बारामती के बाद जयपुर में प्लेन लैंडिंग में आई दिक्कत, इसमें मौजूद थे दिग्गज नेता, जानें पूरा मामला
Ajit Pawar Plane Crash: अभी देश अजित पवार के हादसे की खबर से उबरा भी नहीं था कि एक और बड़ा हादसा होते-होते टल गया है. दरअसल ये खबर राजस्थान से आ रही है. यहां राजधानी जयपुर में भी एक विमान की लैंडिंग के दौरान दिक्कत आने लगी. खास बात यह है कि इस विमान में एक दिग्गज नेता मौजूद थे. मिली जानकारी के मुताबिक जयपुर एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1719 के साथ एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई. लैंडिंग के दौरान विमान को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
दो बार करना पड़ी लैंडिंग
बताया जा रहा है कि विमान की लैंडिंग में इतनी परेशानी आई है कि इसे एक बार में लैंड ही नहीं करवाया जा सका. एयर इंडिया के इस विमान को पायलट ने दूसरी बार में सुरक्षित लैंड कराया. खास बात यह है कि इस विमान में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी सवार थे.
कैसे आई लैंडिंग में दिक्कत
मिली जानकारी के मुताबिक लैंडिंग में विफलता की बात करें तो दोपहर 1:05 बजे पायलट ने जब पहली बार लैंडिंग की कोशिश की, तो विमान के पहियों ने रनवे को टच (Touch-and-go) किया, लेकिन 'सैंडिंग अप्रोच' (Sanding Approach) में असंतुलन के कारण पायलट ने तुरंत टेक-ऑफ करने का फैसला किया.
दहशत का माहौल
विमान के अचानक रनवे छूकर वापस उड़ान भरने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई. करीब 10 मिनट तक आसमान में चक्कर काटने के बाद, पायलट ने दूसरे प्रयास में विमान की सफल और सुरक्षित लैंडिंग कराई.
विमानन सुरक्षा पर उठते सवाल
एक ही दिन में दो वीवीआईपी (VVIP) से जुड़ी उड़ानों में आई खराबी ने 'सैंडिंग अप्रोच' और रनवे सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. बारामती में जहां विजिबिलिटी और रनवे अप्रोच जानलेवा साबित हुई, वहीं जयपुर में पायलट की सूझबूझ से एक संभावित दुर्घटना टल गई. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने दोनों मामलों में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं.
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भारत-यूएस ने नशीले पदार्थों की विश्व स्तर पर तस्करी की चुनौतियों और कानून पर की चर्चा
नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि अमेरिका ने वॉशिंगटन में यूएस-भारत ड्रग पॉलिसी एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप की पहली मीटिंग होस्ट की। इस बैठक में दुनियाभर में ड्रग्स की चुनौती से निपटने और दोनों देशों के लिए एक सुरक्षित और सेहतमंद भविष्य बनाने के लिए पक्के और साझा वादे पर जोर दिया गया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 20-21 जनवरी को हुई पहली मीटिंग की शुरुआत अमेरिका में नेशनल ड्रग कंट्रोल पॉलिसी (ओएनडीसीपी) ऑफिस की डायरेक्टर सारा कार्टर की ओर से की गई। सारा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और नार्को-टेररिज्म को खत्म करने की आपसी प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
सारा कार्टर ने कहा, ड्रग्स का संकट अब राष्ट्रीय सुरक्षा की मुख्य प्राथमिकता है। यह एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप परिवारों की सुरक्षा के लिए द्विपक्षीय साझेदारी का फायदा उठाता है। साथ ही लेजिटिमेट इंडस्ट्रीज को भी समर्थन करता है।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा, भारत ने नशीले पदार्थों की तस्करी और प्रीकर्सर केमिकल्स के डायवर्जन से होने वाले खतरे से निपटने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी। इसके साथ ही लेजिटिमेट ट्रेड की सुविधा के साथ प्रभावी एनफोर्समेंट को भी संतुलित किया।
ओएनडीसीपी की कार्यवाहक डिप्टी डायरेक्टर, डेबी सेगुइन और भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की डिप्टी डायरेक्टर जनरल, मोनिका आशीष बत्रा के नेतृत्व में एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप ने अमेरिकी और भारतीय डेलीगेशन के साथ मिलकर महत्वपूर्ण काउंटर-नारकोटिक्स साझेदारी को आगे बढ़ाने में ठोस और मूल्यवान नतीजे देने के लिए काम किया।
विदेश मंत्रालय ने बताया, उन्होंने पूरी सरकार के नजरिए की अहमियत पर जोर दिया, जो इंटर-एजेंसी और इंटर-गवर्नमेंटल कोशिशों को आसान बनाता है और फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन को सुरक्षित करता है। ये अपने-अपने राष्ट्रीय नियमों और रेगुलेशन के हिसाब से हो, साथ ही गैर-कानूनी नशीली दवाओं की तस्करी के नेटवर्क को रोकने के लिए हाल के संयुक्त ऑपरेशन की सफलता पर भी काम करता है।
बीते कुछ सालों में अमेरिका-भारत सुरक्षा सहयोग बढ़ा है। इसमें आतंकवाद विरोधी और कानून लागू करने वालों के तालमेल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। नशीले पदार्थों के खिलाफ कोशिशें उस साझेदारी का एक अहम हिस्सा बन गई हैं, क्योंकि ड्रग तस्करी के नेटवर्क बॉर्डर पार काम करते हैं।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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