भारत-यूएई के बीच समुद्र में तेल पाइपलाइन की तैयारी:होर्मुज संकट के बीच विकल्प तलाश रहा भारत, अरब सागर के नीचे गुजरात-महाराष्ट्र तक बिछेगी लाइन
होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत भारत और यूएई के बीच समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी से मुलाकात के बाद इसकी पुष्टि की। सरकार ने ओमान-यूएई से भारत तक समुद्र के नीचे पाइपलाइन परियोजना को प्राथमिकता में रखा है। MEIDP (मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन) के तहत पाइपलाइन ओमान और यूएई के तट से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए गुजरात और महाराष्ट्र के तट तक पहुंच सकती है। पहले सिर्फ गैस पाइपलाइन की थी योजना जून में सरकार ने इस परियोजना को निजी प्रोजेक्ट बताया था। शुरुआत में इसमें सिर्फ गैस पाइपलाइन की योजना थी, लेकिन अब समुद्र के रास्ते कच्चा तेल लाने की संभावना पर भी तकनीकी अध्ययन शुरू हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर सरकारी कंपनियां परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इसमें गहरे समुद्र में पाइपलाइन बिछाने की तकनीक, लागत और सुरक्षा समेत दूसरे पहलुओं की जांच की जाएगी। क्यों पड़ी इस पाइपलाइन की जरूरत? भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। होर्मुज में तनाव के बीच भारत ऊर्जा सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार करना चाहता है। देश में आने वाली आधी से ज्यादा LPG और LNG भी कतर और यूएई से इसी समुद्री रास्ते से जहाजों के जरिए आती है। सबसे बड़ी चुनौती समुद्र की गहराई इस परियोजना में सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती समुद्र में करीब 3,450 मीटर की गहराई तक पाइपलाइन बिछाना है। इतनी गहराई में पानी का दबाव काफी ज्यादा होता है। पाइपलाइन को सुरक्षित रखना, समुद्र तल की चट्टानों और खाइयों के बीच रास्ता बनाना और भविष्य में इसकी मरम्मत करना भी बड़ी तकनीकी चुनौतियां होंगी। सीधे सप्लाई से खर्च और जहाजों पर निर्भरता कम होगी सीधे ओमान, यूएई, कतर और सऊदी अरब के गैस और तेल भंडार से आपूर्ति मिलने पर समुद्री जहाजों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे तेल और गैस के परिवहन और बीमा पर होने वाला खर्च घट सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक तेल और गैस की कीमत बढ़ने पर भारत पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकता है। 3 किमी पाइपलाइन का परीक्षण परियोजना विकसित करने वाली संस्था साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज ने करीब ₹25 करोड़ की लागत से लगभग 3 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर परीक्षण किया है। सभी शर्तें पूरी होने के बाद पूरी परियोजना के निर्माण में करीब 5 से 7 साल लगने का अनुमान है। ---------------------------------- यह खबर भी पढ़ें…. ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया:बोले- वे मुश्किल में, तभी होर्मुज खोलना चाहते; ईरान बोला- बातचीत से ही निकलेगा हल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान मुश्किल में है, इसलिए वह तुरंत होर्मुज खोलना चाहता है। पूरी खबर पढ़ें…
यूपी के उन्नाव में गंगा खतरे के निशान पर पहुंची:बिहार के सारण में बांध टूटा, एमपी-हिमाचल से इसी हफ्ते मानसून की विदाई
मध्य प्रदेश से इसी हफ्ते मानसून की विदाई शुरू होगी। यह सबसे पहले उज्जैन और ग्वालियर संभाग के जिलों से लौटेगा। फिर इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर से वापसी होगी। इससे पहले 3 दिन बूंदाबांदी का दौर चलेगा। नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक सहित उत्तर बिहार की नदियां उफान पर है। हैं। 6 जिलों में बाढ़ से 1.59 लाख लोग प्रभावित हैं। बुधवार सुबह सारण में बांध टूटा है। जिससे अफरातफरी मच गई है। निचले इलाकों में तेजी से पानी भर रहा है। यूपी में बुधवार को पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहा और तेज धूप निकली। लेकिन, नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से घाघरा, सरयू समेत 8 से ज्यादा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। लखीमपुर में एक मंदिर शारदा नदी में समा गया। बहराइच में सड़कों पर घाघरा नदी का पानी बह रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तराखंड में 5 अक्टूबर को हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर प्रदेश के बाकी जिलों में बारिश होने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश से भी दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई होने वाली है। प्रदेश से मानसून वापसी की नॉर्मल डेट 25 सितंबर है। यानी इस बार एक सप्ताह से ज्यादा देरी से मानसून विदा होगा। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें
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