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केंद्रीय बजट में रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर रहेगा खास जोर : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, बुनियादी ढांचा और सस्ते आवास जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। बुधवार को जारी मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच नीति निर्माता विकास प्राथमिकताओं और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखेंगे।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में भले ही बहुत बड़े ऐलान न हों, लेकिन कुछ चुनिंदा फैसले भी शेयर बाजार में अच्छा माहौल बना सकते हैं।

आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार को आर्थिक विकास को बनाए रखने और घाटे को काबू में रखने के बीच सही संतुलन बनाना होगा। इसके साथ ही, दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों से पैदा हो रही चुनौतियों को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत के दौरान यह महसूस किया गया कि निवेशक बड़े और भारी फैसलों की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। वित्त मंत्री के सामने कई मुद्दे हैं, इसलिए बजट को लेकर उम्मीदें कम हैं, जिससे अगर कोई अच्छा फैसला होता है तो वह सकारात्मक रूप से चौंकाने वाला हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बजट का असर थोड़ा कम हुआ है, क्योंकि सरकार बजट के अलावा भी कई आर्थिक फैसले लेती रही है। ऐसे में शेयर बाजार अब बजट से उन खास कदमों की उम्मीद कर रहा है, जो कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा दें और निवेशकों का भरोसा मजबूत करें।

सरकार लगातार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कोविड के समय वित्तीय घाटा जहां 9.2 प्रतिशत के उच्च स्तर तक पहुंच गया था, वहीं अब इसके वित्त वर्ष 2026 के अंत तक 4.4 प्रतिशत तक आने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार आमतौर पर खर्च को नियंत्रण में रखेगी और इस दिशा में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में कर्ज और जीडीपी का नया लक्ष्य तय किया जाएगा और उपभोग अभी पूरी तरह नहीं बढ़ा है, इसलिए थोड़े से अतिरिक्त खर्च की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अगर सरकार का अतिरिक्त खर्च सही दिशा में हुआ, जैसे उत्पादक पूंजी निवेश या लोगों की खपत बढ़ाने पर, तो इक्विटी मार्केट इसका समर्थन कर सकता है। लेकिन बेकार के प्रशासनिक खर्च या कम असर वाले भुगतान से बचना जरूरी होगा।

वित्त वर्ष 2026 के बजट में सरकार ने मध्यम वर्ग की खपत बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की आयकर राहत दी थी, जिसका पूरा असर अभी दिखना बाकी है। इसलिए रिपोर्ट का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 के बजट में खपत बढ़ाने के लिए बहुत सीमित कदम उठाए जाएंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाला बजट पूंजी निवेश पर ज्यादा ध्यान देगा, खासकर उन क्षेत्रों में जो मौजूदा वैश्विक हालात के कारण देश के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण, इस बार क्या छिपा है राज? देश की अर्थव्यवस्था की सेहत की पूरी रिपोर्ट

Economic Survey: हर साल केंद्रीय बजट से ठीक पहले पेश होने वाला आर्थिक सर्वेक्षण सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था का एक्स-रे होता है. इसमें सरकार बीते वित्तीय वर्ष की आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और आगे की रणनीति का खाका पेश करती है. इस बार के आर्थिक सर्वेक्षण में भी ऐसे कई संकेत और संदेश छिपे हैं, जो आने वाले समय में देश की आर्थिक दिशा तय कर सकते हैं. 

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?

आर्थिक सर्वेक्षण भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज है. इसे हर साल बजट से एक दिन पहले संसद में पेश किया जाता है. इस रिपोर्ट का मकसद यह बताना होता है कि देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है, विकास की रफ्तार कैसी है और किन सेक्टर्स में सुधार या हस्तक्षेप की जरूरत है.यह सर्वेक्षण नीति आयोग, रिज़र्व बैंक, विभिन्न मंत्रालयों और सांख्यिकीय एजेंसियों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित होता है.

आर्थिक सर्वेक्षण में क्या होता है खास?

आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, रोजगार, महंगाई, विदेशी निवेश, राजकोषीय घाटा और वैश्विक आर्थिक हालात का विस्तार से विश्लेषण किया जाता है. साथ ही इसमें यह भी बताया जाता है कि सरकार की नीतियों का जमीन पर क्या असर पड़ा है.

इस बार के सर्वे में क्या छिपे हो सकते हैं राज?

इस बार के आर्थिक सर्वेक्षण में घरेलू मांग की मजबूती, इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश में तेजी और डिजिटल इकोनॉमी के विस्तार को भारत की बड़ी ताकत बताया गया है. सर्वे में  वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की विकास दर मजबूत बनी होने की बात हो सकती है. 

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि रोजगार सृजन में सुधार हो रहा है, हालांकि स्किल डेवलपमेंट और निजी निवेश को और बढ़ाने की जरूरत है. 

आम आदमी के लिए क्यों अहम है आर्थिक सर्वेक्षण?

आर्थिक सर्वेक्षण से यह अंदाजा लगता है कि आने वाले बजट में टैक्स, सब्सिडी, महंगाई और सरकारी खर्च को लेकर क्या फैसले हो सकते हैं. यानी यह दस्तावेज आम आदमी की जेब और भविष्य की योजनाओं से सीधे जुड़ा होता है.

नीति निर्धारण की नींव

कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण सिर्फ बीते साल का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि आने वाले बजट और नीतियों की नींव होता है. इसमें छिपे संकेत यह तय करते हैं कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर कौन सा रास्ता अपनाने वाली है.

यह भी पढ़ें - आम बजट 2026-27 में लोगों को आयकर में छूट बढ़ने और गिग वर्कर्स के लिए नई स्कीम आने की उम्मीद

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