जेल की काल कोठरी में लिखा गया था ये गाना, राज कपूर की फिल्म से हुआ हिट, मजरूह सुल्तानपुरी का किया सपोर्ट
इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल..." फिल्म 'धरम करम' का यह गाना आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है. मुकेश की आवाज, आरडी बर्मन का संगीत और मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे शब्दों ने इस गाने को यादगार बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सदाबहार गीत के पीछे संघर्ष और खुद्दारी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी है? बताया जाता है कि मजरूह ने जेल में रहते हुए इस गीत से जुड़ी रचना लिखी थी, जिसे बाद में राज कपूर ने अपनी फिल्म में इस्तेमाल किया.
शायरी के थे दीवाने, फिल्मों में लिखना नहीं था पसंद, फिर एक सलाह से बदली राह और बॉलीवुड को मिले मजरूह सुल्तानपुरी
मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी, जिनका असली नाम असरार हसन खान था, ने 5 दशक से अधिक के करियर में 350 फिल्मों के लिए हजारों गीत लिखे. उन्हें 1993 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिला.
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