Andy Burnham says RAF Fairford airbase incident was linked to Iran | BBC News
Britain's prime minister has said that his government believes an incident last weekend, at an airbase used by US heavy bombers, was linked to Iran. Andy Burnham told the BBC there were "strong indications" that Iran had played a part in what happened at Fairford air base, but that it was an "ongoing, complex and serious". Subscribe to our channel here: https://bbc.in/bbcnews For the latest news download the BBC News app or visit BBC.com/news #AndyBurnham #Iran #BBCNews
भारत-यूएई के बीच समुद्र में तेल पाइपलाइन की तैयारी:होर्मुज संकट के बीच विकल्प तलाश रहा भारत, अरब सागर के नीचे गुजरात-महाराष्ट्र तक बिछेगी लाइन
होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत भारत और यूएई के बीच समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी से मुलाकात के बाद इसकी पुष्टि की। सरकार ने ओमान-यूएई से भारत तक समुद्र के नीचे पाइपलाइन परियोजना को प्राथमिकता में रखा है। MEIDP (मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन) के तहत पाइपलाइन ओमान और यूएई के तट से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए गुजरात और महाराष्ट्र के तट तक पहुंच सकती है। पहले सिर्फ गैस पाइपलाइन की थी योजना जून में सरकार ने इस परियोजना को निजी प्रोजेक्ट बताया था। शुरुआत में इसमें सिर्फ गैस पाइपलाइन की योजना थी, लेकिन अब समुद्र के रास्ते कच्चा तेल लाने की संभावना पर भी तकनीकी अध्ययन शुरू हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर सरकारी कंपनियां परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इसमें गहरे समुद्र में पाइपलाइन बिछाने की तकनीक, लागत और सुरक्षा समेत दूसरे पहलुओं की जांच की जाएगी। क्यों पड़ी इस पाइपलाइन की जरूरत? भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। होर्मुज में तनाव के बीच भारत ऊर्जा सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार करना चाहता है। देश में आने वाली आधी से ज्यादा LPG और LNG भी कतर और यूएई से इसी समुद्री रास्ते से जहाजों के जरिए आती है। सबसे बड़ी चुनौती समुद्र की गहराई इस परियोजना में सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती समुद्र में करीब 3,450 मीटर की गहराई तक पाइपलाइन बिछाना है। इतनी गहराई में पानी का दबाव काफी ज्यादा होता है। पाइपलाइन को सुरक्षित रखना, समुद्र तल की चट्टानों और खाइयों के बीच रास्ता बनाना और भविष्य में इसकी मरम्मत करना भी बड़ी तकनीकी चुनौतियां होंगी। सीधे सप्लाई से खर्च और जहाजों पर निर्भरता कम होगी सीधे ओमान, यूएई, कतर और सऊदी अरब के गैस और तेल भंडार से आपूर्ति मिलने पर समुद्री जहाजों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे तेल और गैस के परिवहन और बीमा पर होने वाला खर्च घट सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक तेल और गैस की कीमत बढ़ने पर भारत पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकता है। 3 किमी पाइपलाइन का परीक्षण परियोजना विकसित करने वाली संस्था साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज ने करीब ₹25 करोड़ की लागत से लगभग 3 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर परीक्षण किया है। सभी शर्तें पूरी होने के बाद पूरी परियोजना के निर्माण में करीब 5 से 7 साल लगने का अनुमान है।
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