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‘हनुमान अंश 2’ में नहीं बदलेगा ये फॉर्मूला, प्रोड्यूसर ने सीक्वल की शूटिंग और बजट पर दिया बड़ा अपडेट

Hanuman Ansh 2 budget shooting and Story update details: 2 करोड़ में बनी 'हनुमान अंश' ने 400 करोड़ कमाए हैं। अब मेकर्स 'हनुमान अंश 2' की तैयारी कर रहे हैं। जानें सीक्वल पार्ट की डिटेल।

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Shaurya Path: 1 या 2 नहीं, Indian Navy इस साल समुद्र में उतार रही 18 Warships, भारत की नौसैनिक शक्ति में बड़े इजाफे ने पलट दिये पुराने समीकरण

वर्ष 2026 भारतीय नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण साल साबित हो रहा है। यह सिर्फ नए युद्धपोतों को नौसेना में शामिल करने का साल नहीं, बल्कि समुद्र में भारत की बढ़ती ताकत और बदलती रणनीति का साल है। आज भारतीय नौसेना हिंद महासागर से लेकर दक्षिण चीन सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा से लेकर समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा तक, नौसेना की भूमिका लगातार बढ़ी है। खासतौर पर ऐसे समय में जब समुद्र में चीन की सक्रियता और ग्रे-जोन जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब भारत ने भी अपनी नौसैनिक शक्ति को तेज गति से मजबूत करना शुरू कर दिया है।

2026 में 18 युद्धपोतों को नौसेना में शामिल करने की योजना इसी बदलती तस्वीर का सबसे बड़ा संकेत है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारतीय नौसेना के इतिहास में एक वर्ष में होने वाली सबसे बड़ी सैन्य वृद्धि बताया है। यानी समुद्र में भारत की मौजूदगी अब धीरे-धीरे नहीं, बल्कि एक संगठित और तेज गति से बढ़ रही है। इन जहाजों में अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों के साथ विशेष भूमिका वाले पोत भी शामिल हैं। यह विस्तार स्वदेशी पोत निर्माण क्षमता के बढ़ते पैमाने का भी संकेत है।

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देखा जाये तो इस बदलाव का असली महत्व संख्या से कहीं बड़ा है। भारत का लक्ष्य 2035 तक 200 से अधिक युद्धपोतों वाली नौसेना तैयार करना है। हाल में कमीशन किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होने की बात रक्षा मंत्री ने कही। इसका सीधा रणनीतिक अर्थ है कि युद्ध के समय भारत की समुद्री शक्ति विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर कम निर्भर रहेगी और संकट की स्थिति में हथियारों तथा युद्धपोतों की उपलब्धता को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकेगा।

यही वह बिंदु है जहां भारतीय नौसेना का परिवर्तन केवल सैन्य आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता में बदलता दिखाई देता है। भारत अब केवल अपने लिए युद्धपोत बनाने की दिशा में नहीं देख रहा, बल्कि मित्र देशों को युद्धपोत निर्यात करने की महत्वाकांक्षा भी सामने रख रहा है। इससे समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ भारत के रक्षा उद्योग और हिंद महासागर क्षेत्र में उसके रणनीतिक प्रभाव का दायरा बढ़ सकता है।

लेकिन समुद्र का नया युद्ध केवल मिसाइलों और तोपों से नहीं लड़ा जाता। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कौन देख रहा है, कौन पहचान रहा है और कौन सबसे पहले प्रतिक्रिया दे रहा है। रक्षा मंत्री ने समुद्री क्षेत्र में बढ़ती भीड़, छल, भ्रामक गतिविधियों और ग्रे-जोन गतिविधियों को गंभीर चुनौती बताया है। हम आपको बता दें कि ग्रे-जोन रणनीति में प्रत्यक्ष युद्ध की सीमा पार किए बिना दबाव, भ्रम और आक्रामक गतिविधियों के जरिए रणनीतिक लक्ष्य हासिल करने की कोशिश की जाती है। ऐसे माहौल में भारत के लिए समुद्री निगरानी तंत्र को केवल बड़ा नहीं, बल्कि अधिक तेज, अधिक बुद्धिमान और अधिक विश्लेषणात्मक बनाना जरूरी हो जाता है।

यहीं भारतीय नौसेना की अगली लड़ाई शुरू होती है। समुद्र में जहाजों की बढ़ती आवाजाही, संदिग्ध गतिविधियां और बदलती तकनीक के बीच केवल निगरानी पर्याप्त नहीं होगी। निगरानी से प्राप्त सूचनाओं का तत्काल विश्लेषण और उसके आधार पर तेज प्रतिक्रिया निर्णायक होगी। इसलिए समुद्री निगरानी ढांचे को उन्नत करने पर दिया गया जोर भविष्य की समुद्री सुरक्षा का महत्वपूर्ण संकेत है। नौसेना के 2026 के सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बड़े आंकड़ों के विश्लेषण, स्वायत्त प्रणालियों और साइबर अभियानों जैसी क्षमताओं को भी व्यापक तैयारी का हिस्सा बनाया गया है।

