बुआ-भतीजी ने मिट्टी और कपड़े से शुरू किया कारोबार, आज 172 महिलाओं की बनीं सहारा
Ranchi Women Success Story: रांची की पल्लवी ने अपनी बुआ के साथ मिलकर मिट्टी और कपड़े की कलाकारी को रोजगार का जरिया बनाया और आज उनके साथ 172 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. माटीकला की ट्रेनिंग लेकर दोनों ने मिट्टी से नेकलेस, इयररिंग्स और दूसरे आभूषण तैयार करने शुरू किए, वहीं कपड़ों पर कढ़ाई और ब्लॉक प्रिंटिंग का काम भी सीखा. शुरुआत में लोग मिट्टी के गहनों को लेकर ताने देते थे, लेकिन पल्लवी की मेहनत से आज इनके बनाए प्रोडक्ट मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों तक पहुंच रहे हैं. सरकारी स्टॉल और प्रदर्शनियों के जरिए उन्हें नए ग्राहक मिल रहे हैं और पल्लवी के अनुसार, उनकी मासिक कमाई अब लाखों रुपये में है. साथ ही, वह 172 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें घर से काम करने और अपनी आजीविका चलाने का अवसर दे रही हैं.
बांस-जलकुंभी से बना रहे ऐसे होम डेकोर, देखकर कंपनी के प्रोडक्ट लगेंगे, 50+ ग्रामीणों को मिला काम
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आसानी से मिलने वाले बांस, जलकुंभी और मकई के छिलके को अब बेकार समझकर फेंकने के बजाय खूबसूरत और प्रीमियम होम डेकोर प्रोडक्ट में बदला जा रहा है. सायन गोंड और महली जनजाति के ग्रामीण कारीगरों के साथ मिलकर इन प्राकृतिक संसाधनों से हाथ से कई तरह के डिजाइनर सामान तैयार कर रहे हैं, जिनकी फिनिशिंग किसी बड़े ब्रांड के प्रोडक्ट जैसी नजर आती है. इस पहल से फिलहाल 50 से अधिक ग्रामीण जुड़े हैं और इनके बनाए प्रोडक्ट स्थानीय बाजार से निकलकर देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंच रहे हैं. खास बात यह है कि इस काम के जरिए ग्रामीण कारीगरों के हुनर को बाजार मिल रहा है और उनके लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं.
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