भारत-ईएफटीए व्यापार समझौते को एक साल पूरा, पीयूष गोयल बोले- भारतीय निर्यातकों के लिए खुले नए अवसर
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के एक साल पूरे होने पर कहा कि इसने भारतीय व्यवसायों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खोले हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, गोयल ने इस समझौते को चार ईएफटीए देशों (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन) के साथ भारत के आर्थिक जुड़ाव में एक अहम पड़ाव बताया।
उन्होंने कहा कि ईएफटीए देशों ने अगले 15 सालों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है। उम्मीद है कि इस कदम से 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी।
गोयल के अनुसार, निवेश के ये वादे भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देंगे और लंबे समय तक आर्थिक विकास में योगदान देंगे।
मंत्री ने कहा कि टीईपीए 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देता है, जिसमें ईएफटीए देशों को भारत के 99.6 प्रतिशत एक्सपोर्ट शामिल हैं। इसमें नॉन-एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स के लिए पूरी कवरेज भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि साथ ही, भारत ने इस समझौते के तहत डेयरी, सोया, कोयला और कुछ एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स जैसे संवेदनशील सेक्टरों को सुरक्षित रखा है।
समझौते के शुरुआती असर पर जोर देते हुए गोयल ने कहा कि टीईपीए लागू होने के बाद से मोटर कारों और अन्य गाड़ियों, हेवी वाटर और मोल्डिंग पैटर्न के निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा, एक अहम नतीजा यह है कि टीईपीए लागू होने के बाद से मोटर कारों और अन्य मोटर गाड़ियों, हेवी वाटर और मोल्डिंग पैटर्न के भारत के निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है। यह तो बस शुरुआत है।
मंत्री ने कहा कि यह ट्रेड एग्रीमेंट अलग-अलग सेक्टरों में भारतीय निर्यातकों के लिए मौके मजबूत करने में मदद कर रहा है और साथ ही ईएफटीए देशों के साथ गहरे आर्थिक सहयोग का रास्ता भी बना रहा है।
मंत्री ने बताया कि यह समझौता बिजनेस के लिए नए रास्ते बना रहा है, बाजार पहुंच बढ़ा रहा है और भारत तथा ईएफटीए ब्लॉक के बीच आपसी विकास और समृद्धि को बढ़ावा दे रहा है।
--आईएएनएस
एबीएस
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मणिपुर के बिष्णुपुर जिले की छह सीटों पर 2027 से पहले कैसा है सियासी हाल?
Manipur Bishnupur Assembly Election 2027: करीब एक साल तक राष्ट्रपति शासन में रहने के बाद मणिपुर में फरवरी 2026 में नई सरकार बनी. अब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इंफाल घाटी से सटे बिष्णुपुर जिले की सियासत हमेशा से राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती रही है. आइए जानते हैं जिले की सभी सीटों का पूरा हाल.
साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत दर्ज की गई
जनगणना 2011 के अनुसार बिष्णुपुर जिले की कुल आबादी करीब 2 लाख 37 हजार है, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 1 लाख 19 हजार और महिलाओं की संख्या करीब 1 लाख 19 हजार है. यहां लिंगानुपात लगभग बराबरी पर है, प्रति हजार पुरुषों पर 999 महिलाएं दर्ज हुई हैं, जो देश के ज्यादातर जिलों से बेहतर है. एक रिपोर्ट के अनुसार यहां साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसमें पुरुष साक्षरता करीब 88 प्रतिशत और महिला साक्षरता करीब 71 प्रतिशत दर्ज हुई है.
आबादी करीब 9 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की आबादी
जानकारी के मुताबिक जिले की करीब 63 प्रतिशत आबादी गांवों में और बाकी शहरी इलाकों में रहती है. धार्मिक बनावट के लिहाज से यह जिला मुख्य रूप से हिंदू और सनामही (मैतेई पारंपरिक धर्म) अनुयायियों का मिश्रण आबादी वाला है. यहां हिंदू धर्म मानने वालों की हिस्सेदारी करीब 74 प्रतिशत और सनामही धर्म मानने वालों की हिस्सेदारी करीब 16 प्रतिशत है. इसके अलावा मुस्लिम समुदाय (जिन्हें स्थानीय तौर पर मैतेई पंगल कहा जाता है) की आबादी करीब 8 प्रतिशत है, जबकि ईसाई समुदाय की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत है. इसके अलावा जिले में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 9 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की आबादी करीब 1 प्रतिशत है.
