देश में 13 साल बाद सबसे सूखा मानसून:पंजाब-बिहार सहित 11 बड़े राज्यों में बारिश की कमी; 10 अक्टूबर तक पूरे देश से विदा होगा मानसून
मानसून-2026 सीजन सामान्य से 12.6% कम बारिश के साथ खत्म हुआ। देश के 43% जिलों में 20 से 72% तक कम बारिश हुई। पंजाब, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के पांचों राज्यों में बारिश की कमी रही। पूर्वी भारत में ओडिशा में सामान्य से 30% ज्यादा बारिश हुई, जबकि बारिश के लिए प्रसिद्ध पूर्वोत्तर राज्यों में इस साल 1901 के बाद सबसे कम बारिश दर्ज की गई। देशभर में इस बार का मानसून 13वां सबसे सूखा सीजन रहा। पिछले 11 वर्षों में यह सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा है। हालांकि, सीजन खत्म होने से पहले हुई तेज बारिश के कारण बारिश की कमी में 2.5% का सुधार हुआ। मानसून की विदाई 19 सितंबर से शुरू हो चुकी थी। अगले दो दिनों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों के अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों से मानसून लौटने लगेगा। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी इसकी वापसी होगी। हालांकि, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश जारी रहेगी। मौसम विभाग के मुताबिक, 10 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश से विदा हो जाएगा। 15 अक्टूबर के बाद दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में उत्तर-पूर्व मानसून दस्तक दे सकता है। आखिरी हफ्ते की बारिश से 2.5% कमी पूरी हुई मानसून की विदाई से पहले सितंबर के आखिरी हफ्ते में सामान्य से 50% ज्यादा बारिश हुई। एक हफ्ते पहले मानसून की बारिश सामान्य से 15% कम थी, लेकिन सीजन खत्म होते समय यह कमी घटकर 12.6% रह गई। मानसून के 122 दिनों में से 77 दिन कोई न कोई मौसमी सिस्टम बना रहा। इससे बारिश होती रही और सीजन के अंत में कमी 12.6% पर सीमित रही। अल नीनो के कारण सीजन शुरू होने से पहले सूखे की आशंका जताई गई थी, लेकिन एक-दो राज्यों को छोड़कर स्थिति उतनी खराब नहीं रही। 282 जिलों में कम बारिश देश के 38% हिस्से यानी 282 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। अत्यधिक बारिश के लिए प्रसिद्ध मेघालय में भी सामान्य से 60% कम बारिश दर्ज की गई। 24 सितंबर तक देश के 150 प्रमुख जलाशयों में 130 अरब घन मीटर (BCM) पानी उपलब्ध था। इनकी कुल भंडारण क्षमता 182.4 BCM है। यानी जलाशय अपनी क्षमता के करीब 71% तक भरे हैं। हालांकि, पानी का भंडार पिछले साल की तुलना में कम है। अल नीनो के असर की कुछ भरपाई संभव ICICI बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) इंडेक्स 0.76 के साथ पॉजिटिव जोन में पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में मजबूत हो रहे अल नीनो के प्रतिकूल असर की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है। हालांकि, अल नीनो अभी भी मानसून के लिए प्रमुख जोखिम बना हुआ है।
राहुल गांधी आज आएंगे बालाघाट:जगला गांव में पीड़ित परिवारों से मिलेंगे; बीजेपी बोली- यह पॉलिटिकल माइलेज लेने की कोशिश
मध्य प्रदेश के बालाघाट में बीमारियों की वजह से 32 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब सियासी मुद्दा बन गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज बिरसा ब्लॉक के जगला गांव पहुंचकर इन बच्चों के परिजन से मुलाकात करेंगे। बीजेपी ने इस दौरे को राजनीतिक माइलेज लेने की कवायद बताया है। राहुल के दौरे से पहले सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। जगला के जिन चार मृत बच्चों के परिजन से वे मिलेंगे, उनके नाम प्रशासन के ऑफिशियल डेथ रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं। भास्कर की पिछली पड़ताल में भी सरकारी आंकड़ों से ज्यादा मौतों की जानकारी सामने आई थी। बालाघाट में बच्चों की मौतों का सिलसिला मई में 3 साल की रूही परते की जान जाने के बाद शुरू हुआ था। मामला बढ़ने पर सरकार ने प्रभावित इलाकों में हेल्थ कैंप और स्क्रीनिंग शुरू की। सरकार का दावा है कि अब स्थिति नियंत्रण में है। सोशल मीडिया पर भी सरकार को घेर चुके राहुल राहुल गांधी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दो बार मोहन यादव सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। 