मर्दानी के पहले दो पार्ट्स से कई ज्यादा खतरनाक होने वाली है 'Mardaani 3', इस बार महिला विलेन से भिड़ेगी रानी मुखर्जी
Mardaani 3: रानी मुखर्जी (Rani Mukerji) एक बार फिर अपनी सुपरहिट फ्रेंचाइजी मर्दानी के तीसरे पार्ट के साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं. मर्दानी 3 का ट्रेलर रिलीज होते ही लोगों के बीच जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है. 3 मिनट 16 सेकेंड का ये ट्रेलर इतना खतरनाक है कि देखते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. रानी एक बार फिर निडर पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवजी रॉय के रोल में नजर आएंगी. इस बार कहानी पहले दोनों पार्ट्स से ज्यादा गंभीर और डरावनी लग रही है. ट्रेलर की शुरुआत एक मासूम बच्ची के किडनैप से होती है. जिसके बाद पता चलता है कि शहर में लगातार बच्चियों का अपहरण हो रहा है. इस केस को सुलझाने की जिम्मेदारी शिवानी को दी जाती है और यहां से शुरू होती है कहानी.
रानी मुखर्जी की महिला विलेन से होगी लड़ाई
जांच के दौरान सामने आता है कि पिछले तीन महीनों में 93 बच्चियों को अगवा किया जा चूका है और इन सभी अपराधों के पीछे एक रहस्यमयी और खतरनाक महिला 'अम्मा' है. खास बात ये है कि मर्दानी फ्रेंचाइजी में ये पहली बार होगा जब रानी मुखर्जी किसी महिला विलेन से आमने-सामने होंगी. 'अम्मा' का किरदार इतना डरावना दिखाया गया है कि वो किसी बुरे सपने से काम नहीं लगती. ट्रेलर में ये साफ नहीं बताया गया कि वो बच्चियों के साथ क्या करती है, लेकिन जो इशारे दिखाए गए हैं वो दिल दहला देने वाले हैं. इस बार शिवानी की लड़ाई सिर्फ अपराधियों से नहीं, बल्कि एक पूरे सिस्टम से है.
पार्ट 3 की रनटाइम है सबसे ज्यादा
मर्दानी 3 (Mardaani 3) सिर्फ कहानी में ही नहीं, बल्कि लंबाई में भी अपने पिछले दोनों पार्ट्स से बड़ी है. सेंसर बोर्ड ने फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट दिया है और इसका रनटाइम 2 घंटे 10 मिनट 36 सेकेंड बताया गया है. ये फ्रेंचाइजी की अब तक की सबसे लंबी फिल्म होगी. पहले पार्ट का रनटाइम 1 घंटे 53 मिनट और दूसरे पार्ट का 1 घंटे 43 मिनट था. फिल्म को अभिराज मीनावाला ने डायरेक्टर किया है और इसमें जानकी बोड़ीवाला व मल्लिका प्रसाद भी अहम रोल में नजर आएंगी. यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी मर्दानी 3 30 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. ट्रेलर देखकर इतना तय है कि ये फिल्म पहले दोनों पार्ट्स से कहीं ज्यादा खतरनाक और दमदार होने वाली है.
