निकलकर सऊदी अरब के आसमान पहुंचा। इसके बाद अचानक सब कुछ बदल जाता है…. सवाल-2: स्मित लहूलुहान थे, तो फ्लाइट कैसे सुरक्षित लैंड हुई? जवाबः पहले यात्री, जो कॉकपिट में दाखिल हुए, वो यानिव हायून थे। फ्लाइट FZ 1073 की सुरक्षित लैंडिंग के बाद नेतन्याहू ने तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर यानिव से मुलाकात की और उन्हें गले लगाकर शाबाशी दी। पेशे से प्लंबर यानिव ने नेतन्याहू को बताया कि प्लेन में एक ऑफ-ड्यूटी पायलट भी मौजूद थे। दोनों ने मिलकर कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में कामयाब नहीं हुए। हालांकि बेहोश होने से पहले स्मित ने दरवाजा खोल दिया। तब अंदर पहुंचे यानिव ने बताया, 'पायलट्स की दोनों सीटें खाली थीं। मैंने देखा एक पायलट फर्श पर लहूलुहान पड़ा था और दूसरा पायलट दोनों सीटों के बीच कंट्रोल पैनल पर चढ़ा था।' यानिव ने को-पायलट की गर्दन पकड़कर उसे पीछे की तरफ कॉकपिट से बाहर घसीट लिया। नेतन्याहू के पूछने पर यानिव ने बताया कि ऐसा लग रहा था कि वो कंट्रोल पैनल के साथ छेड़छाड़ करने या उसे डैमेज करने की कोशिश कर रहा था। यानिव ने दूसरे यात्रियों को आवाज दी। सभी ने मिलकर आरोपी को-पायलट को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया। को-पायलट को काबू करने वाले तीन इजराइली यात्रियों में शामिल त्जिका मानेस के मुताबिक, हमलावर पायलट को काबू करने में करीब 20-25 मिनट लगे। तीनों ने तार वाले हेडफोन से उसे बांध दिया। इसके बाद यानिव ने कंट्रोल स्टिक्स पकड़कर पीछे खींचे, ताकि विमान ऊपर उठ सके। नेतन्याहू ने पूछा, 'क्या आपने वाकई ऐसा किया था?' इस पर यानिव ने हंसते हुए जवाब दिया, 'हां मैंने स्टिक्स पूरी तरह पीछे खींच दी थीं। मैं प्लेन हादसों के इन्वेस्टीगेशन देखता रहता हूं।' स्टिक्स खींचने के बाद विमान कुछ स्थिर होने लगा। यानिव के मुताबिक, केबिन में दो पायलट मौजूद थे। वो शुरू में सदमे में लग रहे थे। यानिव ने उनसे चिल्लाकर प्लेन का कंट्रोल लेने को कहा। एक पायलट ने कंट्रोल हाथ में ले लिया और जहाज को सऊदी अरब के ताबुक में प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ मोड़ दिया। 10:45 बजे प्लेन सुरक्षित एयर पोर्ट पर उतर गया। फ्लाइट में मौजूद एक इजराइली डेंटिस्ट ने स्मित का शुरुआती इलाज किया। यानिव ने कहा, ‘हमने आखिरी तक उन्हें जीवित रखा।’ नेतन्याहू ने खून से सने कपड़े पहने यानिव से पूछा, 'आपको पता है कि आप क्या रहे थे?' यानिव ने जवाब दिया, 'हम शेरों का देश हैं।' दरअसल, यहूदियों की बाइबिल में यहूदियों की तुलना उठकर खड़े होते हुए शेर से की गई है। जून 2025 में ईरान पर हुए इजराइली हमले का नाम भी- 'राइजिंग लायन' था। ये पूरी कहानी फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा, इजराइली रिपोर्ट्स, सऊदी अधिकारियों और यात्रियों के बयानों के आधार पर है। जांच अभी जारी है इसलिए घटनाओं के सीक्वेंस में बदलाव हो सकता है। नेतन्याहू ने यानिव से कहा, ‘तुम्हारे बिना यह एक और 9/11 हो सकता था। इस पर यानिव ने भी कहा कि उनके हिसाब से को-पायलट का यही इरादा था। सवाल-3: क्या वाकई 9/11 जैसी घटना हो सकती थी? जवाबः 11 सितंबर 2001 को आतंकी संगठन अलकायदा के 19 आतंकियों ने 4 घरेलू अमेरिकी विमान हाईजैक कर लिए थे। इनमें से दो को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर और एक को अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन की बिल्डिंग से टकराकर क्रैश करवा दिया था। चौथा प्लेन व्हाइट हाउस पर क्रैश होने वाला था, लेकिन यात्रियों की सूजबूझ से पेन्सिलवेनिया के खाली मैदान में क्रैश हुआ। करीब 2900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। यानिव और नेतन्याहू के अलावा कई इजराइली पत्रकारों और आम लोगों ने स्मित के को-पायलट को आतंकी कहा है। नेतन्याहू ने यानिव से बातचीत में कहा, ‘अगर विमान इजराइल पहुंच जाता, तो न जाने क्या होता।’ पीएम मोदी ने भी नेतन्याहू की 9/11 जैसा हमला टलने की बात दोहराई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी को-पायलट ओमान का नागरिक है। इसकी जांच हो रही है कि वह इजराइल आने वाली फ्लाइट का पायलट कैसे बना और क्या इसके लिए उसने ओमान के अलावा इजराइल या किसी और देश की नागरिकता भी हासिल की थी। इजराइली मीडिया सोर्सेज के मुताबिक, वह फ्लाईदुबई एयरलाइंस में एक साल से भी कम समय से काम कर रहा था। यानिव के मुताबिक, वो प्लेन के कंट्रोल्स से छेड़छाड़ कर रहा था। हालांकि फ्लाईदुबई ने हमले के पीछे को-पायलट की मंशा पर कोई बयान नहीं दिया है। उसे इलाज के बाद पूछताछ के लिए UAE ले जाया गया है। अमेरिकी एविएशन एक्सपर्ट जेफ गुजेटी के मुताबिक, ‘प्लेन 10 हजार फीट के नीचे चला जाता, तो उसे क्रैश होने से बचाना मुमकिन नहीं होता। इजराइल ने भी 9/11 जैसा हमला टालने के लिए प्लेन को हवा में ही मार गिराने की तैयारी कर ली थी।’ इजराइली न्यूज पोर्टल वाईनेट ग्लोबल के मुताबिक, इजराइली एयरफोर्स के पायलट जॉर्डन में तैनात थे। अगर प्लेन इजराइल सीमा के अंदर क्रैश होने वाला होता, तो उसे हवा में शूट कर दिया जाता। सवाल-4: कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर और अब उनकी हालत कैसी है? जवाबः मूलतः गुजरात के रहने वाले 39 साल के स्मित परिवार के साथ शुरुआत में मुंबई के घाटकोपर (ईस्ट) में रहते थे। स्मित के मुताबिक, पायलट बनना उनका बचपन का सपना नहीं था। परिवार का कपड़े का पुराना कारोबार है। स्कूली पढ़ाई के बाद स्मित ने कपड़े के व्यापार से जुड़ा टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का कोर्स किया। इसके बाद वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से BBA की डिग्री ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक एविएशन सेमिनार अटेंड करने के दौरान उन्हें पायलट बनने का ख्याल आया। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड के एक इंस्टीट्यूट से पायलट ट्रेनिंग ली। इसमें करीब 17 लाख रुपए खर्च हुए। इस हादसे के बाद स्मित का 2025 का एक पॉडकास्ट चर्चा में है। इसमें स्मित बता रहे हैं कि पायलट बनने के फैसले से उनकी मां डर गई थीं, लेकिन पिता बिल्कुल शांत थे। 2011 में स्मित बतौर कमर्शियल पायलट मुंबई में स्पाइसजेट एयरलाइंस से जुड़े। स्मित के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले बेंगलुरु से दिल्ली की फ्लाइट उड़ाई। ये एक बोइंग विमान था। स्मित ने 11 साल स्पाइसजेट के विमान उड़ाए। नवंबर 2020 में स्मित ट्रेनिंग कैप्टन बने। इसके बाद वो दूसरे पायलट्स को फ्लाइंग ट्रेनिंग देते थे। जून 2022 में स्मित UAE की एयरलाइंस फ्लाईदुबई से जुड़ गए। यहां वह कैप्टन की पोस्ट पर हैं। कमर्शियल फ्लाइट्स में कैप्टन को पायलट-इन-कमांड कहते हैं। उड़ान के दौरान को-पायलट भी अहम भूमिका निभाता है, लेकिन विमान की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी, उसका कंट्रोल और इमरजेंसी के समय आखिरी निर्णय कैप्टन ही लेता है। फिलहाल स्मित अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ दुबई में ही रहते हैं। अक्टूबर 2025 के पॉडकास्ट में स्मित ने फ्लाइट की सिक्योरिटी और विमान में डॉक्टर्स और क्रू मेंबर्स की अहमियत के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, 'जब हम ऊपर होते हैं और अगर कुछ हो जाए, तो आपको कौन बचाएगा? आप भाग्यशाली होंगे अगर फ्लाइट में कोई डॉक्टर मौजूद हो, वे आपकी जान बचा सकते हैं।' स्मित ने एक और किस्सा बताया कि फ्लाइट के दौरान एक प्रेग्नेंट महिला को लेबर पेन शुरू हो गया था। ऐसे में उन्होंने एक नजदीकी एयरपोर्ट ढूंढकर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई। घायल होने के बाद स्मित बेहोश हो गए थे, उन्हें सऊदी के तबुक के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन पर हमले के आरोपी को-पायलट को भी इसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मित की सर्जरी हुई है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा में वाणिज्य दूतावास नजर बनाए हुए हैं और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बताया है कि उन्होंने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्रभाई, मां गीताबेन और पत्नी सोनलबेन से बात की है। --------- ये खबर भी पढ़िए… अभिनंदन ने वायुसेना छोड़कर प्राइवेट एयरलाइन क्यों जॉइन की; उन्हें छुड़ाने के लिए भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलें तान दी थीं मिग-21 से पाकिस्तानी F-16 गिराने वाले फाइटर पायलट अभिनंदन वर्धमान ने प्राइवेट एयरलाइन जॉइन कर ली है। उन्होंने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना छोड़ दी, जबकि सामान्य रिटायरमेंट 2037 में होना था। अभिनंदन अब गोवा की प्राइवेट एयरलाइन कंपनी ‘FLY 91’ के लिए ATR विमान उड़ाएंगे। पूरी खबर पढ़िए…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 









