Sitapur में सरकारी अफसर बनकर 27 लाख रुपये की ठगी करने वाला दंपत्ति गिरफ्तार
सीतापुर (उप्र), एक अक्टूबर सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को सस्ते नीलामी वाले सोने की व्यवस्था करने और खराब नोटों को बदलने के बहाने 27 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में यहां एक दंपति को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान कन्नौज निवासी रोहित बाजपेई और उसकी पत्नी अनु बाजपेई उर्फ चंद्रा के रूप में हुई, जो नेपाल के चितवन की मूल निवासी है। सीतापुर के पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को बताया कि दंपति ने सीतापुर शहर के प्रेम नगर इलाके में एक मकान किराए पर लिया था और लोगों का भरोसा जीतने के लिए फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पेश किया और लोगों से ठगी की।
अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने नीलामी वाला सोना दिलाने के लिए मकान मालिक रामनरेश जायसवाल से 20 लाख रुपये, खराब नोट बदलने के लिए 2 लाख रुपये, एक अन्य व्यक्ति के माध्यम से 1 लाख रुपये और उसी इलाके के एक धोबी से 4 लाख रुपये लिए। अग्रवाल ने कहा, “ दोनों 14 सितंबर को पैसे लेकर फरार हो गए और उसके बाद आगरा, कोटा, बैतूल और चेन्नई में स्थान बदलते रहे।” उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी के पैसों से कथित तौर पर लगभग 6 लाख रुपये के सोने के गहने और दो मोबाइल फोन खरीदे गए थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 14 लाख रुपये नकद, 38.740 ग्राम सोने के गहने, चार मोबाइल फोन और इनकम टैक्स, आधार और पैन कार्ड जैसे नकली पहचान दस्तावेज बरामद किए गए।
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि आरोपी 2005 से ही इसी तरह की धोखाधड़ी में शामिल रहे हैं और उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और बिहार में मामले दर्ज हैं।
KC Venugopal ने FCRA Bill की जल्दबाजी में जांच पर जताई चिंता, Speaker Om Birla को लिखा पत्र
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' की जांच कर रही जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी की 'जल्दबाजी वाली कार्यवाही' पर चिंता जताई। उन्होंने स्पीकर से मामले में दखल देने का आग्रह करते हुए कहा कि अगर इसे शीतकालीन सत्र में जल्दबाजी में पास किया गया, तो संसदीय जांच सिर्फ़ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
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बिरला को लिखे पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि उन्हें पता चला है कि प्रभावित स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के साथ सार्थक बातचीत किए बिना ही इस बिल को जल्दबाजी में पास कराने की योजना है। उन्होंने कहा कि पता चला है कि स्टेकहोल्डर्स के साथ कोई सार्थक बातचीत नहीं हो रही है और आने वाले शीतकालीन सत्र में इस बिल को जल्दबाजी में पास कराने की योजना है। उन्होंने लिखा कि अगर ऐसा होता है, तो जिस मकसद से सदन ने बिल को कमिटी के पास भेजा था, वह मकसद ही खत्म हो जाएगा और एक अहम संसदीय प्रक्रिया सिर्फ़ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) के चेयरमैन वेणुगोपाल ने स्पीकर से अपील की कि वे यह पक्का करें कि JPC एक पब्लिक नोटिस के ज़रिए लिखित मेमोरेंडम मंगाए और सभी प्रभावित स्टेकहोल्डर्स से ज़ुबानी गवाही सुने। उन्होंने इस काम के लिए पर्याप्त समय की भी मांग की, जिसमें ज़रूरत पड़ने पर कमिटी की रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा बढ़ाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सदस्यों को हर क्लॉज़ पर विस्तार से चर्चा करने का पूरा मौका मिलना चाहिए और बिल को सदन में तभी पेश किया जाना चाहिए जब कमिटी उसकी पूरी तरह से जांच कर ले।
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यह पत्र DMK के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन द्वारा बिल पर सुझाव देने के लिए जनता को दिए गए सात दिन के समय पर सवाल उठाने के कुछ दिनों बाद आया है। मंगलवार को कमेटी के चेयरमैन संजय जायसवाल को लिखे एक पत्र में, विल्सन ने जवाब देने के लिए कम से कम चार हफ़्ते का समय मांगा। लोकसभा सचिवालय ने सोमवार को कमेटी की ओर से एक बयान जारी कर बिल की खास धाराओं पर राय और सुझाव मांगे। विल्सन ने कहा कि इस प्रक्रिया में साफ़ तौर पर आपत्तियां भी मांगी जानी चाहिए।
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