सोने-चांदी के जेवर चुराने वाले Bhavnagar के गिरोह का भंडाफोड़, Jhansi Railway Police ने दबोचा
गुजरात से उत्तर प्रदेश तक, सात रिश्तेदार एक परिवार की तरह साथ यात्रा करते थे ताकि किसी को शक न हो और वे ट्रेन यात्रियों से कैश, गहने और फ़ोन लूट सकें। झांसी रेलवे पुलिस ने मंगलवार को चार पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ़्तार किया और उनसे चोरी का सामान बरामद किया। ये सभी सात आरोपी रिश्तेदार हैं और गुजरात के भावनगर ज़िले के रहने वाले हैं। झांसी रेलवे पुलिस के अनुसार, आरोपी ट्रेनों में साथ यात्रा करते थे और ऐसे यात्रियों पर नज़र रखते थे जो सो गए हों या कहीं जाते समय अपने बैग बिना किसी की देखरेख के छोड़ गए हों।
वे कैसे पकड़े गए? गैंग की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने के बाद, पुलिस की एक टीम ने झांसी रेलवे स्टेशन पर रेल की पटरियों के पास घेराबंदी की।
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मौके पर ही 7 आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया। उनकी पहचान इस प्रकार है:
अमर (45), मनोज (45), संगीता (42), ज्योति (42), दिलीप (34), उषा (32) और कृष्णा अमर (20)।
पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि वे झांसी से आगरा, मथुरा, हाथरस और बरेली जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाते थे, और कभी-कभी अयोध्या जाने वाली ट्रेनों को भी निशाना बनाते थे।
आरोपियों के ख़िलाफ़ झांसी रेलवे पुलिस स्टेशन में चोरी के दो मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरे ज़िलों और राज्यों के रेलवे स्टेशनों पर उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
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महिलाओं के बैग मुख्य निशाने पर होते थे
जांच में पाया गया कि आरोपी ट्रेन में यात्रा करते समय यात्रियों के बीच घुल-मिल जाते थे और महिलाओं के बैग और सामान पर खास नज़र रखते थे। पुलिस ने बताया कि जब कोई महिला यात्री सो जाती थी या उसका ध्यान कहीं और होता था, तो आरोपी इस मौके का फ़ायदा उठाकर उसका बैग खोलते थे और गहने व अन्य कीमती सामान चुरा लेते थे। पुलिस के अनुसार, चोरी किए गए गहनों को या तो बेच दिया जाता था या उनकी मंज़िल तक पहुँचा दिया जाता था।
चोरी का सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों से दो ब्रेसलेट, एक मंगलसूत्र, एक अंगूठी और लगभग 5,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस बरामद गहनों को पहले दर्ज चोरी के मामलों से जोड़ने और उन यात्रियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिनका यह सामान था।
वे यह भी जाँच कर रहे हैं कि क्या आरोपी अन्य घटनाओं में भी शामिल हैं।
देश में लागू हुआ Birth and Death Registration Act, देर से दर्ज कराने पर नियम सख्त
जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026, 1 अक्टूबर से लागू हो गया है। इसमें घटना के एक या दो साल बाद रिपोर्ट किए गए जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। संशोधित अधिनियम के तहत, घटना के एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर रिपोर्ट किए गए किसी भी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण तभी किया जा सकता है, जब उस इलाके के अधिकार क्षेत्र वाले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का आदेश हो। यह आदेश घटना की सच्चाई की जांच और तय फीस के भुगतान के बाद ही दिया जाता है।
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दो साल से ज़्यादा देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन के लिए, घटना वाली जगह के अधिकार क्षेत्र वाले फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश ज़रूरी है। यह आदेश जन्म या मृत्यु की सच्चाई की पुष्टि होने और लागू फ़ीस का भुगतान करने के बाद ही लिया जा सकता है। इस संशोधन से 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम' की धारा 13 की उप-धारा (3) में बदलाव किया गया है और एक नई उप-धारा (3A) जोड़ी गई है। गृह मंत्रालय के तहत भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने 16 सितंबर, 2026 को एक गैज़ेट नोटिफ़िकेशन जारी किया, जिसमें इन प्रावधानों के लागू होने की तारीख 1 अक्टूबर, 2026 तय की गई।
यह बिल 31 जुलाई, 2026 को लोकसभा से बिना किसी बड़ी बहस के पास होने के बाद, 4 अगस्त, 2026 को राज्यसभा में हंगामे के बीच पास हुआ। इसका मकसद देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों को और सख्त बनाना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संशोधन बिल के पीछे की वजह बताते हुए कानूनी पहचान के लिए जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु को साबित करने के लिए जन्म या मृत्यु का प्रमाण पत्र सबूत के तौर पर मान्य होता है।" जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन को रेगुलेट करने के लिए मूल कानून 1969 में बनाया गया था और इसमें पहले 2023 में संशोधन किया गया था।
शाह ने आगे कहा कि 2026 के बिल का मकसद देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन के नियमों को सख्त बनाकर समय पर जानकारी देने को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि एक साल के बाद लेकिन दो साल के भीतर रिपोर्ट किए गए जन्म या मृत्यु के मामलों में वेरिफिकेशन के बाद मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी ज़रूरी होगी, जबकि दो साल के बाद रिपोर्ट किए गए मामलों को फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट से मंज़ूरी लेनी होगी।
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