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पाकिस्तान की जेलों से लौटे अफगानों ने बताई यातना की दास्तान, रिपोर्ट में गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की जेलों से वापस भेजे गए अफगान नागरिकों ने हिरासत के दौरान अमानवीय व्यवहार, उत्पीड़न और दमन के चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। काबुल से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, कई अफगानों ने दावा किया है कि उन्हें बिना किसी ठोस कारण के जेल में बंद किया गया।

अफगानिस्तान के समाचार चैनल टोलो न्यूज ने मंगलवार को बताया कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी, हिरासत और जबरन निर्वासन की प्रक्रिया तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह पाकिस्तानी जेलों से रिहा किए गए 500 से अधिक अफगान नागरिकों को कंधार प्रांत के स्पिन बोलदक सीमा बिंदु पर अफगान अधिकारियों को सौंपा गया।

स्पिन बोलदक, अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में स्थित है और पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के चमन से सटा हुआ है। यह इलाका कभी व्यापार और आवागमन का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन पिछले वर्ष अक्टूबर में हुई भीषण गोलीबारी के बाद से यह सीमा अधिकतर बंद है और केवल दोनों देशों की सहमति से ही सीमित आवाजाही हो रही है।

टोलो न्यूज की एक पूर्व रिपोर्ट में कहा गया था, “पाकिस्तान से हाल ही में लौटे अफगानों ने बताया है कि पाकिस्तानी पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें कठोर और अमानवीय जेल परिस्थितियों में रखा गया।”

स्पिन बोलदक के रास्ते अपने परिवार के साथ निर्वासित किए गए अख्तर मोहम्मद होतक ने बताया कि बलूचिस्तान में कैद किए जाने के बाद उन्हें चमन में रखा गया, जहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

अख्तर मोहम्मद होतक ने कहा, “हमें अभी तक कुछ भी खाने को नहीं मिला। न पानी दिया गया, न चाय। कोई बुनियादी सुविधा नहीं थी। एक ही कमरे में 100 लोगों को ठूंस दिया गया।”

एक अन्य रिहा किए गए कैदी अब्दुल सत्तार ने दावा किया कि उनके पास वैध पहचान दस्तावेज होने के बावजूद उन्हें जेल में डाल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ पकड़े गए एक अन्य व्यक्ति, जिसके पास कोई कागजात नहीं थे, को 45,000 पाकिस्तानी रुपये देने के बाद छोड़ दिया गया।

उन्होंने कहा, “अगर पैसे दो तो छोड़ देते हैं, नहीं तो वापस भेज देते हैं।”

हालिया रिहाई में शामिल एक अन्य कैदी मोहम्मद ने बताया कि उन्हें काम पर जाते समय गिरफ्तार कर लिया गया और कराची के एक शरणार्थी शिविर में ले जाया गया।

उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझसे पूछा मैं कहां का हूं। मैंने कहा कि मैं अफगान हूं। बस इतना कहना ही काफी था। उन्होंने मुझे इतना पीटा कि आज भी कंधे में दर्द है। मेरा एकमात्र अपराध अफगान होना था।”

एक अन्य लौटे व्यक्ति ने आरोप लगाया, “वहां किसी ने हमारी इज्जत नहीं की। हमारी मांओं और बहनों को भी अपमान की नजर से देखा गया।”

करीब दो सप्ताह तक पाकिस्तानी जेल में रहने वाले दोस्त मोहम्मद नामक एक पूर्व कैदी ने बताया कि पुलिस का व्यवहार इतना क्रूर था कि कई बार अफगान कैदियों को रात में सोने तक नहीं दिया जाता था।

उन्होंने कहा, “उन्होंने ऐसी क्रूरता की, जिसे यहां मौजूद हर किसी ने देखा। हम सभी खड़े थे, महिलाएं जमीन पर पड़ी थीं। हर व्यक्ति को आधी रोटी दी जाती थी। हालात बेहद भयावह थे।”

उन्होंने दावा किया कि उनकी यातनाओं का वीडियो भी बनाया गया और जिस तरह की क्रूरता उनके साथ हुई, उसकी उन्होंने कभी कल्पना तक नहीं की थी।

टोलो न्यूज से बात करने वाले विश्लेषकों ने मानवीय संगठनों से अपील की है कि वे आगे आकर पड़ोसी देशों में अफगान शरणार्थियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को रोकें। एक विश्लेषक के हवाले से कहा गया कि ईरान, पाकिस्तान या किसी अन्य देश में अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी, कैद और निर्वासन अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है और वैश्विक समुदाय को इसे रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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तीसरी तिमाही में एशियन पेंट्स का मुनाफा करीब 5 प्रतिशत घटा, शेयरों में 4 प्रतिशत की आई गिरावट

मुंबई, 27 जनवरी (आईएएनएस)। देश की प्रमुख पेंट बनाने वाली कंपनी एशियन पेंट्स ने मंगलवार को बताया कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में कंपनी का कुल शुद्ध मुनाफा यानी नेट प्रॉफिट (पीएटी) लगभग 4.8 प्रतिशत घट गया है।