5 सितंबर को राहुल ने बच्चों की मौत के लिए पीने के पानी, पोषण और इलाज की कमी को जिम्मेदार बताते हुए इसे सरकार की विफलता कहा था। 17 सितंबर को उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए लिखा था, 'मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो जरा राज्य की जमीनी हालत भी देखिए।' जगला के 4 बच्चों की मौतें सरकारी रिकॉर्ड में नहीं स्थानीय लोगों और परिजन के मुताबिक, जगला गांव के इन चार बच्चों की मौत सरकारी सूची में दर्ज नहीं हैं। डिप्टी सीएम बोले- तब संवेदना दिखानी चाहिए थी राहुल गांधी के दौरे पर उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, ‘राहुल गांधी केवल राजनीतिक माइलेज लेने का प्रयास कर रहे हैं। जब कठिन परिस्थितियां थीं, तब उन्हें संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। जिन समस्याओं को कांग्रेस की नीतियों से बढ़ावा मिला, आज वही संवेदना की बात कर रहे हैं।’ सरकारी आंकड़ों और विपक्ष के दावों में बड़ा अंतर बालाघाट में बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर सरकारी रिकॉर्ड और विपक्ष के दावों में अंतर है। सरकारी रिकॉर्ड में बीमारी से अब तक 32 मौतें दर्ज हैं जबकि कांग्रेस विधायक संजय उइके का दावा है कि 43 बैगा बच्चों की जान गई है। अगस्त में दैनिक भास्कर की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया था। उस समय प्रशासन 8 मौतों की बात कर रहा था। टीम ने बिरसा ब्लॉक के 9 गांवों में 20 बच्चों की मौत की जानकारी जुटाई थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इन मौतों की जानकारी होने की बात सामने आई थी। मौतों का सिलसिला कब और कैसे शुरू हुआ? प्रशासन की आखिरी सूची के अनुसार, पहली मौत 18 मई 2026 को 3 साल की रूही परते की हुई। अगले दिन 19 मई को उसके 5 साल के भाई राम परते की भी जान चली गई। दोनों की मौत घर पर ही हुई थी। परिजन के मुताबिक, उन्हें 15-20 दिन से तेज बुखार, मुंह में छाले और डिहाइड्रेशन की समस्या थी। इसके बाद भी मौतें दर्ज होती रहीं। 29 जुलाई को मीडिया में मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज की। नाले के पानी के सैंपल में एडिनोवायरस मिला बच्चों की मौत के बाद दिल्ली की NCDC, जबलपुर की NSCB, पुणे की NIV और ICMR की टीमों ने जांच की। रिपोर्ट में ये नतीजे सामने आए। बड़ा सवाल- पोस्टमॉर्टम के बिना मौत की वजह कैसे तय हुई? सीएमएचओ डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के मुताबिक, मौतों को सिर्फ मीजल्स से नहीं जोड़ा जा सकता। मलेरिया, उल्टी-दस्त और कुपोषण भी संभावित कारण हैं। उन्होंने बताया कि किसी मृत बच्चे का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ है। अब परिजन और ग्रामीणों से चर्चा के आधार पर ‘वर्बल ऑटोप्सी’ तैयार की जाएगी। ऐसे में सवाल है कि मौतों की वजह अब तक किस आधार पर तय की गई? सरकार ने शुरू किए राहत और स्वास्थ्य संबंधी उपाय सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और स्वास्थ्य संबंधी कार्य शुरू किए हैं। कार्रवाई पर सवाल- बड़े अफसरों की जवाबदेही क्या तय हुई? सरकार ने जिला मलेरिया अधिकारी का ट्रांसफर किया और सीएमएचओ से अतिरिक्त प्रभार वापस लिया। बाद में सीएमएचओ को पद से भी हटा दिया गया। अब सवाल जवाबदेही का है कि इतनी मौतों के मामले में जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हुई और आगे क्या कार्रवाई होगी? ये खबर भी पढ़ें… Gen-Z स्टूडेंट्स के प्रोफेसर बने राहुल हाथ में माइक, पीछे बड़ी स्क्रीन पर चलता पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT), बीच-बीच में वीडियो क्लिप्स और सामने बैठे हजारों छात्र...। इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी का अंदाज किसी पारंपरिक राजनेता जैसा नहीं, बल्कि एक प्रोफेसर जैसा था। पढे़ं पूरी खबर…
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