प्लेन क्रैश करने जा रहा था पायलट, कॉकपिट में खून-खराबा; इजरायल वाली फ्लाइट में क्या हुआ?
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में पायलटों के बीच कथित झड़प के बाद हड़कंप मच गया। विमान में हाईजैक कोड एक्टिव हुआ और इजरायल ने फाइटर जेट भेजे। फ्लाइट को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। जानें पूरा मामला।
शिक्षानेक्स्ट ने 11 एडटेक और एआई समाधान किए पेश, बच्चों की पढ़ाई बेहतर बनाने में मिलेगी मदद
देशभर में बच्चों के सीखने के परिणाम बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई तीन वर्षीय, 170 करोड़ रुपये की बहु-दाता पहल शिक्षानेक्स्ट ने अपने अगले चरण की घोषणा की है। पहल के तहत एडटेक स्केलएक्स और एडटेक एक्सेलेरेटर कार्यक्रमों में कुल 11 एडटेक और AI समाधानों का चयन किया गया है।
शिक्षानेक्स्ट का उद्देश्य प्रमाण-आधारित और उभरते एडटेक व AI समाधानों को कक्षाओं और राज्य सरकारों की शिक्षा प्रणालियों के करीब लाना है। पहल के तहत वर्ष 2029 तक ऐसे समाधानों को विकसित करने, परखने और बड़े स्तर पर लागू करने पर काम किया जाएगा।
शिक्षानेक्स्ट की स्थापना माइकल एंड सुसन डेल फाउंडेशन, रिलायंस फाउंडेशन और गेट्स फाउंडेशन ने फाउंडिंग स्ट्रेटेजिक पार्टनर्स के रूप में की है। सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (CSF) इसकी मैनेजिंग पार्टनर है, जबकि एंथ्रोपिक को सपोर्टिंग पार्टनर के तौर पर जोड़ा गया है।
तीन स्तंभों के जरिए आगे बढ़ेगा मॉडल
शिक्षानेक्स्ट की पहल तीन आपस में जुड़े स्तंभों पर आधारित है। इसका उद्देश्य एडटेक इनोवेशन की अलग-अलग अवस्थाओं को एक ही ढांचे के तहत आगे बढ़ाना है।
एडटेक स्केलएक्स के तहत पहले से प्रभावी साबित हो चुके समाधानों को सरकारी शिक्षा प्रणालियों तक पहुंचाने और उनके बड़े स्तर पर इस्तेमाल को सक्षम बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
एडटेक एक्सेलेरेटर ऐसे समाधानों पर केंद्रित है जो अभी निर्माण, परीक्षण और सुधार के चरण में हैं। इसका उद्देश्य इन नवाचारों के लिए प्रमाण और क्षमता तैयार करना है, ताकि भविष्य में इन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
वहीं एडटेक एंड AI इनोवेशन हब उन समस्याओं पर काम करेगा, जिनके समाधान के लिए नई तकनीक और AI आधारित शिक्षा समाधानों की अगली पीढ़ी विकसित की जा सकती है।
इन तीनों स्तंभों के केंद्र में प्रमाण-निर्माण को रखा गया है। इसमें केवल किसी तकनीक के प्रभावी होने की जांच ही नहीं, बल्कि यह समझना भी शामिल है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में उसका प्रदर्शन कैसा रहता है और छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों के लिए उसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए किन परिस्थितियों की जरूरत होगी।
पांच समाधान बड़े स्तर पर होंगे लागू
एडटेक स्केलएक्स के तहत 4 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए काम करने वाले पांच समाधानों का चयन किया गया है। इनमें चिंपल, रॉकेट लर्निंग, टॉप पैरेंट, प्रकाशक और यूथ इम्पैक्ट शामिल हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इन समाधानों के प्रभाव का आकलन अलग-अलग अध्ययनों और शोध के माध्यम से किया जा चुका है। अब इनका इस्तेमाल बड़े स्तर पर सरकारी शिक्षा प्रणालियों के साथ किए जाने की तैयारी है।
इन पांच समाधानों के जरिए 80 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों तक पहुंचने और बड़े स्तर पर बच्चों के सीखने के परिणाम बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
छह नए AI समाधानों पर होगा काम
