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गेहूं की MSP पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, इतने रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा समर्थन मूल्य

Wheat MSP: रबी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने 2027-28 मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए गेहूं के नए MSP की घोषणा की.

केंद्र सरकार ने 2027-28 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने का फैसला किया है. गेहूं की MSP में ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. इसके बाद अब किसानों को गेहूं के लिए ₹2,610 प्रति क्विंटल MSP मिलेगी. इससे पहले 2026-27 के रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं की MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल थी. सरकार का कहना है कि MSP बढ़ाने का मकसद किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना और उत्पादन लागत के मुकाबले पर्याप्त मार्जिन सुनिश्चित करना है.

लागत से दोगुनी MSP का दावा

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, गेहूं की उत्पादन लागत करीब ₹1,264 प्रति क्विंटल आती है. सरकार ने 2027-28 के लिए गेहूं की MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल तय की है. यानी नई MSP उत्पादन लागत से दो गुने से अधिक है. गेहूं देश में उगाई जाने वाली प्रमुख रबी फसलों में शामिल है. इसकी बुवाई का सीजन आमतौर पर अक्टूबर से शुरू होता है, जबकि फसल की कटाई अप्रैल से शुरू होती है. ऐसे में बुवाई के सीजन से पहले MSP में बढ़ोतरी का फैसला किसानों के लिए अहम है.

गेहूं के साथ इन रबी फसलों की MSP भी बढ़ी

केंद्र सरकार ने 2027-28 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं के अलावा जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम की MSP में भी बढ़ोतरी की है. अलग-अलग फसलों के लिए बढ़ी हुई MSP इस प्रकार है:

  • जौ: ₹2,150 से बढ़कर ₹2,286 प्रति क्विंटल
  • चना: ₹5,875 से बढ़कर ₹5,958 प्रति क्विंटल
  • मसूर: ₹7,000 से बढ़कर ₹7,390 प्रति क्विंटल
  • सरसों: ₹6,200 से बढ़कर ₹6,613 प्रति क्विंटल
  • कुसुम: ₹6,540 से बढ़कर ₹7,215 प्रति क्विंटल

इस फैसले के तहत सरकार ने कुल छह प्रमुख रबी फसलों की MSP में संशोधन किया है.

रबी फसलों की खरीद पर ₹90,962 करोड़ खर्च करेगी सरकार

केंद्र सरकार के अनुमान के मुताबिक, 2027-28 के मार्केटिंग सीजन में करीब 324 लाख टन रबी फसलों की खरीद की जाएगी. इसके लिए किसानों को कुल करीब ₹90,962 करोड़ का भुगतान किए जाने का अनुमान है. सरकार ने MSP तय करने में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों को आधार बनाया है. MSP तय करते समय फसलों की उत्पादन लागत के अलावा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के रुझान तथा मौसम से जुड़े जोखिमों को भी ध्यान में रखा गया है.

 

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कैबिनेट ने बीईएसएस के साथ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दी

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III (जीईसी-III) योजना को मंजूरी दे दी है। यह पहल भारत के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (आईएनएसटीएस) को मजबूत करेगी, जिससे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 135 गीगावाट तक की रिन्यूएबल एनर्जी को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना संभव हो सकेगा।

आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह योजना ग्रिड की फ्लेक्सिबिलिटी सुनिश्चित करने, रुक-रुक कर होने वाली आपूर्ति, कंजेशन, पीक-आवर में कटौती जैसी समस्याओं से निपटने और सौर ऊर्जा उपलब्ध न होने के समय में मांग को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर/उत्पादक स्तर या अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर 50 गीगावाट-घंटा के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की स्थापना का प्रावधान भी करती है।

यह योजना भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर ग्रिड इंटीग्रेशन और पावर इवैक्यूएशन को सुगम बनाएगी।

बयान में आगे कहा कि इस योजना के वित्तीय वर्ष 2032-33 तक स्थापित किए जाने का लक्ष्य है, जिसकी कुल परियोजना लागत 1,86,405 करोड़ रुपए है। इसमें जीईसी-III के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (आईएनएसटीएस) के विकास के लिए 1,36,378 करोड़ रुपए और 50 गीगावाट-घंटा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के लिए 50,000 करोड़ रुपए शामिल हैं। इस योजना में कुल 54,082 करोड़ रुपए की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है।

केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) से इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज को कम करने में मदद करेगी और बिजली की लागत को नियंत्रण में रखेगी। इस प्रकार, सरकार की यह मदद अंततः अंतिम उपभोक्ताओं यानी भारत के नागरिकों को लाभान्वित करेगी।

आईएनएसटीएस कंपोनेंट के अंतर्गत आने वाली सभी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा, जबकि ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन और नेटवर्क मजबूत करने के कार्य कॉस्ट प्लस बेसिस (सीपीबी) के तहत निष्पादित किए जाएंगे। स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज समग्र कार्यान्वयन एजेंसी होंगी और ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर्स (टीएसपी) बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेनटेन (बीओओएम) मॉडल पर टीबीसीबी के तहत भाग लेंगे।

यह योजना 2035 तक 900 गीगावॉट स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। यह योजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में भी योगदान देगी और कार्बन फुटप्रिंट को कम करके पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देगी। इससे ऊर्जा क्षेत्र, विनिर्माण और निर्माण उद्योगों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के मैन्युफैक्चरिंग और उसके उपयोग से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, यह योजना भाग लेने वाले राज्यों में संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन के क्षेत्र में दीर्घकालिक कुशल रोजगार का सृजन करेगी।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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