मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स यूनिट में जोरदार धमाका, आग लगने से 8 लोग घायल
मंगलुरु, 30 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मंगलुरु स्थित मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) में बुधवार को जोरदार धमाके के बाद आग लग गई। हालांकि, आग पर काबू पा लिया गया है। पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी ने इसकी जानकारी दी।
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, इस घटना में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
इनमें से एक की पहचान राजेश बैपटिस्ट के रूप में हुई है, जो घटना के समय प्लांट के अंदर मौजूद थे। उनके शरीर का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया है। उन्हें इलाज के लिए श्रीनिवास अस्पताल में भर्ती कराया गया है और फिलहाल वह आईसीयू में हैं। डॉक्टरों ने बताया है कि वह खतरे से बाहर हैं।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पास के एक कार्यालय में मौजूद छह अन्य लोगों को मामूली चोटें आईं। उन्हें इलाज दिया गया और ओपीडी में उनकी जांच की गई।
घटना के बाद पुलिस कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।
पुलिस कमिश्नर ने कहा, ज्यादा चिंता की कोई बात नहीं है। हम स्थिति को संभाल लेंगे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, एमआरपीएल परिसर में जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी। इसके बाद आग की ऊंची लपटें और घना धुआं आसमान में उठता दिखाई दिया। घटना एमआरपीएल के फेज-3 प्लांट की कोकर हाइड्रो ट्रीटिंग यूनिट में हुई।
धमाका इतना तेज था कि आसपास के इलाकों के घरों में कंपन महसूस किया गया। कुछ नजदीकी घरों की खिड़कियों और दरवाजों के शीशे भी टूट गए, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।
घायलों को तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया।
धमाके के बाद यूनिट के बॉयलर सेक्शन में आग लग गई और पूरे इलाके में घना धुआं फैल गया। घटना की जानकारी मिलते ही एमआरपीएल की फायर एंड इमरजेंसी सर्विस के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। शहर से भी दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। बाद में आग को नियंत्रित कर लिया गया।
घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं और बताया जा रहा है कि वे तेजी से वायरल हो रहे हैं। धमाका किस वजह से हुआ और इससे कितना नुकसान हुआ है, इसकी सही जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
जोरदार धमाके के बाद आसमान में धुएं के घने बादल दिखाई दिए, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई।
धमाके का असर एमआरपीएल परिसर से सटे जोकट्टे इलाके में भी महसूस किया गया। बताया गया कि जोकट्टे ग्राम पंचायत कार्यालय और आसपास के घरों के दरवाजे तथा खिड़कियां धमाके के कारण हिलने लगीं। कुछ जगहों पर शीशे भी टूट गए।
--आईएएनएस
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VIDEO: पीपल के पेड़ पर क्यों लगाई जाती है मृतकों की तस्वीर? जानिए काशी की इस परंपरा की मान्यता
Kashi Tradition: पितृ पक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों की शांति और मोक्ष की कामना लेकर वाराणसी के पिशाच मोचन तीर्थ पहुंच रहे हैं. यहां पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा है. मान्यता है कि इस तीर्थ पर किए गए धार्मिक अनुष्ठानों से पितरों को शांति मिलती है.
पिशाच मोचन तीर्थ पर पितृ पक्ष के दौरान नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध, गया पिंडदान और पार्वण श्राद्ध जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु अपने पूर्वजों के नाम से पिंडदान और तर्पण करते हैं. इस दौरान महिलाएं भी पिंडदान और श्राद्ध कर्म में शामिल होती हैं.
अकाल मृत्यु वालों के लिए विशेष अनुष्ठान
पिशाच मोचन तीर्थ की सबसे चर्चित परंपराओं में से एक अकाल मृत्यु को प्राप्त लोगों से जुड़ी है. स्थानीय पुजारियों के मुताबिक, जिन लोगों की असमय मृत्यु हो जाती है, उनके लिए यहां नारायण बलि और त्रिपिंडी श्राद्ध कराया जाता है. इस दौरान पीपल के पेड़ पर मृत व्यक्ति की तस्वीर लगाई जाती है और पेड़ में कील लगाई जाती है. पुजारियों के अनुसार, यह एक धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा है. मान्यता है कि इससे मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है और उसे प्रेत योनि से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. एक स्थानीय पुजारी ने बताया कि अकाल मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति के नाम से त्रिपिंडी श्राद्ध और पूजा कराई जाती है. मृत व्यक्ति की तस्वीर भी पेड़ पर लगाई जाती है. उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया आत्मा की शांति की धार्मिक मान्यता से जुड़ी हुई है.
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