Thane में Shiv Sena UBT नेता Pradeep Purnekar हत्या मामले में पूर्व महापौर पर साजिश का आरोप
ठाणे, एक अक्टूबर शिवसेना (उबाठा) नेता प्रदीप पूर्णेकर की यहां गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में उनके 26 वर्षीय बेटे राम पूर्णेकर ने पुलिस को दिए बयान में शहर की पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस ने हत्या के सिलसिले में एक संदिग्ध हमलावर को गिरफ्तार किया है और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है।
घटना के बाद ठाणे में विरोध प्रदर्शन हुए थे। बुधवार को शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत और आदित्य ठाकरे भी कपूरबावड़ी पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके बाद पुलिस ने राम पूर्णेकर का विस्तृत बयान दर्ज किया।
राम ने अपने बयान में आरोप लगाया कि उनके पिता को ठाणे की पूर्व महापौर एवं शिवसेना नेता मीनाक्षी शिंदे तथा उनके पति राजेंद्र शिंदे ने निशाना बनाने की साजिश रची थी। पुलिस ने शिवसेना (उबाठा) के ‘विभाग प्रमुख’ पर मंगलवार रात घोड़बंदर रोड के पास जानलेवा हमला किए जाने के बाद भारतीय न्याय संहिता और हथियार अधिनियम के तहत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोपियों में पप्या शिंदे, जो पूर्णेकर का पूर्व सहयोगी बताया जा रहा है, संतोष कनोजिया उर्फ टल्ली, निखिल यादव उर्फ शूटर और दो अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।
राम ने पुलिस को बताया कि 24 सितंबर की रात उसने घोड़बंदर इलाके में राजेंद्र शिंदे को कनोजिया, यादव और नितेश उर्फ भावड्या पवार के साथ संदिग्ध रूप से मिलते देखा था। घर लौटने पर उसने यह बात अपने पिता को बताई। बयान के मुताबिक, इसके बाद उनके पिता ने उन्हें रात 10 बजे के बाद घर से बाहर नहीं निकलने की चेतावनी दी थी और आशंका जताई थी कि उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।
राम ने पुलिस को बताया कि ठाणे नगर निगम चुनाव के बाद से राजनीतिक और व्यक्तिगत विवाद चल रहे थे। इन चुनावों में मीनाक्षी शिंदे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना से चुनाव लड़ा था, जबकि राम की मां विजेता पूर्णेकर और चाचा जयनाथ पूर्णेकर को शिवसेना (उबाठा) ने उम्मीदवार बनाया था। राम ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विवाद, जमीन से जुड़े मामले और उनके पिता द्वारा अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान के कारण पूर्व महापौर और उनके पति ने उन्हें निशाना बनाने की साजिश रची।
इस बीच, भारी पुलिस सुरक्षा के बीच पूर्णेकर का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें शिवसेना (उबाठा) के नेताओं समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए। संयुक्त पुलिस आयुक्त ज्ञानेश्वर चव्हाण ने मीडिया से कहा कि स्थानीय पुलिस और अपराध शाखा की कई टीम मामले की सभी संभावित पहलुओं से जांच कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मामले में कई आरोपियों का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी है।
पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात करीब 9:30 बजे घोड़बंदर इलाके में कपूरबावड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुछ नकाबपोश हमलावरों ने पूर्णेकर के कार्यालय में उन पर गोली चलाई और धारदार हथियारों से हमला किया। उन्हें पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां आपातकालीन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। बुधवार दोपहर सैकड़ों शिवसेना (उबाठा) कार्यकर्ता, परिवार के सदस्य और आदित्य ठाकरे तथा संजय राउत कपूरबावड़ी पुलिस थाने के बाहर जमा हुए।
वे पोस्टमार्टम के बाद पूर्णेकर का पार्थिव शरीर लेकर वहां पहुंचे थे। राउत ने मांग की कि पुलिस पूर्णेकर के बेटे का बयान पूरक प्राथमिकी के रूप में दर्ज करे तथा ठाणे की पूर्व महापौर और उनके पति के खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करे।
सचिन पायलट की सीक्रेट रिपोर्ट और राजा वडिंग की विदाई! जानिए कैसे 3 महीने के भीतर बदल गई पंजाब कांग्रेस की पूरी बिसात?
पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले सूबे की राजनीति से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले कई महीनों से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वडिंग के बीच जारी वर्चस्व की जंग और तीव्र गुटबाजी के बाद आखिरकार केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप पर यह बड़ा फैसला लिया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा।
पार्टी में गुट बन गए थे, जिसमें पंजाब कांग्रेस के नेता और विधायक दोनों नेताओं में से किसी एक का पक्ष ले रहे थे और अपनी ताकत दिखाने के लिए केंद्रीय लीडरशिप के पास जा रहे थे।सूत्रों के अनुसार, वडिंग के हटने के बाद इस पद के लिए जिन नामों पर विचार किया जा रहा है, उनमें पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला, जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह और गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल हैं।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस लीडरशिप ने सिंगला के नाम को अंतिम रूप दे दिया है और 2 अक्टूबर को इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। यह कदम पंजाब में पार्टी के राज्य अध्यक्ष को बदलने की योजना का हिस्सा है। इस बीच, सूत्रों के अनुसार, प्रताप सिंह बाजवा के पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर बने रहने और अपना पद बरकरार रखने की उम्मीद है।
वडिंग-चन्नी विवाद और पंजाब कांग्रेस लीडरशिप की खींचतान
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब कांग्रेस में चन्नी और वडिंग के बीच मतभेद तनाव का एक बड़ा कारण बन गए थे। यह विवाद जून 2026 में तब और बढ़ गया जब कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में पार्टी की संगठनात्मक स्थिति का आकलन करने के लिए अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव की तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर पैनल का गठन किया। पैनल ने सांसदों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और ज़िला-स्तरीय पदाधिकारियों सहित लगभग 67 पार्टी नेताओं से बातचीत की। रिपोर्टों के अनुसार, जिन लोगों से बातचीत की गई, उनमें से ज़्यादातर ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चन्नी का समर्थन किया था। फीडबैक के बावजूद, कांग्रेस लीडरशिप ने 1 जुलाई को वारिंग को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए रखा और चन्नी को 2027 के चुनावों के लिए पार्टी की कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया। इस फैसले से चन्नी के समर्थकों में नाराजगी फैल गई, जो राज्य की लीडरशिप में बदलाव चाहते थे।
3 जुलाई को, कांग्रेस के 20 से ज़्यादा मौजूदा और पूर्व विधायक और कई सीनियर नेता रूपनगर में चन्नी के घर पर इकट्ठा हुए और खुले तौर पर उनका समर्थन किया। इस ग्रुप ने लीडरशिप के फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की। चन्नी खेमे का कहना था कि पंजाब में पार्टी को टॉप लेवल पर बदलाव की ज़रूरत है।
इसके बाद कांग्रेस ने गुटबाजी के झगड़े को शांत करने की कोशिशें तेज़ कर दीं। पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने 11 जुलाई को चन्नी और उनके समर्थकों से मुलाकात की। चन्नी खेमे के नेताओं ने वारिंग को हटाने की अपनी मांग दोहराई, जबकि बघेल ने कहा कि पार्टी नेताओं की चिंताओं को हाई कमान तक पहुंचाया जाएगा। वारिंग उस बैठक में शामिल नहीं थे।
अगस्त में भी मतभेद साफ़ दिखे, जब कांग्रेस के संगठनात्मक कार्यक्रम "हर बूथ कांग्रेस मज़बूत" के दौरान चन्नी और वारिंग खेमे के समर्थक पोस्टर कैंपेन, नारेबाज़ी और झड़पों में शामिल रहे। इन घटनाओं ने राज्य यूनिट के भीतर गुटबाजी की खाई को उजागर किया।
सितंबर तक, दोनों नेताओं ने कुछ समय के लिए अपने मतभेदों को भुला दिया। 15 सितंबर को, चन्नी और वारिंग ने चंडीगढ़ में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में पंजाब के नए प्रभारी सचिन पायलट के साथ मंच साझा किया। राज्य की लीडरशिप को लेकर महीनों के मतभेद के बाद एकता का यह सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ, हालांकि पुरानी प्रतिद्वंद्विता पंजाब कांग्रेस की एक अहम विशेषता बनी रही।
इसके बावजूद लीडरशिप का विवाद पार्टी पर हावी रहा। सितंबर में, बघेल की जगह राज्य प्रभारी बनने के बाद पायलट ने पंजाब में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत की। यह कवायद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक चिंताओं को दूर करने के हाई कमान के प्रयासों का हिस्सा थी। लंबे समय से चल रही खींचतान का नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस ने अपनी पंजाब इकाई के प्रमुख को बदलने का फ़ैसला किया और वारिंग ने 30 सितंबर, 2026 को इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया।
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