ट्रंप ने खामेनेई को दी एक और चेतावनी, कहा- फिर वेनेजुएला जैसे एक्शन के लिए तैयार है अमेरिका
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसे खुले शब्दों में चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर तुरंत बातचीत की मेज पर नहीं आता, तो अमेरिका का अगला सैन्य कदम पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और निर्णायक होगा. ट्रंप के मुताबिक हालात बेहद गंभीर हैं और अब समय तेजी से निकलता जा रहा है.
“…Hopefully Iran will quickly “Come to the Table” and negotiate a fair and equitable deal - NO NUCLEAR WEAPONS - one that is good for all parties. Time is running out, it is truly of the essence! As I told Iran once before, MAKE A DEAL…” - President DONALD J. TRUMP pic.twitter.com/H6qLbw3Ndi
— The White House (@WhiteHouse) January 28, 2026
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का सख्त संदेश
बुधवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लंबा पोस्ट साझा किया. उन्होंने लिखा कि ईरान को ऐसा समझौता करना होगा, जिसमें यह साफ लिखा हो कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने पहले भी ईरान को चेताया था और चेतावनी को नजरअंदाज करने का नतीजा जून में हुए अमेरिकी सैन्य हमले के रूप में सामने आया था. उनका कहना था कि अगर अब भी ईरान नहीं माना, तो अगली कार्रवाई और ज्यादा विनाशकारी होगी.
मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ा अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा
ट्रंप ने अपने पोस्ट में यह भी खुलासा किया कि अमेरिका का एक विशाल नौसैनिक बेड़ा मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने इसे अब तक के सबसे बड़े आर्माडा में से एक बताया. ट्रंप के अनुसार इस बेड़े का नेतृत्व शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर ‘अब्राहम लिंकन’ कर रहा है, जो किसी भी स्थिति में तेज और आक्रामक कार्रवाई के लिए तैयार है. उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि यह बेड़ा वेनेजुएला मिशन से भी बड़ा और ज्यादा सक्षम है.
पुराने हमलों का किया जिक्र
अमेरिकी राष्ट्रपति ने जून 2025 में हुए सैन्य ऑपरेशन का भी उल्लेख किया, जिसमें ईरान की कई अहम न्यूक्लियर फैसिलिटीज को निशाना बनाया गया था. ट्रंप ने कहा कि उस ऑपरेशन ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया था और अगली बार हालात उससे भी ज्यादा भयावह हो सकते हैं.
उन्होंने यह भी दोहराया कि अगर ईरान ने दोबारा अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज किया, तो अमेरिका पीछे नहीं हटेगा.
बातचीत से ईरान का इनकार
दूसरी तरफ ईरान की ओर से तनाव कम करने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने साफ कहा है कि अमेरिका के किसी विशेष दूत से हाल के दिनों में कोई बातचीत नहीं हुई है और न ही ईरान ने वार्ता की पहल की है.
नाजुक मोड़ पर हालात
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी जिस स्तर पर पहुंच चुकी है, वह मिडिल ईस्ट को एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकती है. दोनों देश फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे, जिससे वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर गहरा असर पड़ सकता है.
एशियाई मूल्य : साझा भविष्य वाले एशियाई समुदाय के निर्माण के लिए आध्यात्मिक संपदा
बीजिंग, 28 जनवरी (आईएएनएस)। 1980 के दशक में, जब पश्चिमी भविष्यवक्ताओं ने दावा किया था कि एशिया कभी पश्चिम से आगे नहीं निकल पाएगा, दक्षिण कोरिया, चीन के थाइवान, सिंगापुर और चीन के हांगकांग, जिन्हें चार एशियाई टाइगर के रूप में जाना जाता है, ने केवल 30 वर्षों में गरीबी से समृद्धि में एक उल्लेखनीय परिवर्तन पूरा किया।
चीन ने कुछ ही दशकों में औद्योगीकरण की वह प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिसमें विकसित देशों को सैकड़ों साल लगे, और खुद को एक गरीब राष्ट्र से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बदल दिया तथा तीव्र आर्थिक विकास और दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता का चीनी चमत्कार रच दिया।
आज के बौद्धिक युग में, जहां पश्चिमी मॉडल बार-बार असफलताओं का सामना कर रहे हैं, वहीं एशियाई लोगों ने विविधता में सामंजस्य के ज्ञान का उपयोग करते हुए जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान किया है। इसके पीछे आध्यात्मिक संपदा—एशियाई मूल्य—छिपे हैं। एशियाई मूल्य केवल खोखले नारे नहीं हैं, बल्कि एक वास्तविक और ठोस संपत्ति हैं। इसने एशिया को अधिक एकजुट बनाया है और दुनिया को दिखाया है कि विभिन्न संस्कृतियां सद्भावपूर्वक सह-अस्तित्व में रह सकती हैं, मतभेदों को चर्चा के माध्यम से हल किया जा सकता है, और विकास एक शून्य-योग खेल नहीं है बल्कि सहयोग के माध्यम से एक समान-जीत की स्थिति है।
इतिहास में, एशियाई देशों ने अपने अद्वितीय ज्ञान के माध्यम से दुनिया को विविध शासन और विकास प्रतिमान प्रदान किए हैं। इस प्रक्रिया के पीछे एशियाई मूल्यों का आध्यात्मिक समर्थन और व्यावहारिक मार्गदर्शन निहित है। एशियाई मूल्य इस बात पर जोर देते हैं कि शांति विकास की आधारशिला है, सहयोग पारस्परिक लाभ और समान-जीत परिणाम प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है, खुलापन नवाचार और समृद्धि को प्रेरित करता है, और समावेशिता सभ्यताओं की विविधता का सम्मान करती है। एशिया, अपने समृद्ध विकास के साथ, एक शांतिपूर्ण, स्थिर और बहुध्रुवीय व्यवस्था के निर्माण की संभावना को प्रदर्शित करता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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