Allahabad High Court का निर्देश, पुलिस थानों में 24 घंटे चालू रहने चाहिए CCTV कैमरे
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि पुलिस थानों में सीसीटीवी प्रणाली साल के सभी 365 दिन चौबीसों घंटे चालू रहनी चाहिए और जब यह निगरानी व्यवस्था काम न कर रही हो तो पुलिस को कुछ सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए। उसने कहा कि यदि सीसीटीवी प्रणाली काम नहीं कर रही है तो ऐसी स्थिति में पूछताछ के लिए लाए गए या गिरफ्तार किए गए सभी व्यक्तियों का विवरण तत्काल ‘जनरल डायरी’ (जीडी) में दर्ज किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा, ‘‘इस मामले के तथ्य प्रथम दृष्टया स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि पुलिसकर्मियों ने शिकायतकर्ता की ओर से वसूली एजेंट की तरह काम किया।’’ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने राघवेंद्र दुबे और एक अन्य व्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
पीठ ने केवल पुलिसकर्मियों को गवाह बनाकर तैयार किए गए ‘‘कई खामियों वाले’’ गिरफ्तारी ज्ञापन के कारण याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी रद्द करते हुए उसे रिहा करने और 24 घंटे की अवैध हिरासत के लिए 10,000 रुपये मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि सीसीटीवी प्रणाली विफल होती है तो थाना प्रभारी को जीडी में उसके खराब होने का सटीक समय दर्ज करना होगा और उस अधिकारी का नाम भी लिखना होगा जिसे इसकी जानकारी लिखित रूप में दी गई और जिले के पुलिस अधीक्षक को भी इसकी सूचना देनी होगी ताकि प्रणाली को यथाशीघ्र ठीक कराया जा सके और मरम्मत के लिए उठाए गए कदमों का रिकॉर्ड रखा जा सके। अदालत ने कहा, ‘‘इस मामले का एक और चिंताजनक पहलू, जिस पर इस अदालत को ध्यान देना चाहिए, वह यह है कि बार-बार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें पुलिस थाने के परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की जाती है।’’ पीठ ने कहा कि सीसीटीवी के काम न करने की अवधि में प्रत्येक संदिग्ध के थाने में आने और जाने का समय तथा उससे की गई पूछताछ का विवरण जीडी में दर्ज किया जाना चाहिए।
रिहाई के समय संबंधित व्यक्ति या उसके निकट संबंधी से हस्ताक्षरयुक्त रसीद भी ली जानी चाहिए। अदालत ने 23 सितंबर को दिए अपने आदेश में निर्देश दिया कि पुलिस थानों के भीतर लगी सीसीटीवी प्रणालियां साल के 365 दिन चौबीसों घंटे चालू रहनी चाहिए। याचिकाकर्ता के मुताबिक, रेत खनन समझौते के विवाद की वजह से उसे आसनसोल से अवैध रूप से हिरासत में लेकर चित्रकूट में सरधुवा थाने लाया गया।
राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद गैर-जमानती वारंट जारी होने पर उसे गिरफ्तार किया गया था। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि याचिकाकर्ता ने 13 जुलाई 2026 को सुबह नौ बजे थाने में प्रवेश किया और वह पूर्वाह्न 10 बजकर 19 मिनट पर जांच अधिकारी के साथ शिकायतकर्ता के वाहन में वहां से निकला तथा रात आठ बजकर 24 मिनट पर वापस लौटा। हालांकि गिरफ्तारी ज्ञापन में उसकी गिरफ्तारी अपराह्न साढ़े तीन बजे दिखाई गई और जीडी में उसका हवालात में प्रवेश शाम छह बजकर 41 मिनट पर दर्ज किया गया।
थाने के भीतर लगे तीन कैमरों की सीसीटीवी फुटेज या तो उपलब्ध नहीं थी या उसे मिटा दिया गया था।
Delhi में सबसे गोल-मटोल कुत्ते के खिताब के लिए Gola और Gugu के बीच फाइनल मुकाबला
