Responsive Scrollable Menu

Trump Tightens H-1B Visa Rules: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला; H-1B वीजा पर $100,000 की फीस का नियम 1 साल के लिए और बढ़ा

अमेरिका में भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक कंपनियों के लिए बड़ी खबर आई है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी नवीनतम आदेश में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा व्यवस्था पर कड़ा आर्थिक और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने का स्पष्ट संदेश दिया है।

सितंबर 2025 में पहली बार लागू किए गए एक लाख डॉलर के विशेष शुल्क के नियम को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों द्वारा सस्ते विदेशी कार्यबल के प्रयोग को हतोत्साहित करना और घरेलू अमेरिकी श्रमिकों के रोजगार और वेतन की सुरक्षा करना है।

​$100,000 शुल्क नवीनीकरण: क्या हैं इस आदेश के मायने? 
​अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट रूप से मानना है कि H-1B वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग से अमेरिकी पेशेवरों की नौकरियां खतरे में पड़ती हैं और स्थानीय वेतन पर नकारात्मक दबाव बनता है। 19 सितंबर 2025 को पहली बार घोषित यह भारी शुल्क नियम इस वर्ष समाप्त हो रहा था, जिसे अब एक और वर्ष के लिए विस्तारित कर दिया गया है।

​यद्यपि बोस्टन की एक संघीय अदालत और जिला अदालत ने इस शुल्क को गैर-कानूनी ठहराते हुए इस पर रोक लगा रखी है, फिर भी राष्ट्रपति ने अपने प्रशासनिक आदेश के जरिए अपना सख्त रुख कायम रखा है और यह मामला वर्तमान में अदालत में विचाराधीन है।

इस नियम में राहत की बात यह है कि अमेरिका में पहले से मौजूद अंतरराष्ट्रीय छात्रों (जो F-1/OPT से H-1B में स्विच करते हैं) और वर्तमान H-1B वीजा के नवीनीकरण कराने वालों पर इस भारी-भरकम शुल्क का कोई असर नहीं पड़ेगा।

​छंटनी करने वाली कंपनियों पर रहेगी कड़ी नजर 
​डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित नए आदेश में केवल शुल्क ही नहीं, बल्कि जांच और समीक्षा प्रणाली को भी बेहद कड़ा किया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग, श्रम विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे उन कंपनियों के H-1B आवेदनों की गहनता से जांच करें, जिन्होंने हाल ही में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है।

​वाणिज्य विभाग, शिक्षा विभाग और लघु व्यवसाय प्रशासन (SBA) के साथ डेटा साझा करके यह पूरी तरह से सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी कंपनी द्वारा किसी अमेरिकी नागरिक को हटाकर कम वेतन पर विदेशी कर्मचारी को न रखा जा रहा हो। इसके साथ ही प्रशासन ने दावा किया है कि 2025 के आदेश के बाद से ही कांसुलर प्रोसेसिंग के जरिए विदेशों से सीधे आने वाले आवेदनों में लगभग 97% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

​भारतीय पेशेवरों और आईटी उद्योग पर असर 
अमेरिकी H-1B वीजा प्राप्त करने वालों में भारतीय पेशेवरों का हिस्सा हमेशा से सबसे अधिक रहा है। बाहरी देशों से सीधे पेशेवरों को अमेरिका बुलाना अब कंपनियों के लिए अत्यधिक खर्चीला साबित होगा, जिससे टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी भारतीय आईटी कंपनियों के साथ-साथ अमेरिकी टेक दिग्गजों की नियुक्ति रणनीति पर भी बड़ा असर पड़ेगा।

​जो भारतीय छात्र वर्तमान में अमेरिका में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं, उन्हें इस शुल्क से तात्कालिक राहत तो जरूर मिली है, लेकिन भविष्य में कंपनियों द्वारा स्पॉन्सरशिप देने में की जाने वाली झिझक उनकी चिंताओं को लगातार बढ़ा रही है।

Continue reading on the app

US Sanctions Bill Passed: अमेरिकी संसद से पास हुआ रूस-ईरान प्रतिबंध बिल, भारत और चीन पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ

वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से एक बेहद अहम और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन ने रूस और ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने के मकसद से एक नया प्रतिबंध विधेयक पारित किया है।

इस विधेयक की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें केवल रूस और ईरान ही नहीं, बल्कि उनसे भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले भारत और चीन जैसे तीसरे देशों पर भी 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम आयात शुल्क थोपने का प्रावधान रखा गया है। इस विधेयक के पास होने से अब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक व रणनीतिक संबंधों पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