#Meghalaya | The Election Commission of India has extended the schedule for the Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls in Meghalaya, with the final electoral roll now set to be published on October 26, 2026.
— NORTHEAST TODAY (@NortheastToday) October 1, 2026
..https://t.co/B0yRuCAfLV#ElectionCommission… pic.twitter.com/34XHf2cGA2
जिले में छह विधानसभा सीटें, कोई भी आरक्षित नहीं
बिष्णुपुर जिले में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं नांबोल, ओइनम, बिष्णुपुर, मोइरांग, थंगा और कुम्बी. यह सभी छह सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं, यहां कोई भी सीट अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए आरक्षित नहीं है, क्योंकि यह जिला मणिपुर घाटी के मैतेई बहुल इलाके में आता है, जहां आदिवासी आबादी बेहद सीमित है.
भाजपा-एनपीपी गठबंधन का दबदबा
2022 के विधानसभा चुनाव में बिष्णुपुर जिले की छह सीटों में से तीन पर भाजपा और दो पर नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) ने जीत दर्ज की थी. जो दोनों राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा हैं. आइए आपको हर विधानसभा का ब्रीफ परिचय देते हैं.
नांबोल विधानसभा सीट पर भाजपा के थौनाओजम बसंत कुमार सिंह ने जीत दर्ज की.
ओइनम सीट पर एनपीपी की इरेंगबाम नलिनी देवी विजयी रहीं.
बिष्णुपुर सीट पर भाजपा के कोंथौजम गोविंदास सिंह ने जनता दल यूनाइटेड के ओइनम नबकिशोर सिंह को करीब 46 प्रतिशत बनाम 41 प्रतिशत वोट शेयर के अंतर से हराया था.
मोइरांग विधानसभा सीट पर एनपीपी के थोंगम शांति सिंह ने जीत दर्ज की.
थंगा विधानसभा सीट पर भाजपा के तोंगब्रम रोबिंद्रो सिंह ने करीब 12 हजार 531 वोटों के साथ जीत हासिल की. खास बात यह रही कि वे पिछली बार तृणमूल कांग्रेस के इकलौते विधायक थे, मगर चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए थे.
कुम्बी सीट पर भाजपा के सानासाम प्रेमचंद्र सिंह ने जनता दल यूनाइटेड के अहांथेम शानजॉय सिंह को महज 372 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया था. बताया जाता है कि यह जिले की सबसे करीबी जीत रही.
#Manipur after 2027 election????????
— পে্মAnanda 0.2 (@PremAna30485994) September 23, 2026
Kyun hilla dala na @YKhemchandSingh @NBirenSingh
pic.twitter.com/cUdsLkgk0Y
जिले की राजनीति कांग्रेस से..., अब भाजपा-एनपीपी का दौर
मणिपुर की राजनीति में शुरुआती दशकों में कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा था. खासकर 1970 और 1980 के दशक में यहां कांग्रेस काफी मजबूत थी. इसके बाद मणिपुर पीपल्स पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों का उभार हुआ, जिसने बिष्णुपुर जिले की कई सीटों पर लंबे समय तक पकड़ बनाए रखी. फिर 2000 के दशक में कांग्रेस ने ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में राज्य की सत्ता पर दोबारा कब्जा जमाया और करीब डेढ़ दशक तक शासन किया.
2017 के विधानसभा चुनाव ने राज्य की सियासी तस्वीर बदल दी
2017 के विधानसभा चुनाव ने राज्य की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल दी, जब भाजपा ने पहली बार मणिपुर में सरकार बनाई. बिष्णुपुर जिले में भी इसी दौर से भाजपा और उसके सहयोगी दलों का दबदबा लगातार बना हुआ है. 2022 में भी इस जिले की किसी भी सीट पर कांग्रेस या किसी विपक्षी दल को जीत नहीं मिल सकी जो राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन की मजबूत पकड़ को दर्शाता है.
