महिंद्रा की बिक्री सितंबर में 15 प्रतिशत बढ़ी, हुंडई मोटर ने बनाया रिकॉर्ड
महिंद्रा की बिक्री सितंबर में 15 प्रतिशत बढ़ी, हुंडई मोटर ने बनाया रिकॉर्ड
जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर प्रयागराज में केस:ब्राह्मण समाज पर दिए बयान के खिलाफ याचिका, कहा था- हम चौबे-दीक्षित परिवारों में बेटियां नहीं देते
तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ प्रयागराज कोर्ट में केस चलेगा। रामभद्राचार्य के एक बयान के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। बयान में जगद्गुरु ने कहा था- ऊंच कुल के ब्राह्मण अपनी बेटियां उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठकों को नहीं देते, क्योंकि हम इन्हें अधम मानतें हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि रामभद्राचार्य की लोग पूजा करते हैं। वृंदावन में भागवत कथा के दौरान दिए उनके बयान के बाद उपाध्याय समाज को लोग बुरी नजर से देखने लगे। लड़के-लड़कियों की शादी में रुकावट आने लगी है। रामभद्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। याचिकाकर्ता रमेश उपाध्याय भारतीय किसान सेना लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। प्रयागराज जिला अदालत ने गुरुवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य को नोटिस जारी कर 12 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने क्या कहा था, पढ़िए याचिकाकर्ता के मुताबिक, 3 फरवरी 2024 को वृंदावन में भागवत कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने उपाध्याय समाज पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा था, “जो नीच ब्राह्मणों….अधम ब्राह्मणों की चर्चा चलाई गई। हमारे यहां कुछ ब्राह्मण अच्छे नहीं माने जाते हैं। उनके यहां ऊंचे कुल के लोग अपनी बेटी नहीं देते हैं। उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठक को इसलिए अधम मानते हैं, क्योंकि इन्होंने विद्यार्थियों से पैसा लेकर पढ़ाया। इनके यहां हम बेटी नहीं देते और न इनके यहां से बेटी लेते हैं। हम विद्यार्थी का एक पैसा भी लेना गोमांस के बराबर समझते हैं। मैं सरयूपारीण ब्राह्मण हूं। पहले मैं ब्राह्मण हूं। वह भी वशिष्ठ गोत्रीय ब्राह्मण हूं। फिर साधु हूं, फिर संन्यासी हूं, फिर जगद्गुरु रामानंदाचार्य हूं। मुझे अपने ब्राह्मणत्व पर गर्व है।” याचिकाकर्ता बोले- बयान से बच्चों की शादी में रुकावट आई वाराणसी के रहने वाले याचिककर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय ने 14 सितंबर 2026 को प्रयागराज कोर्ट में याचिका दाखिल की। कहा- जगद्गुरु रामभद्राचार्य संत हैं, लोग उनकी पूजा करते हैं। भागवत कथा के दौरान दिए उनके बयान के बाद उपाध्याय समाज को लोग हेय दृष्टि से देखने लगे हैं। लड़के-लड़कियों की शादी में बाधा आने लगी है। याचिकाकर्ता इस सिलसिले में पुलिस कमिश्नर प्रयागराज से मिले थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट में याचिका दी।जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है। इतने बड़े संत ने जो कहा, उसका लिखित आधार नहीं सुरेश चंद्र उपाध्याय ने कहा कि हमने 2025 में ही रामभद्राचार्य जी के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल कर दिया था। रामभद्राचार्य ने त्रिगुणायत, दीक्षित, पाठक और उपाध्याय समाज को ‘अधम’ कहा था। वेद-पुराण में इन समाजों को इस तरह की श्रेणी में रखने का कोई उल्लेख नहीं है। इतने बड़े संत के पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इतिहास से जुड़ी ऐसी बातें कहना, जिनका कोई लिखित आधार नहीं है, गलत इतिहास गढ़ने और ब्राह्मण समाज को दो हिस्सों में बांटने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि इस बयान से केवल हमारी भावनाएं ही आहत नहीं हुईं, बल्कि सनातन धर्म को मानने वाले लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। उनका सवाल है कि किस वेद, पुराण या उपनिषद में लिखा है कि पाठक, दीक्षित, त्रिगुणायत और उपाध्याय ‘अधम’ की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने रामभद्राचार्य के ज्ञान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उन्हें शास्त्रों का सही ज्ञान होता तो इस तरह की टिप्पणी नहीं करते। मुझे कानून और सनातन धर्म दोनों की समझ है रमेश उपाध्याय ने कहा कि जब तक शरीर में खून की एक बूंद भी रहेगी, तब तक ऐसे लोगों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। परिस्थितियां चाहे जो हों, सत्य की जीत होती है। कोई व्यक्ति खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिल क्लिंटन या अमेरिका के राष्ट्रपति का मित्र बताता हो, इससे वह कानून से ऊपर नहीं हो जाता। मैं विधि का विद्यार्थी हूं और विधि के लिए ही न्यायालय आया हूं। मुझे कानून और सनातन धर्म दोनों की समझ है। …………………….. ये खबर भी पढ़िए- रामभद्राचार्य बोले- बगैर पढ़े सब वेदव्यास-वाल्मीकि बनना चाहते हैं:मोदी एक बार और PM बनेंगे, चीन से हथियाई जमीन वापस लेंगे बगैर पढ़े लिखे सब आज महर्षि वाल्मीकि और वेदव्यास बनना चाहते हैं। वे मेरी बात समझना नहीं चाहते। मेरी उपलब्धियों से उनको ईर्ष्या होती है तो मेरा दुष्प्रचार करते हैं। मैंने कभी किसी संत की निंदा नहीं की। हां, मैं विरोध करता हूं, जब कोई गलत करता है। जो कथा तो कर रहे हैं रामजी की और मौला अली- मौला अली कीर्तन करा रहे हैं, उनकी कथा कभी नहीं सुनना चाहिए। ह कहना है पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का। संत प्रेमानंदजी के संस्कृत ज्ञान पर सवाल उठाने वाले जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की लोगों ने काफी आलोचना की। पढ़ें पूरी खबर
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Samacharnama







/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
