Aaj Ka Panchang 1 October 2026: आज है पितृपक्ष का षष्ठी श्राद्ध, जानें आज का पंचांग और शुभ मुहूर्त
Aaj Ka Panchang 1 October 2026: आज यानी 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार को पितृपक्ष का षष्ठी श्राद्ध किया जा रहा है. आज के दिन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है. ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अरविंद त्रिपाठी के अनुसार, पंचमी तिथि दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी और फिर षष्ठी तिथि का प्रारंभ किया जाएगा. वहीं, आज सिद्धि योग रात 9 बजकर 18 मिनट तक प्रभावी रहेगा और फिर व्यतीपात योग बनेगा. चलिए पढ़ते हैं आज का पंचांग 1 अक्टूबर 2026.
पढ़ें आज का पंचांग 1 अक्टूबर 2026 (Today's Panchang 1 October 2026)
- तारीख- 1 अक्टूबर 2026
- दिन- गुरुवार
- तिथि- पंचमी
- नक्षत्र- रोहिणी
- सूर्योदय- सुबह 6:13 बजे
- सूर्यास्त- शाम 6:07 बजे
- करण- तैतिल, गर
- चंद्रमा- वृषभ राशि
- शुभ मुहूर्त- 11:46 से दोपहर 12:34 तक
- राहुकाल- 1:39 से दोपहर 3:09 तक
- दिशा शूल- दक्षिण
- दिशा शूल उपाय- दही या जीरा खाकर घर से निकलें.
आज का महामंत्र
ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः
चंद्र गोचर
चंद्रमा का गोचर वृषभ राशि होगा.
संवत
विक्रम संवत- 2083, रौद्र
शक संवत- 1948, पराभव
चंद्रमास
सूर्योदय- आज सुबह 06:13 पर हुआ है
सूर्यास्त- आज शाम 06 बजकर 07 मिनट पर होगा
चंद्रोदय- 01 अक्टूबर रात 09:36 बजे पर होगा
चंद्र अस्त- 02 अक्टूबर को सुबह 10:30 मिनट पर होगा
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आज का शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:28 मिनट से सुबह 05:17 मिनट तक
अमृत काल- सुबह 01:28 बजे से सुबह 02:57 मिनट तक (2 अक्टूबर)
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:46 बजे से दोपहर 3:09 बजे तक
आज का अशुभ समय
राहुकाल- दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से दोपहर 03 बजकर 9 मिनट तक
यम गण्डक- सुबह 06:22 मिनट से सुबह 07:50 मिनट तक
गुलिक काल- सुबह 09:19 मिनट से सुबह 10:48 बजे तक
आज का दुर्मुहूर्त- सुबह 10:18 बजे से सुबह 11:05 मिनट तक और दोपहर 03:01 बजे से दोपहर 03:49 बजे तक
आज के व्रत
रोहिणी व्रत, षष्ठी श्राद्ध
गुरुवार के नुस्खे
- मान्यता है कि गुरुवार के दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत और दान करने से बृहस्पति ग्रह से जुड़े दोष दूर होते हैं. यदि कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो तो व्यक्ति को विवाह में देरी, करियर में रुकावट, आर्थिक संकट और मानसिक अशांति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
- ऐसे में गुरुवार की पूजा एक प्रभावी और सरल उपाय मानी जाती है. श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए उपायों से देवगुरु बृहस्पति शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं.
- गुरुवार के दिन श्रद्धा, विश्वास और संयम के साथ किए गए उपाय जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं. नियमित पूजा, व्रत और दान से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है. व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, स्थिरता और सौभाग्य का संचार भी होता है.
- गुरुवार के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है. पीला रंग ज्ञान, शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस दिन पीले वस्त्र धारण करना, पीले पुष्प अर्पित करना और पीले रंग के भोजन का सेवन करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है. गुरुवार की पूजा व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, विश्वास और सौभाग्य को बढ़ाने वाली होती है.
- गुरुवार की पूजा के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शुद्ध होना चाहिए. स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल या हल्दी मिलाना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद साफ और पीले वस्त्र पहनें. इसके पश्चात घर और पूजा स्थल में गंगाजल छिड़ककर वातावरण को पवित्र करें.
अब पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. पूजा में पीले फूल, चने की दाल, गुड़, बेसन के लड्डू और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद दीपक और धूप जलाकर मंत्र जाप करें. - ऊं ऐं श्रीं बृहस्पतये नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है. माना जाता है कि नियमित मंत्र जाप से बुद्धि, आत्मविश्वास और मानसिक शांति में वृद्धि होती है.
आपका दिन मंगलमय हो.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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