नियुक्त किए गए दो उपमुख्यमंत्री, 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसलिए दिया था इस्तीफा
मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल गई. फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था, जो करीब एक साल तक जारी रहा. फरवरी 2026 में राष्ट्रपति शासन हटाकर भाजपा के वरिष्ठ नेता यमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया साथ ही सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए दो उपमुख्यमंत्री भी नियुक्त किए गए.
कुम्बी विधानसभा सीट का इतिहास है दिलचस्प
बिष्णुपुर जिले के लिए एक और अहम घटनाक्रम कुम्बी सीट से जुड़ा है. यहां से जीते भाजपा विधायक के खिलाफ हारे हुए प्रत्याशी ने चुनाव याचिका दाखिल की थी, जिस पर मणिपुर उच्च न्यायालय ने अगस्त 2023 में फैसला सुनाया और इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिससे यह सीट फिलहाल खाली है. 2027 के चुनाव से पहले इस सीट पर दोबारा मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है.
कांग्रेस राज्यभर में संगठन को फिर खड़ा करने की कोशिश कर रही
जातीय हिंसा के बाद से बिष्णुपुर जिला जो इंफाल घाटी और पहाड़ी इलाकों के बीच की सीमा पर स्थित है सुरक्षा और राहत-पुनर्वास जैसे मुद्दों के लिहाज से भी संवेदनशील बना हुआ है. 2027 के चुनाव में शांति बहाली, विस्थापितों के पुनर्वास और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दे यहां की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. नई सरकार के गठन के बाद भाजपा और एनपीपी दोनों दल जिले में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि कांग्रेस भी राज्यभर में संगठन को फिर खड़ा करने की कोशिश कर रही है.
किस सीट पर किसका कितना असर
- नांबोल सीट पर मैतेई समुदाय का प्रभुत्व है. सीट में व्यापारी और कृषक वर्ग अपना प्रभाव रखते हैं.
- ओइनम सीट पर मैतेई हिंदू और सनामही अनुयायियों का मिला-जुला प्रभाव है. बताया जाता है कि यहां पारंपरिक राजनीतिक परिवारों की मजबूत पकड़ है.
- बिष्णुपुर सीट पर मैतेई समुदाय बहुसंख्यक संख्या में है. यहां सामाजिक-धार्मिक संस्थाएं राजनीति पर अपना प्रभाव रखती हैं.
- मोइरांग सीट पर मैतेई समुदाय के साथ कुछ छोटे जनजातीय समूहों (जैसे चोथे समुदाय) अपना प्रभाव रखता है.
- थंगा सीट पर झील किनारे बसी मछुआरा बिरादरी और मैतेई समुदाय का प्रभाव है.
- कुम्बी सीट पर मैतेई हिंदू और मुस्लिम (मैतेई पंगल) समुदाय दोनों का वोट बैंक मजबूत है.
FAQ
Q: बिष्णुपुर जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
A: बिष्णुपुर जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं, नांबोल, ओइनम, बिष्णुपुर, मोइरांग, थंगा और कुम्बी.
Q: इनमें से कौन-सी सीट आरक्षित है?
A: जिले की सभी छह सीटें सामान्य श्रेणी की हैं, यहां कोई भी सीट अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए आरक्षित नहीं है.
Q: 2022 चुनाव में बिष्णुपुर जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
A: भाजपा को तीन सीटें (नांबोल, बिष्णुपुर, थंगा) और एनपीपी को दो सीटें (ओइनम, मोइरांग) मिलीं, जबकि कुम्बी सीट भी भाजपा ने जीती थी.
Q: बिष्णुपुर जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
A: जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू धर्म मानने वालों की हिस्सेदारी करीब 74 प्रतिशत, सनामही अनुयायियों की करीब 16 प्रतिशत और मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत है.
Q: जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
A: शुरुआती दशकों में कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का प्रभाव रहा, मगर 2017 के बाद से भाजपा और उसके सहयोगी दलों का दबदबा लगातार बना हुआ है.
Q: 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
A: मई 2023 की जातीय हिंसा और करीब एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद फरवरी 2026 में नई सरकार बनी है.
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