T20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी किस धातु से बनी है, जानिए इसकी किमत, वजन और जयपुर से कनेक्शन?
T20 World Cup Trophy: टी20 वर्ल्ड कप का इतिहास काफी पुराना है. साल 2007 में पहली बार टी20 वर्ल्ड खेला गया था, जिसे धोनी की कप्तानी में भारत ने जीता था. इसके बाद साल 2024 में हुए टी20 वर्ल्ड कप को एक बार फिर से भारत ने रोहित शर्मा की कप्तानी में जीत लिया. टी20 वर्ल्ड कप के अब तक 9 संस्करण खेले जा चुके हैं. इस दौरान विजेता बनने वाली सभी टीमों को चमचमाती हुई ट्रॉफी विजेता बनने पर पुरस्कार के रूप में दी गई.
क्रिकेट जगत से जुड़े कई फैंस के बीच में ये जानने की उत्सुकता होती है कि, क्या टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी किस धातु से बनी होती है. उसे बनाने में क्या सोने या चांदी का इस्तेमाल किया गया है. तो आज हम आप सभी के प्रश्नों का जवाब देने के लिए आपको टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी का पूरा इतिहास बताने वाले हैं.
#WATCH | First look of the ICC T20 World Cup Trophy during the trophy tour in Delhi-NCR.
— ANI (@ANI) January 26, 2026
ICC Men's T20 World Cup 2026 to begin from 7th February. pic.twitter.com/WTGyvY1wg7
कब और कहां पहली बार बनी टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी
टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी की ट्रॉफी सबसे पहले भारत में बनाई गई थी. इसको राजस्थान के जयपुर में बनाया गया था. इस ट्रॉफी की डियाइन ऑस्ट्रेलिया की मिनाले ब्रायस ने तैयार की थी. इसके बाद पहली बार ट्रॉफी को जयपुर के रहने वाले अमित पाबूवाल ने बनाया. उन्होंने 2007 से लेकर 2012 तक टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी बनाई. इसके बाद लंदन की लिंक्स कंपनी को ट्रॉफी बनाने का जिम्मा दिया गया. अब 2021 से टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी बनाने का काम लंदन की थॉमस लाइट कंपनी कर रही है.
किस धातु की बनी है टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी
टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी बनाने के लिए चांदी का इस्तेमाल किया जाता है. ये ट्रॉफी सिल्वर कलर की होती है, जिसकी चमक सभी फैंस को अपनी ओर आकर्षित करती है. इस ट्रॉफी को बनाने में चांदी और रोडियम का इस्तेमाल हुआ. ये पूरी तरह से चांदी से बनी हुई नहीं होती है. ट्रॉफी का बेस सिल्वर प्लेट का होता है. इसे बनाने में 5 अलग तरह की धातु का उपयोग किया जाता है.
कितना है टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी का वजन
टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी का शुरुआत में वजन 12 किलो हुआ करता था जबकि इसकी ऊंचाई 57.15 सेंटीमीटर थी. इसके बाद साल 2021 में लंदन की थॉमस लाइट कंपनी ने इस ट्रॉफी का वजन काफी कम कर इसे हल्का बना दिया. इस समय टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी का वजन 3.9 किलो कर दिया गया, जबकि इसकी ऊंचाई 51 सेंटीमीटर कर दी गई है.
कितनी है टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी की कीमत
इस टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी की कीमत पर अब तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है कि इसे बनाने में कितनी लागत लगी है. इसकी रकम कितनी है इसका कोई भी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी कीमत लगभग 15 लाख रुपए बताई जाती है. टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम को रेप्लिका ट्रॉफी दी जाती है. ओरिजिनल ट्रॉफी आईसीसी के पास रखी रहती है.
ये भी पढ़ें : IND vs NZ 4th T20: विशाखापट्टनम में क्यों रहता है बल्लेबाज का दबदबा, जानिए क्या है इसकी असली वजह
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में अमेरिका की भूमिका बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई: सीनेटर मार्क वॉर्नर
वाशिंगटन, 28 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के प्रभावशाली सीनेटर और सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष मार्क वॉर्नर ने कहा कि हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को खत्म करने में अमेरिका की भूमिका को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी बातें कूटनीतिक माहौल को बिगाड़ सकती हैं और इस संवेदनशील समय में क्षेत्रीय तनाव को और हवा दे सकती हैं।
समाचार एजेंसी आईएएनएस को दिए एक खास इंटरव्यू में वॉर्नर ने कहा कि उपलब्ध जानकारी इस बात का समर्थन नहीं करती कि वाशिंगटन ने अकेले ही इस तनाव को सुलझाया। जो कुछ मैंने भारतीय सरकार के सदस्यों, खुफिया समुदाय और अमेरिकी इंटेलिजेंस कमेटी से सुना और पढ़ा, उससे साफ है कि यह मसला भारत और पाकिस्तान के बीच ही सुलझा है।
वॉर्नर ने माना कि अमेरिका ने सहयोगी भूमिका निभाने की कोशिश की होगी, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी दखलअंदाजी के दावों को खारिज कर दिया।
यह पूछे जाने पर कि क्या यह टकराव दोनों परमाणु संपन्न देशों को बड़ी तबाही के करीब ले गया था, वॉर्नर ने कहा कि स्थिति गंभीर थी, लेकिन नई नहीं। भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी ऐसे कई तनाव हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह घटना एक जाना-पहचाना पैटर्न दिखाती है। यह फिर से किसी आतंकवादी घटना से जुड़ा था और सीमा पार आतंकवाद को लंबे समय से चली आ रही चिंता बताया। ऐसे मौकों के लिए नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच संवाद के चैनल मौजूद हैं।
वॉर्नर ने चिंता जताई कि अमेरिका की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर बताने से सहयोगी देशों के साथ भरोसा कमजोर हो सकता है। भारत के साथ मौजूदा टैरिफ विवाद भी इसी नाराजगी से जुड़ा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीजफायर का श्रेय ट्रंप को पर्याप्त रूप से नहीं दिया। यही इसका कारण लगता है।
उन्होंने दूसरे विदेशी मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रंप अक्सर नतीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। ईरान पर अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, अमेरिकी सैन्य लड़ाकू विमान ने शानदार काम किया, लेकिन उन्होंने ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म नहीं किया। तेहरान कुछ महीनों में दोबारा इसे तैयार कर सकता है।
वॉर्नर ने कहा कि इस तरह की भाषा के कूटनीतिक नुकसान होते हैं और इससे वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच भरोसे में गिरावट आती है। उन्होंने रक्षा सहयोग पर भी असर पड़ने की चेतावनी दी और कहा कि भारत जैसे देश रातोंरात किसी नए साझेदार पर पूरी तरह निर्भर नहीं हो सकते।
पाकिस्तान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वह अक्सर भारत पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देता है और अपनी आर्थिक चुनौतियों के लिए भी भारत को जिम्मेदार ठहराता है। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि भारत अब उस प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़ चुका है और नई पीढ़ी अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों के पक्ष में है।
वॉर्नर ने चेताया कि अमेरिका की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर बताना क्षेत्रीय संतुलन को और जटिल बना सकता है और भारत-अमेरिका के लंबे समय के रिश्तों को स्थिर करने की जरूरत से ध्यान हटा सकता है।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















