UPI ट्रांजेक्शन पर चार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा:0.4% MDR लगाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर कल सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट 28 सितंबर को यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लेने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। सरकार ने 2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस लगाने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी है। याचिका में इस फीस लेने को रद्द करने की मांग की गई है। CJI सूर्यकांत की तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई कोर्ट की कॉज लिस्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने होगी। वकील अंजन दत्ता ने ये जनहित याचिका की है। बिना सलाह और ठोस कानून के फीस लगाने का आरोप याचिका में कहा गया है कि सरकार ने जनता से चर्चा किए बिना और कोई ठोस नियम बनाए बिना ही यह फीस तय कर दी। इसके अलावा, 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' के एक नियम (धारा 10A) को भी अदालत में चुनौती दी गई है। आरोप है कि यह नियम सरकार को अपनी मर्जी से यह फैसला करने की छूट देता है कि कौन-सा डिजिटल पेमेंट फ्री रहेगा और किस पर चार्ज लगेगा। रुपे कार्ड और UPI के नियमों में अंतर पर सवाल याचिका में रुपे डेबिट कार्ड और UPI के बीच किए गए इस भेदभाव को गलत ठहराया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, सरकार ने रुपे कार्ड से पेमेंट पर 'जीरो-चार्ज' की सुविधा जारी रखी है, लेकिन UPI से ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर फीस लगा दी है। इसे मनमाना फैसला बताते हुए कहा गया है कि इससे कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ेगा और आम ग्राहकों की जेब पर भी असर पड़ेगा। UPI चार्ज के नए नियम: कारोबारियों पर क्या असर पड़ेगा? मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या होता है? MDR वह फीस है, जो कोई दुकानदार या व्यापारी कार्ड या UPI से पेमेंट लेने की सुविधा इस्तेमाल करने के बदले बैंक और पेमेंट कंपनियों को देता है। यह चार्ज पेमेंट सिस्टम और मशीनों को सही तरीके से चलाने के खर्च के लिए लिया जाता है। खास बात यह है कि यह फीस व्यापारी को देनी होती है, ग्राहक से नहीं ली जाती।
रेलवे क्वार्टर में रहने वालों को झटका: बढ़ा किराया अब वेतन से कटेगा
भोपाल। रेलवे के सरकारी क्वार्टर में रहने वाले कर्मचारियों की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। रेलवे बोर्ड ने देशभर में रेलवे आवास के मासिक किराए में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू मानी गई हैं। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में 23 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया है।
नई दरें लागू होने के बाद जुलाई, अगस्त और सितंबर में पुरानी दर से काटे गए किराए और नई दर के बीच का अंतर भी कर्मचारियों से वसूला जाएगा। यह बकाया राशि आने वाले वेतन से काटी जा सकती है। यानी कर्मचारियों को बढ़ा हुआ किराया देने के साथ पिछली तीन महीने की अंतर राशि भी चुकानी होगी।
छोटे क्वार्टरों का किराया भी बढ़ा
रेलवे बोर्ड ने अलग-अलग प्रकार के सरकारी आवास और उनके क्षेत्रफल के आधार पर नई मासिक दरें तय की हैं। पहली श्रेणी के 25 वर्ग मीटर तक के क्वार्टर का किराया अब 120 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रतिमाह हो गया है। इसी तरह 25 से 30 वर्ग मीटर वाले क्वार्टर का किराया 170 से बढ़ाकर 200 रुपये और 30 से 35 वर्ग मीटर वाले क्वार्टर का किराया 210 से बढ़ाकर 250 रुपये प्रतिमाह किया गया है। 35 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले इसी श्रेणी के क्वार्टर का किराया 220 से बढ़ाकर 280 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
बड़े क्वार्टरों पर भी बढ़ा शुल्क
दूसरी श्रेणी के क्वार्टरों के लिए नई दर 280 से 380 रुपये प्रतिमाह तक रखी गई है। तीसरी श्रेणी के आवासों में क्षेत्रफल के अनुसार कर्मचारियों को 470 से 610 रुपये प्रतिमाह देना होगा। चौथी श्रेणी के क्वार्टरों का मासिक शुल्क अब 720 से 1320 रुपये तक होगा। वहीं पांचवीं श्रेणी के बड़े क्वार्टरों के लिए क्षेत्रफल के आधार पर 1940 से 5860 रुपये प्रतिमाह की दर तय की गई है।
नौकर के कमरे और गैरेज का शुल्क भी बढ़ा
रेलवे आवास के साथ मिलने वाले नौकर के कमरे और गैरेज के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। नौकर के कमरे का शुल्क 120 से बढ़ाकर 130 रुपये और गैरेज का शुल्क 80 से बढ़ाकर 90 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
350 वर्ग मीटर से बड़े आवास का शुल्क 5860 रुपये
रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार 350 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले आवासों के लिए अधिकतम निर्धारित दर लागू होगी। ऐसे आवासों का मासिक शुल्क 5860 रुपये रहेगा। चौथी श्रेणी के क्वार्टरों की नई दरें रेलवे अधिकारियों के आवागमन के लिए बनाए गए अस्थायी आवासों पर भी लागू होंगी।
उप-मानक आवासों पर नई दर लागू नहीं
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नई दरें उप-मानक आवासों पर लागू नहीं होंगी। यानी ऐसे सरकारी आवास जो निर्धारित मानक से कम सुविधाओं वाले हैं, उन पर यह नई दर लागू नहीं होगी। रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद संबंधित विभागों को नई दरों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में रेलवे क्वार्टर में रहने वाले कर्मचारियों के आगामी वेतन में बढ़ी हुई मासिक कटौती के साथ जुलाई से सितंबर तक की बकाया अंतर राशि भी समायोजित की जा सकती है।
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