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, एशियन पेंट्स का नेट प्रॉफिट घटकर करीब 1,074 करोड़ रुपए रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह मुनाफा लगभग 1,128 करोड़ रुपए था।

कंपनी की परिचालन से होने वाली आय (रेवेन्यू) में इस तिमाही में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 8,867.02 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 8,549.44 करोड़ रुपए था।

इसका मतलब यह है कि कंपनी की बिक्री तो बढ़ी, लेकिन कुछ खास खर्चों की वजह से मुनाफे में गिरावट आई।

कंपनी ने बताया कि इस तिमाही के नतीजों में 157.61 करोड़ रुपए के विशेष खर्च शामिल हैं।

ये खर्च मुख्य रूप से श्रम कानून से जुड़े प्रावधानों और व्हाइट टीक (ऑब्जेनिक्स सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड) नाम की कंपनी के अधिग्रहण के बाद हुई नुकसान भरपाई से जुड़े हैं।

कामकाज के स्तर पर एशियन पेंट्स का प्रदर्शन अच्छा रहा। ब्याज, कर, मूल्यह्रास और विशेष खर्च से पहले का मुनाफा (पीबीडीआईटी) बढ़कर 1,781 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 1,636.7 करोड़ रुपए था, जिसमें 8.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

कंपनी के पीबीडीआईटी मार्जिन में भी सुधार हुआ और यह पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के 19.2 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 20.1 प्रतिशत हो गया।

विशेष खर्च और कर से पहले कंपनी का मुनाफा 8.5 प्रतिशत बढ़कर 1,646.7 करोड़ रुपए हो गया। वहीं, अल्पसंख्यक हित और विशेष खर्च से पहले का शुद्ध मुनाफा 7.7 प्रतिशत बढ़कर 1,215.7 करोड़ रुपए रहा।

हालांकि, विशेष खर्च और अल्पसंख्यक हिस्सेदारी जोड़ने के बाद कुल शुद्ध मुनाफा घट गया।

एशियन पेंट्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमित सिंघल ने कहा कि तिमाही के लिए यह प्रदर्शन हमारी विकास योजनाओं पर लगातार किए गए प्रयासों का नतीजा है, हालांकि बाजार में प्रतिस्पर्धा ज्यादा रही और मांग थोड़ी कमजोर थी।

उन्होंने कहा कि कंपनी ने ब्रांड को मजबूत करने, खुदरा बिक्री बढ़ाने और नए उत्पाद और सेवाएं लॉन्च करने पर खास ध्यान दिया है।

तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद शेयर बाजार में एशियन पेंट्स के शेयरों पर नकारात्मक असर पड़ा। इंट्रा-डे सत्र के दौरान कंपनी के शेयरों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

--आईएएनएस

डीबीपी/एबीएम

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  Sports

VIDEO: मैदान पर 10 साल बिताने के बाद हार्दिक पंड्या का फ्यूचर प्लान जानिए

नई दिल्ली. हार्दिक ने 26 जनवरी 2016 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में वनडे डेब्यू किया था. गणतंत्र दिवस पर डेब्यू करना उनके लिए बेहद खास पल था. इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखते हुए हार्दिक ने कहा, “10 साल का सफर, और मैं 33 का हो चुका हूं. खेलना और देश की सेवा करना, दोनों ही मेरे लिए गर्व की बात हैं. आप सभी से मुझे जो प्यार मिला है, उसके लिए दिल से धन्यवाद. हर उस चीज के लिए शुक्रिया. भगवान का भी आभार, उन सभी मुश्किलों के लिए, जिन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाया. उन मौकों के लिए जो इतने लोगों ने मुझ पर भरोसा करके दिए और उस जिंदगी को जीने के अवसर के लिए, जो मुझे मिली. इस साल ने मुझे सिखाया है कि यह तो बस शुरुआत है. मैं उस रास्ते पर अभी-अभी चलना शुरू कर रहा हूं, जिस पर मैं सच में चलना चाहता हूं.”हार्दिक ने अपने बचपन की मेहनत को याद किया. उन्होंने बताया, अगर मैं पीछे मुड़कर देखूं तो बड़ौदा का वही युवा हार्दिक याद आता है, जो खेलने के लिए कुछ मील ज्यादा दौड़ जाता था. एक बल्लेबाज, जो गेंदबाजों को नेट्स में ज्यादा गेंदें फेंकता था क्योंकि उन्हें बल्लेबाजी की प्रैक्टिस का मौका नहीं मिलता था. 19 साल की उम्र में ऑल-राउंडर बना, कभी पहचाना गया, कभी ठुकराया गया और फिर अपने देश के लिए खेलने का मौका मिला. यह मेरे जीवन की सबसे मूल्यवान जर्नी रही है. उन्होंने आगे लिखा, भगवान ने मेरे लिए बड़े प्लान बनाए थे, जब उन्होंने मुझे 26 जनवरी के दिन डेब्यू करने का मौका दिया. इस खेल को खेलते-खेलते मैं एक इंसान से आदमी बना हूं, और इसी खेल के साथ बूढ़ा भी होऊंगा. Tue, 27 Jan 2026 18:37:59 +0530

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