एडटेक एक्सेलेरेटर के तहत भी 4 से 10 वर्ष के बच्चों के लिए छह समाधानों का चयन किया गया है। इनमें डार्सेल, ईडी, तारा ओआरएफ, पढ़ाई, वोपा और वल्लमएआई शामिल हैं।
इन समाधानों में AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल बच्चों की गणित और भाषा की पढ़ाई, आकलन, उपचारात्मक शिक्षा और शिक्षकों की सहायता जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
इन छह समाधानों का फोकस फिलहाल प्रमाण और क्षमता निर्माण पर रहेगा। इसका उद्देश्य ऐसे शुरुआती नवाचारों को विकसित और परखना है, जिन्हें आगे चलकर बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
AI का इस्तेमाल शिक्षकों की जगह लेने के बजाय मदद के लिए
गेट्स फाउंडेशन में ग्लोबल एजुकेशन के निदेशक बेंजामिन पाइपर ने कहा कि एडटेक एक्सेलेरेटर में शामिल समाधान यह दिखाते हैं कि जनरेटिव AI की क्षमता अच्छी शिक्षण पद्धतियों की जगह लेने में नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत करने में है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर कम संसाधनों वाली कक्षाओं के लिए तैयार किए गए तकनीकी साधन इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
उनके मुताबिक स्केलएक्स के प्रमाण-आधारित समाधानों के साथ एक्सेलेरेटर को जोड़ने से शिक्षानेक्स्ट के पास ऐसे समाधानों की श्रृंखला तैयार होती है, जो वर्तमान में प्रभावी साबित हो चुके तकनीकों से लेकर भविष्य में प्रभावी साबित हो सकने वाले नवाचारों तक फैली है।
'तकनीक तभी मायने रखती है, जब बच्चों को बेहतर सीखने में मदद मिले'
माइकल एंड सुसन डेल फाउंडेशन की भारत प्रमुख प्राची जैन विंडलास ने कहा कि तकनीक तभी मायने रखती है, जब वह बच्चों को बेहतर तरीके से सीखने और आगे के अवसरों तक पहुंचने में मदद करे। उनके अनुसार सही इस्तेमाल के साथ तकनीक और डेटा शिक्षकों को बच्चों की प्रगति समझने और जरूरत के समय मदद करने में सक्षम बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षानेक्स्ट प्रमाण, नवाचार और सरकारी स्तर पर अपनाए जाने को एक साथ लाता है, ताकि परखे हुए एडटेक समाधानों का लाभ अधिक बच्चों तक पहुंच सके और AI आधारित समाधानों को जिम्मेदारी के साथ विकसित व परखा जा सके।
'सरकार, शिक्षक और नवाचार करने वालों की साझेदारी जरूरी'
रिलायंस फाउंडेशन के एग्जीक्यूटिव लीड बी. श्रीनिवासन ने कहा कि फाउंडेशन का लक्ष्य देश के हर बच्चे को अपनी क्षमता विकसित करने और अपने सपने पूरे करने का अवसर देना है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी और 5G के विस्तार ने देश के अलग-अलग हिस्सों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की नई संभावनाएं खोली हैं। उनके अनुसार जब परोपकारी संस्थाएं, सरकार, शिक्षक और नवाचार करने वाले साझा उद्देश्य के साथ काम करते हैं, तो शिक्षा में तकनीक को प्रयोग के स्तर से आगे ले जाकर बड़े स्तर पर सीखने के परिणामों से जोड़ा जा सकता है।
11 समाधानों से नई एडटेक श्रृंखला तैयार करने का लक्ष्य
सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इश्मीत सिंह ने कहा कि चुने गए 11 समाधानों में पांच स्वतंत्र अध्ययनों से समर्थित हैं और सरकारों के साथ बड़े स्तर पर काम करने के लिए तैयार हैं। वहीं छह अन्य समाधान भारत की कक्षाओं के लिए AI आधारित नई तकनीकों को विकसित और परखने पर केंद्रित हैं।
उनके अनुसार यह पहल शुरुआती चरण के नवाचारों को राज्य स्तर पर संस्थागत रूप से अपनाए जाने और शासन व्यवस्था में शामिल किए जाने तक पहुंचाने का रास्ता तैयार करती है।
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