Ujjain Abduction Case: उज्जैन में लड़की का किडनैपिंग ड्रामा, कार में खींचकर ले गए, फिर वीडियो में बोली- मैं अपनी मर्जी से गई
Ujjain Viral Kidnapping Video: उज्जैन में मंगलवार रात 19 साल की एक लड़की के किडनैपिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दो लड़के बिना नंबर प्लेट वाली एक काली कार में आए और उसे जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए।
UP में 2017 से पहले माफिया की समानांतर सरकार थी, CM Yogi Adityanath ने गिनाए पुलिस सुधार
लखनऊ, एक अक्टूबर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस सुधार किए हैं और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का विस्तार किया है, जबकि 2017 से पहले हर जिले में कुख्यात माफिया का दबदबा था जो समानांतर सरकार चलाते थे और पुलिस उनके सामने बेबस थी। उन्होंने याद किया कि पहले राज्य को अपराध, सांप्रदायिक हिंसा और पुलिस के अपर्याप्त बुनियादी ढांचे जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय पुलिस के पास बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षण संबंधी सुविधाएं भी अपर्याप्त थीं।
आदित्यनाथ ने इस स्थिति के लिए किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया। समाजवादी पार्टी की सरकार ने 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में शासन किया था। यहां लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य ‘नीतिगत पंगुता’ के दौर से बाहर निकल चुका है।
उन्होंने इस कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी से लैस 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति चाहे जितना बड़े पद पर आसीन हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ चिंतन तभी संभव है, जब समाज में सुरक्षा का वातावरण हो। सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उप्र पुलिस की विषय वस्तु ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ इसी भावना को व्यक्त करती है।
जब तराई क्षेत्र आतंकवाद की चपेट में था, तब पुलिस व सेना की सुरक्षा में ही आवागमन संभव था और सूर्यास्त के बाद आवाजाही लगभग बंद हो जाती थी। लेकिन उस समय पुलिस महानिदेशक के रूप में प्रकाश सिंह ने इन चुनौतियों का सामना किया। पुलिस सुधारों के लिए प्रकाश सिंह को उच्चतम न्यायालय की शरण लेनी पड़ी थी।
उत्तर प्रदेश ने पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रकाश सिंह की तारीफ करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने अपने सेवाकाल में पग-पग पर चुनौतियों का सामना किया और अपनी पूरी सेवा को कुशलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक विभिन्न संस्थानों में व्याख्यानों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाले उनके विचार अब पुस्तक के रूप में सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि आचार और विचार में जब समन्वय होता है और दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी परिणाम सामने आता है। वर्ष 2017 से पहले के दौर का जिक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘अगर राजनीतिक नेतृत्व खुद फैसले नहीं ले सकता और उसकी रीढ़ झुकी हुई है, तो वह कानून-व्यवस्था को कैसे सुधार सकता है?’’ उन्होंने कहा कि तब हर साल केवल करीब छह हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा सकता था और दावा किया कि बाद में राज्य में पुलिस के बुनियादी ढांचे तथा प्रशिक्षण में सुधार के लिए काम किया गया। उन्होंने कहा कि पहले पुलिसकर्मियों को टूटे भवनों में रहना पड़ता था और पीएसी की वाहिनियां समाप्त कर दी गई थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसीकलां, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई स्थानों पर दंगों के चलते लंबे समय तक कर्फ्यू लगा। उन्होंने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ राज्य कहा जाने लगा। आदित्यनाथ ने कहा कि पुलिस सुधारों के साथ तकनीक का समावेश भी आवश्यक है और ‘सुरक्षित शहर’ के लक्ष्य को हासिल करने के तहत प्रदेश के शहरों में 14 लाख से अधिक कैमरे लगाए गए हैं।
ये कैमरे घटनाओं की रोकथाम और उनके खुलासे में भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिलों में ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) के दिवंगत निरीक्षक सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन किया।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उनकी वीरता के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया है और उप्र पुलिस को पहली बार यह गौरव प्राप्त हुआ है। सुनील कुमार सिंह ने 22 जनवरी, 2025 को आमने-सामने की मुठभेड़ में चार दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया था। इस दौरान वह अपराधियों की गोलियों से गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री ने उनकी धर्मपत्नी एवं परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में 16 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार तथा 10 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया।
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