इंदौर में भारत-वेस्टइंडीज T20 का काउंटडाउन शुरू, मैदान पर बनेगा ‘चेक्स’ पैटर्न, 25 सितंबर से टिकटों की बिक्री
इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को होने वाले भारत और वेस्टइंडीज टी-20 मैच को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार मैदान की आउटफील्ड को एक बेहद खास और नया लुक दिया जा रहा है।
दरअसल टीवी प्रसारण और स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के अनुभव को शानदार बनाने के लिए घास पर ‘चेक्स’ यानी चौकड़ी वाला खूबसूरत पैटर्न तैयार किया जा रहा है। इस नए लुक को देखने के लिए क्रिकेट फैंस भी काफी उत्साहित हैं।
मिनटों में फुल हुईं स्टूडेंट टिकटें, 25 से सामान्य बिक्री
मैच के क्रेज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को स्टूडेंट कन्सेशन टिकटों की बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही मिनटों में 1200 छात्रों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो गया। दस्तावेजों की जांच के बाद छात्रों को ये टिकट जारी कर दिए जाएंगे। आपको बता दें कि सामान्य श्रेणी के दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकटों की बिक्री 25 सितंबर की सुबह 6 बजे से शुरू होगी, जिसका फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
शाई होप की कप्तानी में इंदौर पहुंचेगी वेस्टइंडीज
इस मुकाबले के लिए वेस्टइंडीज की टी-20 टीम का ऐलान भी हो चुका है, जिसकी कमान शाई होप संभालेंगे। टीम में शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, रोमारियो शेफर्ड और अकील होसेन जैसे कई आक्रामक खिलाड़ी शामिल हैं। दरअसल, कैरेबियाई टीम के ये धाकड़ खिलाड़ी अपनी तूफानी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में इंदौर के छोटे और बल्लेबाजी के अनुकूल मैदान पर छक्कों और चौकों की बरसात होना लगभग तय माना जा रहा है।
होलकर में हमेशा रहा है हाई-स्कोरिंग मैचों का इतिहास
होलकर स्टेडियम का टी-20 इतिहास बेहद रोमांचक रहा है। इसी मैदान पर 22 दिसंबर 2017 को कप्तान रोहित शर्मा ने सिर्फ 35 गेंदों में तूफानी शतक जड़ा था। भारत ने यहाँ खेले गए चार में से तीन मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की है, जिसमें 2024 में अफगानिस्तान के खिलाफ मिली जीत भी शामिल है। आपको बता दें कि इंदौर की यह पिच हमेशा से बल्लेबाजों के लिए मददगार रही है, इसलिए इस बार भी बड़ा स्कोर बनने की उम्मीद है।
Blood Pressure: कम उम्र में ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह क्या है? युवाओं में क्यों बढ़ रहा हाइपरटेंशन
Blood Pressure: पहले हाई ब्लड प्रेशर को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था, लेकिन अब 20 से 40 वर्ष की उम्र में भी कई लोगों में बीपी बढ़ने की समस्या देखने को मिल रही है। लंबे समय तक तनाव में रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, अनियमित खानपान, ज्यादा नमक वाला भोजन, बढ़ता वजन और पर्याप्त नींद न लेना इसके पीछे अहम कारण हो सकते हैं। खास बात यह है कि शुरुआती दौर में हाई बीपी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए कई युवाओं को इसकी जानकारी ही नहीं हो पाती।
युवाओं में बढ़ता ब्लड प्रेशर इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि लंबे समय तक अनियंत्रित बीपी रहने से हृदय, किडनी, आंखों और मस्तिष्क पर असर पड़ सकता है। सिरदर्द, चक्कर या बेचैनी जैसे लक्षण हर मरीज में दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर बीपी को पहचानने के बजाय समय-समय पर इसकी जांच कराना जरूरी है।
तनाव और बदलती जीवनशैली बड़ी वजह
आज की जीवनशैली में काम का दबाव, लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल, देर रात तक जागना और व्यायाम के लिए समय नहीं निकालना आम हो गया है। लंबे समय तक तनाव और खराब नींद शरीर की कई प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है और कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम बढ़ा सकती है।
खानपान पर भी देना होगा ध्यान
फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, नमकीन और बाहर का भोजन नियमित रूप से खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है। इसके साथ ही ज्यादा कैलोरी और कम पौष्टिक भोजन वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। मोटापा भी हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है।
युवाओं को भोजन में नमक की मात्रा सीमित रखने के साथ फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अत्यधिक प्रोसेस्ड और नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी महत्वपूर्ण है।
बैठे रहने की आदत बढ़ा रही परेशानी
ऑफिस का काम, ऑनलाइन मीटिंग, मोबाइल और मनोरंजन के कारण युवाओं का सक्रिय समय कम हुआ है। लंबे समय तक बैठे रहने और नियमित व्यायाम न करने से वजन बढ़ने सहित कई स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाना बीपी सहित संपूर्ण हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
नींद को न करें नजरअंदाज
देर रात तक मोबाइल चलाना, अनियमित सोने का समय और लगातार कम नींद लेना भी स्वस्थ जीवनशैली के लिए नुकसानदायक हो सकता है। युवाओं को नियमित नींद का समय बनाए रखने और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने पर ध्यान देना चाहिए।
कब करानी चाहिए बीपी की जांच?
हाई ब्लड प्रेशर कई बार बिना किसी लक्षण के रहता है। इसलिए केवल सिरदर्द या चक्कर आने पर ही बीपी जांचना सही तरीका नहीं है। जिन लोगों में परिवार में हाई बीपी का इतिहास है, वजन अधिक है, शारीरिक गतिविधि कम है या खानपान असंतुलित है, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
यदि बार-बार बीपी सामान्य से अधिक आ रहा है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। एक-दो रीडिंग के आधार पर स्वयं दवा शुरू करना या बंद करना उचित नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच, घर पर बीपी मॉनिटरिंग या अन्य परीक्षण की सलाह दे सकते हैं।
युवाओं के लिए जरूरी बदलाव
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय जीवनशैली में सुधार भी जरूरी है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन, स्वस्थ वजन और धूम्रपान से दूरी जैसे कदम लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।
कम उम्र में बढ़ता बीपी शरीर का एक ऐसा संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से इसे नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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