UP पुलिस SI भर्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा चाबुक! नियुक्ति पत्र बांटने पर रोक, आंसर की के 'खेल' से फंसा 12 हजार युवाओं का भविष्य!
उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती 2025 में एक नया मोड़ आ गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपने की तैयारियाँ चल ही रही थीं कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नियुक्ति पत्र जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद फिलहाल के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है। यह ऐतिहासिक आदेश जस्टिस अनीस कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने श्याम सुंदर, कमलेश यादव और यश पांडे सहित 44 अन्य उम्मीदवारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की अगली सुनवाई अब 5 अक्टूबर को तय की गई है।
UP पुलिस SI परीक्षा कब हुई थी?
उत्तर प्रदेश सिविल पुलिस और समकक्ष पदों पर सब-इंस्पेक्टर की सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन 12 अगस्त, 2025 को जारी किया गया था। इस भर्ती के लिए 15,75,706 आवेदन प्राप्त हुए थे।
लिखित परीक्षा 14 और 15 मार्च को दो-दो शिफ्ट में आयोजित की गई थी। परीक्षा में लगभग 10.77 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। लिखित परीक्षा का परिणाम 7 मई को घोषित किया गया, जिसमें 12,733 उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण के लिए योग्य पाए गए।
इसके बाद 14 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित किया गया। फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नियुक्ति पत्र बांटने की तैयारी चल रही थी।
कोर्ट ने नियुक्ति पत्र पर रोक क्यों लगाई है?
ये याचिकाएं अंतिम आंसर की (उत्तर कुंजी) में किए गए बदलावों से संबंधित हैं। वकील संजय कुमार यादव के अनुसार, भर्ती बोर्ड ने 23 मार्च को प्रोविजनल (अनंतिम) आंसर की जारी की थी, जबकि अंतिम आंसर की 7 मई को जारी की गई—उसी दिन जिस दिन लिखित परीक्षा का परिणाम आया था।
खबरों के अनुसार, अंतिम आंसर की में कई उत्तर बदले गए थे। उम्मीदवारों ने इन बदलावों पर आपत्ति जताई, खासकर इसलिए क्योंकि हर सवाल के लिए 2.5 अंक निर्धारित थे। नतीजतन, कुछ उम्मीदवार जो बहुत कम अंतर से कट-ऑफ से चूक गए थे, वे इससे प्रभावित हुए। कुछ उम्मीदवार ऐसे भी थे जो अगले चरण के लिए तो चुने गए थे, लेकिन 14 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद वे सफल नहीं हो पाए। खबरों के अनुसार, कुछ उम्मीदवार सिर्फ़ एक या दो अंकों से चयन से चूक गए।
उम्मीदवारों ने बदले हुए उत्तरों पर आपत्ति जताई थी, लेकिन आरोप लगाया कि भर्ती बोर्ड ने उन पर विचार नहीं किया। इसके बाद उन्होंने याचिकाओं के ज़रिए हाई कोर्ट का रुख किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे ने अधिवक्ता संजय कुमार यादव और आलोक मिश्रा के साथ मिलकर कोर्ट के सामने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने अब नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है और मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को तय की गई है।
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