देखा जाये तो भारत की बढ़ती नौसैनिक ताकत का दूसरा बड़ा पहलू उसकी नीली जल क्षमता है। भारतीय युद्धपोतों की मौजूदगी दक्षिण चीन सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक तक दर्ज की गई है। इसका अर्थ यह है कि भारतीय नौसेना का परिचालन क्षेत्र भारतीय तटों से बहुत आगे निकल चुका है। रक्षा मंत्री के अनुसार यह उपस्थिति भारत की रणनीतिक गहराई और क्षेत्रीय शक्ति-प्रक्षेपण की क्षमता को दर्शाती है।

इसका सबसे संवेदनशील आयाम हिंद महासागर क्षेत्र है, जहां चीन अपनी समुद्री पहुंच और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे वातावरण में भारत की लगातार और विश्वसनीय नौसैनिक मौजूदगी क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन का महत्वपूर्ण तत्व बनती है। भारत स्वयं को इस क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। यानी संकट आने के बाद प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति की बजाय संकट को नियंत्रित करने की क्षमता रखने वाली समुद्री शक्ति बनने की दिशा में भारत आगे बढ़ रहा है।

ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा इस बदलाव का बेहद ठोस उदाहरण है। पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारतीय नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों, विशेषकर एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में भूमिका निभाई। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 85 से 90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का करीब 50 प्रतिशत समुद्री मार्गों से आयात करता है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सीधे भारत की ऊर्जा आपूर्ति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और रक्षा तैयारियों से जुड़ी है।

यानी समुद्र में भारतीय युद्धपोत केवल दुश्मन के युद्धपोतों पर नजर रखने के लिए नहीं हैं। वे भारत की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा की सुरक्षा भी कर रहे हैं। समुद्री मार्ग बाधित होते हैं तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, ऊर्जा प्रभावित होती है तो उद्योग और परिवहन पर असर पड़ता है और अंततः इसका प्रभाव राष्ट्रीय सुरक्षा तक पहुंचता है।

भारत की समुद्री शक्ति अब सैन्य कूटनीति का भी साधन बन रही है। भारतीय नौसेना ने संयुक्त समुद्री बलों के अंतर्गत संयुक्त कार्य बल-154 की कमान संभाली। इसके दौरान कोच्चि में आयोजित ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस में 27 देशों के 276 कर्मियों, 76 प्रशिक्षकों और विषय विशेषज्ञों तथा चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी हुई। यह भारत की बढ़ती बहुपक्षीय समुद्री भूमिका का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

साथ ही आईएनएस सुदर्शिनी की लोकयान-26 तैनाती ने भी समुद्री कूटनीति को मजबूती दी। अमेरिका, अटलांटिक और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी ने भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़ाव के साथ भारत की समुद्री विरासत और नौसैनिक पहुंच को प्रदर्शित किया। इसी तरह नौसेना में महिलाओं की अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों, नौसैनिक विमानों और समुद्री अभियानों में बढ़ती भागीदारी भी बदलती नौसैनिक संरचना का हिस्सा है।

इस पूरे परिवर्तन का सामरिक निष्कर्ष स्पष्ट है कि भारत समुद्र में केवल अपनी रक्षा करने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि अपनी समुद्री सुरक्षा के आसपास एक व्यापक सुरक्षा व्यवस्था खड़ी कर रहा है। 2026 में 18 युद्धपोतों की प्रस्तावित वृद्धि, 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री, लंबी दूरी तक नौसैनिक तैनाती, ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा, बहुराष्ट्रीय समुद्री अभियानों में नेतृत्व और निगरानी तंत्र के आधुनिकीकरण का मेल भारत की समुद्री शक्ति को अधिक व्यापक बनाता है।

देखा जाए तो भारतीय नौसेना की तेजी से बढ़ती ताकत ने हिंद महासागर में शक्ति का पूरा समीकरण बदलने का संदेश दे दिया है। समुद्र में लगातार बढ़ती भारतीय मौजूदगी अब उन ताकतों के लिए सीधी चुनौती है, जो इस क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। युद्धपोतों की बढ़ती संख्या, दूर-दराज के समुद्री इलाकों तक पहुंच और संकट के समय तुरंत कार्रवाई की क्षमता ने भारत की समुद्री शक्ति को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना दिया है। संदेश साफ है कि हिंद महासागर अब किसी एक ताकत की मनमानी का मैदान नहीं है। भारतीय नौसेना जितनी मजबूत और आक्रामक तैयारी के साथ समुद्र में मौजूद रहेगी, भारत के समुद्री हितों को चुनौती देने वालों के लिए जोखिम उतना ही बढ़ेगा। यही बढ़ती नौसैनिक ताकत विरोधी शक्तियों के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक दबाव है और यही वह शक्ति है, जिसकी मौजूदगी से समुद्र में भारत के खिलाफ किसी भी दुस्साहस की कीमत बेहद भारी हो सकती है।