​रूस-ईरान प्रतिबंध विधेयक पारित: अमेरिकी संसद से भारत और चीन को संदेश 
​अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था और ईरान के रक्षा तंत्र पर शिकंजा कसने के लिए 61 पन्नों वाले 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को बहुमत से पास कर दिया है। सदन में हुई वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 मत पड़े। इस कानून का मुख्य लक्ष्य रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाली उस भारी-भरकम आय को रोकना है, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण के लिए कर रहा है। इसके साथ ही, बिल के माध्यम से ईरान के हथियार उद्योग और रूसी अरबपतियों की संपत्तियों पर भी व्यापक प्रतिबंध लगाने का रास्ता साफ कर दिया गया है।

​रूस से तेल आयात पर 100% टैरिफ का प्रावधान: भारत की चिंताएं क्यों बढ़ीं? 
​इस नए कानून में एक विशेष प्रावधान शामिल किया गया है जो रूस से सर्वाधिक कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों पर सीधा असर डालता है। इस सूची में भारत और चीन सबसे ऊपर हैं, जिनके साथ स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान भी शामिल हैं।

कानून के मुताबिक, यदि ये देश रूस से अपने ऊर्जा आयात में कटौती नहीं करते हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार होगा कि वे इन देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर 100 प्रतिशत तक का भारी आयात शुल्क लगा सकें। विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत पर यह टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय निर्यात क्षेत्र को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

​राष्ट्रपति के पास रहेगा छूट का अधिकार: तुरंत लागू नहीं होंगे टैरिफ 
​विधेयक के पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत या अन्य देशों पर तुरंत प्रभाव से 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो जाएगा। इस कानून के तहत अंतिम फैसला लेने की पूरी शक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति के पास सुरक्षित रखी गई है।

राष्ट्रपति के पास यह अधिकार है कि वे अमेरिकी राष्ट्रीय हित, वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता या द्विपक्षीय वार्ताओं की प्रगति को देखते हुए किसी भी देश को इस टैरिफ से पूर्ण या आंशिक छूट दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि कोई देश अपनी कुल प्राकृतिक गैस खपत का 15 प्रतिशत से कम हिस्सा रूस से लेता है और धीरे-धीरे इस निर्भरता को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो उसे भी राहत मिल सकती है।

​भारतीय-अमेरिकी सांसदों का रुख: राजा कृष्णमूर्ति ने पार्टी लाइन से हटकर किया समर्थन 
​अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस विधेयक पर हुई वोटिंग के दौरान भारतीय-अमेरिकी सांसदों का रुख भी चर्चा का विषय बना रहा। सदन में मौजूद छह भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसदों में से राजा कृष्णमूर्ति एकमात्र ऐसे सांसद रहे जिन्होंने अपनी पार्टी की लाइन से अलग हटकर इस सख्त प्रतिबंध विधेयक के पक्ष में मतदान किया।

दूसरी ओर, अन्य प्रमुख भारतीय-अमेरिकी सांसदों- रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, अमी बेरा, श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम ने अपनी पार्टी के रुख का पालन करते हुए इस विधेयक का विरोध किया या मतदान की प्रक्रिया से दूर रहे।

​रणनीतिक और आर्थिक असर: भारत-अमेरिका संबंधों के लिए नई परीक्षा 
​अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह विधेयक आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों के लिए एक नई परीक्षा साबित हो सकता है। भारत शुरू से ही यह रुख अपनाता रहा है कि अपनी विशाल आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता तेल खरीदना उसका संप्रभु और राष्ट्रीय हित का निर्णय है।

यदि वाशिंगटन भारत पर आर्थिक दबाव या टैरिफ लगाने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इससे पिछले दो दशकों में बने द्विपक्षीय व्यापारिक और सुरक्षा संबंधों में तनाव आ सकता है।

Continue reading on the app

  Sports

PAK vs BAN, Asian Games: पाकिस्तान पहली बार खेलेगा गोल्ड मेडल मैच, मेंस क्रिकेट में बांग्लादेश को 6 विकेट से हराया

पाकिस्तान ने एशियन गेम्स 2026 में मेंस क्रिकेट के पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को हरा दिया है. पाकिस्तान ने बांग्लादेश को 6 विकेट से हराते हुए फाइनल में अपनी जगह पक्की की Thu, 01 Oct 2026 09:12:04 +0530

  Videos
See all

Iran US War Update: ईरान-अमेरिका में भयानक जंग शुरू? | Iran US War Update | Trump | Iran News #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-01T03:45:39+00:00

Antarctica Ice Alert: खत्म हो जाएगा यूरोप? बदल जाएगा दुनिया का मौसम? | Climate Change | Scientific #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-01T03:45:13+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers