Pitru Paksha में वर्जित सब्जियों के इस्तेमाल से लग सकता है पितृ दोष, सात्विक रखें थाली
पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है और यह आश्विन मास की अमावस्या तक मनाई जाएगी। इन 16 दिनों में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में पूर्वज सूक्ष्म रुप लेकर धरती पर जरुर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए अन्न-जल को ग्रहण करते हैं।
जब श्राद्ध का भोजन बनाया जाता है, तो तैयार करते समय कुछ जरुरी सावधानी और शुद्धता बरतने की काफी आवश्यकता है। ज्योतिषी के अनुसार, यदि श्राद्ध की थाली में नियमों के विरुद्ध जाकर कुछ खास सब्जियां या मसाले शामिल कर दिए जाते हैं, तो पितृ नाराज हो जाते हैं। जिस कारण से आपके घर में पितृ दोष भी लग सकता है।
क्यों जरूरी है श्राद्ध में सात्विकता का ध्यान रखना?
दरअसल, पितृपक्ष का मुख्य उद्देश्य पूर्वजों को तृप्त करना है। इसके लिए भोजन पूरी तरह से सात्विक, पवित्र और दोषमुक्त होना जरुरी है। किचन में जरा सी भी लापरवाही या वर्जित चीजों का इस्तेमाल श्राद्ध के पूर्ण फल को नष्ट कर सकता है। जब आप भोजन बनाएं, तो मन में पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता का भाव रखें, जिससे पितर प्रसन्न होकर घर में हमेशा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें।
श्राद्ध की थाली में कौन सी सब्जियां नहीं शामिल करनी चाहिए?
ज्योतिषी के अनुसार, जब आप पितरों के लिए भोजन बनाएं, तो तामसिक और जमीन के नीचे उगने वाली कुछ सब्जियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
- कंदमूल और जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां: आलू, मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर और अरबी को श्राद्ध की खाली में शामिल न करें।
- अन्य वर्जित सब्जियां: जैसे कि बैंगन, कटहल, पत्तागोभी और काले चने का इस्तेमाल न करें। इन सभी चीजों को अशुभ माना जाता है।
श्राद्ध में किन मसालों और अनाजों का न करें प्रयोग?
श्राद्ध पक्ष में मसूर की दाल, चने की दाल, कुलथी और राजमा नहीं पकाना चाहिए। इसके स्थान पर मूंग की दाल या उड़द की दाल का इस्तेमाल करना अच्छा माना जाता है, क्योंकि उड़द के बड़े पितरों को विशेष प्रिय माने जाते हैं।
पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए श्राद्ध के इन नियमों का पालन करना बहुत ही जरुरी है। इस दौरान आप पूरी शुद्धता और सागदी के साथ पितरों के लिए भोग तैयार करते हैं, तो वे प्रसन्न होकर आपके पूरे परिवार को आरोग्य, शांति और संपन्नता का आशीर्वाद प्रदान कर सकते हैं।
Russian Army में भर्ती न हों भारतीय नागरिक, Ministry of External Affairs ने जारी की एडवाइजरी
विदेश मंत्रालय ने रूस जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए बुधवार को एक परामर्श जारी किया, जिसमें उन्हें रूसी सेना में भर्ती होने से बचने की सलाह देते हुए कहा गया है कि वे ऐसे कदमों की गंभीरता पर विचार करें और समझें कि इससे वे खुद को जानलेवा परिस्थितियों में डाल देंगे। विदेश मंत्रालय ने परामर्श में यह भी कहा है कि “उसके सामने ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग अपनी मर्जी से रूसी सेना में शामिल होने की पेशकश स्वीकार कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे इसके बदले आर्थिक लाभ सहित अन्य फायदे हासिल कर सकेंगे और बाद में भारत सरकार से संपर्क करके सेवा से छूट पा लेंगे।” परामर्श में कहा गया है, “फिर से दोहराया जाता है कि यह एक खतरनाक रास्ता है और सरकार ऐसा करने से सख्ती से मना करती है।” मंत्रालय ने इस बात को रेखांकित किया है कि रूसी सेना में शामिल सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कुशल-क्षेम और समयपूर्व सेवामुक्ति के लिए भारत सरकार रूसी पक्ष के साथ “लगातार संपर्क” में है। परामर्श के मुताबिक, भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे एजेंट से नौकरी के प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले “पूरी सावधानी बरतें”, जो विदेश मंत्रालय के साथ पंजीकृत नहीं हैं।
इसमें कहा गया है, “यह बात भी हमारे संज्ञान में आई है कि स्वयंसेवा समूह समेत गैर-सरकारी संस्थाएं रूसी सशस्त्र बलों में सेवा देने के लिए विदेशी नागरिकों की भर्ती कर रही हैं।” परामर्श में भारतीय नागरिकों को ऐसी नौकरियों के प्रस्ताव से दूर रहने की सलाह दी गई है, जिनमें गंभीर जोखिम हो सकते हैं। इसमें कहा गया है, “हमें लगातार ऐसी खबरें मिल रही हैं कि भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में सरकार ने कई बार इस रास्ते में मौजूद जोखिमों को रेखांकित किया है।
साथ ही, समय-समय पर भारतीय नागरिकों को विदेश में नौकरी के अवसर तलाशते समय सावधानी बरतने और अनजान व्यक्तियों की ओर से दिए जाने वाले नौकरी के प्रस्ताव के झांसे में न आने की सलाह दी गई है।” परामर्श के अनुसार, “ऐसे कई मामले भी सामने आए हैं, जिनमें लोगों ने भारतीय नागरिकता स्वेच्छा से छोड़ने, रूसी पासपोर्ट स्वीकार करने और रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने के लिए भारतीय अधिकारियों से संपर्क किया है। कुछ लोगों ने तो भारतीय अधिकारियों से सलाह लिए बिना ही ऐसा कर लिया है, क्योंकि वे कुछ समय के लिए मिलने वाले आर्थिक लाभ के लालच में आ गए।” इसमें कहा गया है कि नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे कामों की गंभीरता पर विचार करें और समझें कि वे खुद को किस जानलेवा खतरे में डाल रहे हैं।
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