ये भी पढ़ें: अपने देश में थी फिल्म बैन, तो इंडिया आ कर देखी 'बॉर्डर 2', वायरल हुआ धर्मेंद्र-सनी के जबरा फैन का वीडियो
पाकिस्तान की जेलों से लौटे अफगानों ने बताई यातना की दास्तान, रिपोर्ट में गंभीर आरोप
नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की जेलों से वापस भेजे गए अफगान नागरिकों ने हिरासत के दौरान अमानवीय व्यवहार, उत्पीड़न और दमन के चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। काबुल से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, कई अफगानों ने दावा किया है कि उन्हें बिना किसी ठोस कारण के जेल में बंद किया गया।
अफगानिस्तान के समाचार चैनल टोलो न्यूज ने मंगलवार को बताया कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी, हिरासत और जबरन निर्वासन की प्रक्रिया तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह पाकिस्तानी जेलों से रिहा किए गए 500 से अधिक अफगान नागरिकों को कंधार प्रांत के स्पिन बोलदक सीमा बिंदु पर अफगान अधिकारियों को सौंपा गया।
स्पिन बोलदक, अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में स्थित है और पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के चमन से सटा हुआ है। यह इलाका कभी व्यापार और आवागमन का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन पिछले वर्ष अक्टूबर में हुई भीषण गोलीबारी के बाद से यह सीमा अधिकतर बंद है और केवल दोनों देशों की सहमति से ही सीमित आवाजाही हो रही है।
टोलो न्यूज की एक पूर्व रिपोर्ट में कहा गया था, “पाकिस्तान से हाल ही में लौटे अफगानों ने बताया है कि पाकिस्तानी पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें कठोर और अमानवीय जेल परिस्थितियों में रखा गया।”
स्पिन बोलदक के रास्ते अपने परिवार के साथ निर्वासित किए गए अख्तर मोहम्मद होतक ने बताया कि बलूचिस्तान में कैद किए जाने के बाद उन्हें चमन में रखा गया, जहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
अख्तर मोहम्मद होतक ने कहा, “हमें अभी तक कुछ भी खाने को नहीं मिला। न पानी दिया गया, न चाय। कोई बुनियादी सुविधा नहीं थी। एक ही कमरे में 100 लोगों को ठूंस दिया गया।”
एक अन्य रिहा किए गए कैदी अब्दुल सत्तार ने दावा किया कि उनके पास वैध पहचान दस्तावेज होने के बावजूद उन्हें जेल में डाल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ पकड़े गए एक अन्य व्यक्ति, जिसके पास कोई कागजात नहीं थे, को 45,000 पाकिस्तानी रुपये देने के बाद छोड़ दिया गया।
उन्होंने कहा, “अगर पैसे दो तो छोड़ देते हैं, नहीं तो वापस भेज देते हैं।”
हालिया रिहाई में शामिल एक अन्य कैदी मोहम्मद ने बताया कि उन्हें काम पर जाते समय गिरफ्तार कर लिया गया और कराची के एक शरणार्थी शिविर में ले जाया गया।
उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझसे पूछा मैं कहां का हूं। मैंने कहा कि मैं अफगान हूं। बस इतना कहना ही काफी था। उन्होंने मुझे इतना पीटा कि आज भी कंधे में दर्द है। मेरा एकमात्र अपराध अफगान होना था।”
एक अन्य लौटे व्यक्ति ने आरोप लगाया, “वहां किसी ने हमारी इज्जत नहीं की। हमारी मांओं और बहनों को भी अपमान की नजर से देखा गया।”
करीब दो सप्ताह तक पाकिस्तानी जेल में रहने वाले दोस्त मोहम्मद नामक एक पूर्व कैदी ने बताया कि पुलिस का व्यवहार इतना क्रूर था कि कई बार अफगान कैदियों को रात में सोने तक नहीं दिया जाता था।
उन्होंने कहा, “उन्होंने ऐसी क्रूरता की, जिसे यहां मौजूद हर किसी ने देखा। हम सभी खड़े थे, महिलाएं जमीन पर पड़ी थीं। हर व्यक्ति को आधी रोटी दी जाती थी। हालात बेहद भयावह थे।”
उन्होंने दावा किया कि उनकी यातनाओं का वीडियो भी बनाया गया और जिस तरह की क्रूरता उनके साथ हुई, उसकी उन्होंने कभी कल्पना तक नहीं की थी।
टोलो न्यूज से बात करने वाले विश्लेषकों ने मानवीय संगठनों से अपील की है कि वे आगे आकर पड़ोसी देशों में अफगान शरणार्थियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को रोकें। एक विश्लेषक के हवाले से कहा गया कि ईरान, पाकिस्तान या किसी अन्य देश में अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी, कैद और निर्वासन अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है और वैश्विक समुदाय को इसे रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















