Donald Trump के Oil दावे पर भड़का Iran, Strait of Hormuz पर दी सीधी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (स्थानीय समय) को कहा कि ईरान हार मान लेगा और दावा किया कि अमेरिका ने पिछले कुछ दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से इतिहास में किसी भी समय की तुलना में ज़्यादा तेल निकाला है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के अधिकारियों के साथ लंच के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने और टेक लीडर्स ने एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति प्रशासन के नज़रिए पर चर्चा की और फ्रंटियर कंप्यूटिंग मॉडल की सुरक्षा पर एक संयुक्त प्रतिबद्धता पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने कहा कि वे हार मान लेंगे। हमने पिछले कुछ दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से इतिहास में किसी भी समय की तुलना में ज़्यादा तेल निकाला है। यह बयान तब आया जब मंगलवार को ट्रंप और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुखों ने एक जॉइंट, नैतिक रूप से बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में फ्रंटियर कंप्यूटिंग मॉडल की सुरक्षा को नियंत्रित करने के लिए चार स्तरों के कंट्रोल और ऑडिट का एक व्यापक ढांचा लागू करने का वादा किया गया, साथ ही भविष्य में इसे कानून का रूप देने की संभावना भी खुली रखी गई।
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फ्रंटियर जिम्मेदारियों पर संयुक्त प्रतिबद्धता नाम का यह दस्तावेज व्हाइट हाउस समिट के बाद जारी किया गया। इस समिट में प्रशासन ने औपचारिक रूप से सुपर इंटेलिजेंस शब्द का इस्तेमाल किया, जो टेक प्रमुखों के उस सुझाव के बाद आया जिसमें फ्रंटियर AI के विकास की गति धीमी करने या नियंत्रण खोने के जोखिम की बात कही गई थी। ट्रंप ने मंगलवार को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर भी हस्ताक्षर किए, जिसमें संघीय सरकार को निर्देश दिया गया कि वह एग्जीक्यूटिव ब्रांच के कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और AI शब्दों की जगह सुपर इंटेलिजेंस और SI शब्दों का इस्तेमाल करे। सुपर इंटेलिजेंस के युग की शुरुआत नाम का यह आदेश यह तय करता है कि अमेरिकी सरकार कानून द्वारा अनुमत सीमा तक आधिकारिक कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या AI शब्दावली को मान्यता नहीं देगी और न ही उसका इस्तेमाल करेगी।
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इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ़ ने मंगलवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और अन्य देशों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो "कोई भी बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं रहेगा"। घालीबाफ़ ने मंगलवार को एक सार्वजनिक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य और वहां से जहाजों के गुजरने के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले के बयानों का ज़िक्र किया। अमेरिकी राष्ट्रपति की पिछली टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए घालीबाफ़ ने कहा कि ये पुराने दावों को दोहराना भर है और इनकी असलियत सभी को पता है। उन्होंने कहा भ्रम में जी रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में होर्मुज़ जलडमरूमध्य और वहां से जहाजों के गुजरने के बारे में जो बातें कही हैं, वे पुराने दावों को दोहराना ही हैं और इन भ्रमपूर्ण बातों की सच्चाई सभी को पता है। इसके बाद घालीबाफ़ ने अमेरिका और अन्य देशों को चेतावनी दी कि ईरान अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने इस क्षेत्र की सुरक्षा को तेल की आवाजाही से जोड़ा।
UN मुख्यालय में Antonio Guterres से मिले जयशंकर, ग्लोबल साउथ और पश्चिम एशिया पर चर्चा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने जारी संघर्षों जिनमें पश्चिम एशिया के हालात और ग्लोबल साउथ के देशों पर उनका असर शामिल है।
यह मुलाकात तब हुई जब जयशंकर यूएन महासभा के हाई-लेवल सप्ताह के दौरान अपने कार्यक्रमों को पूरा कर रहे थे। यूएन प्रमुख के कार्यालय के अनुसार, बातचीत में बहुपक्षवाद, भारत-यूएन सहयोग और व्यापक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों जिनमें यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के हालात पर चर्चा हुई। जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आज यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत मौजूदा संघर्षों और उनके असर को कम करने की ज़रूरत पर केंद्रित रही, खासकर 'ग्लोबल साउथ' पर पड़ने वाले असर को लेकर।
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महासचिव के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि गुटेरेस और जयशंकर ने बहुपक्षवाद, भारत-यूएन सहयोग और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा की, जिसमें यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व की स्थिति शामिल है। इसमें यह भी कहा गया कि महासचिव ने यूएन के साथ भारत के सहयोग की सराहना की। शनिवार को जनरल डिबेट में भारत का राष्ट्रीय बयान देते हुए, जयशंकर ने दुनिया की इस संस्था के प्रमुख के तौर पर गुटेरेस की सेवाओं की तारीफ़ की। उन्होंने कहा बहुपक्षवाद के लिए एक दशक तक सेवा और समर्पण के बाद, हम जल्द ही सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस को विदाई देंगे। भारत उनके कई योगदानों, खासकर 'मिशन LiFE' के लिए उनके व्यक्तिगत समर्थन की बहुत कद्र करता है। यह गुटेरेस का UNGA (संयुक्त राष्ट्र महासभा) का आखिरी हाई-लेवल हफ़्ता था और UN प्रमुख के तौर पर उनका दूसरा पांच साल का कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है। वे इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे। एशिया सोसाइटी में बोलते हुए जयशंकर ने यह भी कहा कि UN में "बहुत ही व्यस्त हफ़्ते" के दौरान वे अपने लगभग 85-90 समकक्षों से मिले, जो कई राजनयिक मुलाकातों का एक भरा-पूरा दौर था।
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