दिल्ली का सबसे अनोखा चुनाव अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। दो ‘गोल-मटोल’ दावेदारों के समर्थकों ने सोशल मीडिया मंच पर मतदान से आगे बढ़कर कैफे में बने मतदान केंद्रों तक पहुंचकर अपने पसंदीदा कुत्ते को चुनने के लिए कतार लगाई। युवा, बुजुर्ग और इलाके के कुत्तों से प्रेम करने वाले लोगों ने दिवंगत गोला और गूगू के बीच चुनाव में मतदान किया।
‘निर्विवाद गोल-मटोल’ कुत्ता चुनने के लिए ऑफलाइन मतदान वसंत विहार, कमला नगर और पंजाबी बाग के कैफे में आयोजित किया गया। इससे यह पूरी तरह ऑनलाइन चल रही प्रतियोगिता एक सामान्य चुनावी प्रक्रिया जैसी नजर आई। लोगों ने कागजी मतपत्रों पर अपनी पसंद दर्ज की, उंगलियों पर स्याही लगवाई और कुछ मतदाताओं को मतदान के बाद स्टार स्टिकर भी मिले।
अंतिम मुकाबले में दो अलग-अलग स्वभाव वाले कुत्ते उम्मीदवार हैं -हौज खास का दिवंगत गोला, जिसे कबाब या राजपाल सिंह के नाम से भी जाना जाता है, और साकेत का गूगू। गोला की ओर से उसकी मृत्यु के बाद भी मुकाबला जारी है, जबकि गूगू ने बड़ी संख्या में ऑनलाइन समर्थक जुटाकर फाइनल में जगह बनाई है। प्रतियोगिता के दौरान गोला एक खास लोकप्रियता हासिल कर चुका है।
‘फैट डॉग्स ऑफ दिल्ली’ पेज के अनुसार, गोला के समर्थकों ने उसकी मौत के बाद भी उसके लिए प्रचार जारी रखा। उसने 69,638 वोटों से हीरो को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। वहीं, गूगू का सफर भी काफी अनोखा रहा है।
भूरे और सफेद रंग के इस मिश्रित नस्ल के कुत्ते ने शहर के सबसे ‘गोल-मटोल’ कुत्ते के खिताब के लिए मुकाबला करते हुए अपना वजन कम करने पर भी काम किया है। पेज के अनुसार, गूगू ने तारा को 4,873 वोटों से हराकर फाइनल में जगह बनाई, जिससे अंतिम मुकाबला और दिलचस्प हो गया। ‘फैट डॉग्स ऑफ दिल्ली’ पेज पर 64 कुत्तों के साथ सोशल मीडिया से शुरू हुई यह प्रतियोगिता अब एक बड़े अभियान का रूप ले चुकी है।
समर्थकों ने पोस्टर बनाए, रील और मीम साझा किए तथा अपने-अपने इलाकों के कुत्तों के समर्थन में लोगों को जोड़ा। कमला नगर के एक कैफे में यह अभियान सोशल मीडिया मतदान के बजाय एक छोटे सामुदायिक आयोजन जैसा नजर आया। कतारों में ज्यादातर युवा मतदाता थे, लेकिन बुजुर्गों ने भी इसमें हिस्सा लिया, जिससे पता चला कि यह अनोखी प्रतियोगिता पीढ़ियों के अंतर को भी पार कर रही है।
कैफे में मतदान करने वाली श्रेया ने कहा, ‘‘यह माहौल खासा अच्छा है और कुत्तों के बीच चुनाव कराने का विचार बेहद अनोखा है।’’ इस प्रतियोगिता से जुड़ी तनीशा ने कहा कि इस उत्साह ने पशु कल्याण को लेकर एक नयी चर्चा शुरू कर दी है। तनीशा ने कहा, ‘‘यह शानदार है कि जेन-जी पशु कल्याण के समर्थन के लिए इतने अनोखे तरीके खोज रही है।’’ यह प्रतियोगिता 24 सितंबर को शुरू हुई थी, जब ‘फैट डॉग्स ऑफ दिल्ली’ पेज ने लोगों से अपने इलाकों के ‘गोल-मटोल’ कुत्तों को नामांकित करने के लिए कहा था। इसके बाद यह मुकाबला सार्वजनिक मतदान के आधार पर नॉकआउट दौर से गुजरता हुआ बुधवार को ग्रैंड फिनाले तक पहुंचा।
परिणाम बृहस्पतिवार को घोषित किए जाएंगे। एक अन्य मतदाता अमित ने कहा, ‘‘इस चुनाव को खास बनाने वाली बात यह है कि इसने लोगों का ध्यान उन कुत्तों की ओर आकर्षित किया है, जिन्हें वे रोज देखते हैं लेकिन अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। सामुदायिक कुत्ते हमारे इलाकों का हिस्सा हैं और इस तरह का ध्यान उनमें सहानुभूति बढ़ाने और उनकी देखभाल के लिए लोगों को प्रेरित करने में मदद कर सकता है।’’ बुजुर्ग मतदाता रूपा ने कहा कि इस प्रतियोगिता ने गैर सरकारी संगठनों और पशु कल्याण समूहों को लोगों से जुड़ने का नया अवसर भी दिया है।
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