कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन ने मंगलवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का संपन्न होना, टैरिफ का इस्तेमाल दबाव बनाने वाले वर्चस्ववादियों को खारिज करने का उत्तम उदाहरण है। हालांकि हॉजसन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किसकी ओर था, लेकिन उनकी टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा व्यापार टैरिफ के दुरुपयोग की आलोचना की ओर इशारा करती प्रतीत हुई। भारत के साथ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के व्यापार को बढ़ावा देने के इच्छुक कनाडाई मंत्री के अनुसार, वर्तमान वैश्विक व्यापार परिदृश्य में बहुपक्षीय संबंध बनाना और आपूर्ति में विविधता लाना आवश्यक है। मंगलवार को हॉजसन और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।
हॉजसन ने यहाँ इंडिया एनर्जी वीक में कहा यूरोपीय संघ के साथ आपने जो किया, सबसे बड़ा समझौता’ पर हस्ताक्षर करना, यह कहने का एक आदर्श उदाहरण है कि हम ऐसी दुनिया में नहीं रहेंगे जहाँ सबसे शक्तिशाली देश बाकी सभी पर टैरिफ लगाता है। हम ऐसी दुनिया में रहेंगे जहाँ हम मुक्त व्यापार में विश्वास करते हैं, जहाँ हम भरोसेमंद संबंधों में विश्वास करते हैं’। हॉजसन ने कई देशों के खिलाफ अमेरिका के टैरिफ युद्धों को वैश्विक व्यापार प्रणाली के कामकाज में एक विच्छेदताया, न कि एक क्रमिक आर्थिक परिवर्तन। उन्होंने कहा नियम-आधारित व्यवस्था, जिसके आधार पर हम सभी ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण किया है, जो बहुपक्षवाद और मुक्त व्यापार पर आधारित थी, दुनिया के महाशक्तियों ने तय कर लिया है कि अब दुनिया इस तरह से नहीं चलेगी। उन्होंने तय कर लिया है कि दुनिया कहीं अधिक व्यापारिक तरीके से चलेगी।
ओटावा और वाशिंगटन के बीच पारंपरिक रूप से घनिष्ठ सहयोगी संबंध रहे हैं, लेकिन अमेरिका में ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के पिछले एक वर्ष में इनमें खटास आ गई है। इसके चलते कनाडा को ऊर्जा निर्यात के लिए अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता के बारे में पुनर्विचार करना पड़ रहा है। कच्चे तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के शीर्ष उपभोक्ताओं और आयातकों में से एक भारत, अब कनाडा के तेल और गैस के एक प्रमुख संभावित खरीदार के रूप में उभरा है। ओटावा भारत को यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति करने में भी रुचि रखता है।
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यूरोप ने भारत से एक ऐसी अपील की है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। यूरोप ने सीधे तौर पर भारत से मदद मांगी है कि वो रूस पर दबाव बनाए और यूक्रेन युद्ध को रुकवाए। मतलब जो काम अमेरिका जैसा देश नहीं कर पाया। अब उसके लिए यूरोप भारत की ओर देख रहा है। दरअसल यूरोपीय संघ की नेता काजा क्लास ने भारत में खुले मंच से यह बात कही कि इस दुनिया में यूक्रेन के लोगों से ज्यादा शांति कोई नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि यूक्रेन तो साल भर पहले ही बिना शर्त सीज फायर के लिए तैयार हो गया। लेकिन रूस रुकने का नाम नहीं ले रहा और इसी वजह से उन्होंने भारत से अपील की कि वह रूस के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल करें और शांति के लिए दबाव बनाए। उन्होंने माना कि यह युद्ध सिर्फ यूरोप के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए नुकसानदायक है।
रूस से हमारे अस्तित्व को खतरा है… हम इस युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं। आज भारतीय समकक्षों के साथ हुई चर्चा में हमने उनसे कहा कि वे अपनी ओर से वाकई में प्रयास करें। यूक्रेन एक साल पहले ही बिना शर्त युद्धविराम के लिए सहमत हो चुका है। रूस की ओर से हमें केवल नाटक ही दिखाई दे रहे हैं, वे बातचीत का दिखावा कर रहे हैं लेकिन वास्तव में बातचीत नहीं कर रहे हैं। अपने संबोधन के दौरान कल्लास ने कहा कि दोनों पक्षों द्वारा आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद अनंत एस्पेन सेंटर में ।
ईयू नेता काजा कैलाश ने यह भी बात कही कि शांति के लिए कम से कम दो पक्षों की इच्छा जरूरी होती है। लेकिन युद्ध के लिए सिर्फ एक पक्ष काफी होता है। और फिलहाल रूस की कारवाई यही दिखा रही है। और क्योंकि रूस भारत का सबसे करीबी है तो रूस का मानना है कि यहां भारत को रूस पर दबाव बनाना चाहिए। लेकिन यहां पर भारत के नजरिए से बड़ी बात यह है कि यूरोप ने जो कुछ कहा वो दिखाता है कि आज दुनिया में भारत कहां खड़ा है और यूरोप जैसे देश अमेरिका नहीं बल्कि भारत की ओर इस युद्ध को रुकवाने के लिए देख रहे हैं।
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