बहरहाल, तिरंगा अब समुद्र में केवल पहचान का प्रतीक नहीं रह गया है। भारतीय रणनीतिक दृष्टिकोण के अनुसार जहां तिरंगा दिखाई दे, वहां सुरक्षा, भरोसा और विश्वास का संदेश भी दिखाई देना चाहिए। सुरक्षित समुद्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित करते हैं, ऊर्जा सुरक्षा आर्थिक शक्ति को और आर्थिक शक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती है। इसी श्रृंखला में भारतीय नौसेना अब विकसित भारत की समुद्री रीढ़ के रूप में उभर रही है।

-नीरज कुमार दुबे

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  Sports

ODI में 12000 रन बनाने वाले तीसरे भारतीय बने Rohit Sharma, Guwahati में बना रिकॉर्ड

गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे एकदिवसीय मुकाबले में रोहित शर्मा ने अपने लंबे करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है। उन्होंने 12,000 रन पूरे कर वनडे क्रिकेट के खास क्लब में जगह बनाई है। वहीं, वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 405 रन बनाकर भारत के सामने 406 रन का बड़ा लक्ष्य रखा है।

रोहित ने यह आंकड़ा भारत की पारी के 16वें ओवर में रॉस्टन चेज की गेंद पर 1 रन लेकर हासिल किया है। इसके साथ ही वह पुरुष वनडे क्रिकेट में 12,000 रन बनाने वाले दुनिया के 7वें बल्लेबाज बन गए हैं। भारत की ओर से उनसे पहले सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली ही इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

इस खास सूची में रोहित के अलावा सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, रिकी पोंटिंग, कुमार संगकारा, सनथ जयसूर्या और महेला जयवर्धने शामिल हैं। रोहित ने 12,000 रन तक पहुंचने के लिए 282 पारियां खेली हैं। इस मामले में वह विराट कोहली के बाद दूसरे सबसे तेज बल्लेबाज हैं। कोहली ने 242 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी, जबकि सचिन तेंदुलकर को 300 पारियां लगी थीं।

गेंदों के हिसाब से भी रोहित दूसरे सबसे तेज बल्लेबाज हैं। उन्होंने 12,000 रन पूरे करने के लिए 12,973 गेंदों का सामना किया है। विराट कोहली ने 12,853 गेंदों में यह आंकड़ा छुआ था। रोहित ने 2007 में अपना एकदिवसीय करियर शुरू किया था और अब तक 290 मुकाबलों में 35 शतक तथा 62 अर्धशतक लगाए हैं।

बता दें कि रोहित के नाम वनडे क्रिकेट में कई बड़ी उपलब्धियां हैं। 2014 में श्रीलंका के खिलाफ कोलकाता में खेली गई उनकी नाबाद 264 रन की पारी आज भी पुरुष वनडे क्रिकेट की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी है। वह इस प्रारूप में 3 दोहरे शतक लगाने वाले इकलौते बल्लेबाज भी हैं।

इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भी बल्लेबाजी में नया रिकॉर्ड बनाया है। पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने के बाद टीम ने 50 ओवर में 405 रन बनाए हैं। जॉन कैंपबेल, शाई होप और आमिर जांगू ने शतक लगाकर टीम को पहली बार एकदिवसीय पारी में 3 शतक लगाने की उपलब्धि दिलाई है।

कैंपबेल ने बेहद तेज शुरुआत की और 65 गेंदों में अपना शतक पूरा किया है। उन्होंने 68 गेंदों में 101 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 5 छक्के शामिल हैं। इसके बाद कप्तान शाई होप ने पारी को संभाला और 94 गेंदों में 104 रन बनाए हैं। उन्हें 27 रन के निजी स्कोर पर विराट कोहली ने शॉर्ट मिडविकेट पर कैच छोड़कर जीवनदान दिया था।

होप ने इस मौके का फायदा उठाते हुए 8 चौके और 3 छक्के लगाए हैं। वहीं आमिर जांगू ने 69 गेंदों में अपना दूसरा वनडे शतक पूरा किया है। उन्होंने 83 गेंदों पर 114 रन की पारी खेली है, जिसमें 13 चौके और 3 छक्के शामिल हैं।

गौरतलब है कि वेस्टइंडीज का 405 रन का स्कोर पुरुष वनडे क्रिकेट में उसका अब तक का सबसे बड़ा स्कोर भी बन गया है। इससे पहले उसका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 2019 में इंग्लैंड के खिलाफ 389 रन था। ऐसे में भारत के सामने 406 रन का लक्ष्य है और रोहित शर्मा की 12,000 रन वाली उपलब्धि के साथ मुकाबले में भारत की शुरुआत भी खास रही है।

Wed, 30 Sep 2026 22:17:00 +0530

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