एशियाई मूल्य : साझा भविष्य वाले एशियाई समुदाय के निर्माण के लिए आध्यात्मिक संपदा
बीजिंग, 28 जनवरी (आईएएनएस)। 1980 के दशक में, जब पश्चिमी भविष्यवक्ताओं ने दावा किया था कि एशिया कभी पश्चिम से आगे नहीं निकल पाएगा, दक्षिण कोरिया, चीन के थाइवान, सिंगापुर और चीन के हांगकांग, जिन्हें चार एशियाई टाइगर के रूप में जाना जाता है, ने केवल 30 वर्षों में गरीबी से समृद्धि में एक उल्लेखनीय परिवर्तन पूरा किया।
चीन ने कुछ ही दशकों में औद्योगीकरण की वह प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिसमें विकसित देशों को सैकड़ों साल लगे, और खुद को एक गरीब राष्ट्र से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बदल दिया तथा तीव्र आर्थिक विकास और दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता का चीनी चमत्कार रच दिया।
आज के बौद्धिक युग में, जहां पश्चिमी मॉडल बार-बार असफलताओं का सामना कर रहे हैं, वहीं एशियाई लोगों ने विविधता में सामंजस्य के ज्ञान का उपयोग करते हुए जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान किया है। इसके पीछे आध्यात्मिक संपदा—एशियाई मूल्य—छिपे हैं। एशियाई मूल्य केवल खोखले नारे नहीं हैं, बल्कि एक वास्तविक और ठोस संपत्ति हैं। इसने एशिया को अधिक एकजुट बनाया है और दुनिया को दिखाया है कि विभिन्न संस्कृतियां सद्भावपूर्वक सह-अस्तित्व में रह सकती हैं, मतभेदों को चर्चा के माध्यम से हल किया जा सकता है, और विकास एक शून्य-योग खेल नहीं है बल्कि सहयोग के माध्यम से एक समान-जीत की स्थिति है।
इतिहास में, एशियाई देशों ने अपने अद्वितीय ज्ञान के माध्यम से दुनिया को विविध शासन और विकास प्रतिमान प्रदान किए हैं। इस प्रक्रिया के पीछे एशियाई मूल्यों का आध्यात्मिक समर्थन और व्यावहारिक मार्गदर्शन निहित है। एशियाई मूल्य इस बात पर जोर देते हैं कि शांति विकास की आधारशिला है, सहयोग पारस्परिक लाभ और समान-जीत परिणाम प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है, खुलापन नवाचार और समृद्धि को प्रेरित करता है, और समावेशिता सभ्यताओं की विविधता का सम्मान करती है। एशिया, अपने समृद्ध विकास के साथ, एक शांतिपूर्ण, स्थिर और बहुध्रुवीय व्यवस्था के निर्माण की संभावना को प्रदर्शित करता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चीनी बाजार हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण : फिनिश व्यावसायिक समुदाय
बीजिंग, 28 जनवरी (आईएएनएस)। चीन-फिनलैंड नवाचार उद्यम सहयोग समिति की छठी बैठक में, फिनलैंड के अध्यक्ष जुस्सी हेर्लिन ने खूब तालियां बटोरीं।
उन्होंने अपनी थोड़ी अटपटी चीनी भाषा में कहा कि हम तीस वर्षों से चीनी बाजार में मौजूद हैं। चीन हमारे सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है, जो हमारे राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। यह हमारा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र और हमारी कंपनी का सबसे बड़ा विदेशी अनुसंधान एवं विकास केंद्र भी है। इसलिए, हर दृष्टिकोण से चीन हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेशक, हम स्थानीय स्तर पर निवेश करना जारी रखेंगे।
बैठक में चीन में फिनलैंड दूतावास के मंत्री-परामर्शदाता मार्को टिएस्माकी ने कहा कि इस प्रतिनिधिमंडल में लगभग 20 फिनिश कंपनियों ने भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल का गठन काफी कम समय में किया गया था। कई वरिष्ठ अधिकारियों और कंपनी के प्रबंधकों को इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने के लिए अंतिम समय में अपने कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। इसलिए, मेरा मानना है कि यह अकेले ही चीनी बाजार के प्रति हमारे उद्यमों की मजबूत प्रतिबद्धता को अच्छी तरह से दर्शाता है।
गौरतलब है कि बैठक के दिन, दोनों देशों की कंपनियों ने कई व्यावसायिक सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए। डिजिटल परिवर्तन, हरित और कम कार्बन विकास, और चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवा आदि बैठक स्थल के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा के प्रमुख विषय रहे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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