Ramayana Katha: रावण के अंत के बाद विभीषण ने क्यों नहीं कर रहे थे अपने भाई का अंतिम संस्कार?
Ramayana Katha: रामायण कथा के अनुसार, जब लंका में रावण का वध हुआ और युद्ध समाप्त हुआ तो परिवार और उनकी पत्नी मंदोदरी तथा अन्य रानियां विलाप करने लगीं थी. इस दौरान रावण के छोटे भाई विभीषण ने अपने बड़े भाई की मृत्यु से दुखी थी. इस युद्धकांड में विभीषण ने ही श्रीराम भगवान का साथ दिया था और युद्ध जीतने में सहायता भी की थी. जब रावण का अंत हुआ तो श्रीराम ने विभीषण से कहा कि वे अपने भाई का अंतिम संस्कार करें. मगर विभीषण ने ऐसा करने से मना कर दिया. इसके बाद क्या हुआ, जो उन्होंने अंतिम संस्कार किया. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
आखिर क्यों विभीषण ने किया था इनकार?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, विभीषण उस वक्त भगवा राम से कहते थे कि रावण ने धर्म का पालन नहीं किया था. उसने दूसरे की पत्नी का हरण किया और अपने आचरण से अधर्म का मार्ग अपनाया था. विभीषण यह भी कहते हैं कि रावण ने उन्हें अपना भाई होने के बाद उनसे शत्रुओं जैसा व्यवहार रखते थे. उन्हें दुख पहुंचाते थए. इसलिए, उनके मन में रावण के अंतिम संस्कार को लेकर विरोधाभास बना हुआ था. यानी विभीषण का इनकार सिर्फ भाई से नाराजगी की वजह से नहीं था, बल्कि वह रावण के कर्मों को अंतिम संस्कार के योग्य मानने को लेकर दुविधा में थे.
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श्रीराम ने विभीषण को क्या समझाया?
विभीषण की बातें सुनकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने उन्हें समझाया कि रावण ने जीवन में चाहे जितने भी गलत कर्म किए हों, मगर मृत्यु के बाद उसके प्रति शत्रुता करना बिल्कुल भी सही नहीं है. ये स्वयं के धर्म के उचित नहीं है और उन्होंने बताया कि मेरा भाव है कि मृत्यु होने के बाद शत्रुता समाप्त हो जाती है. श्रीराम ने विभीषण को याद दिलाया कि रावण उनका भाई भी है और अब उसके प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए. श्रीराम ने यह भी कहा कि रावण पराक्रमी और वीर योद्ध था. उसकी शक्ति असीम थी, इसलिए, उसका अंतिम संस्कार करने की परंपरा के अनुसार पूरी व्यवस्था की जानी चाहिए. श्रीराम जी की बात सुनकर विभीषण मान गए और उन्होंने अपने बड़े भाई रावण के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी.
किसने किया था रावण का अंतिम संस्कार?
भगवान राम के समझाने के पश्चात रावण का अंतिम संस्कार उसके छोटे भाई विभीषण ने किया था. विभीषण लंका गए और वहां रावण के अंतिम संस्कार के लिए सामग्रियां जुटाने लगे. इसके बाद उन्होंने विधि-विधान के साथ रावण का अंतिम संस्कार किया. अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया में विभीषण ने अपने भाई के शरीर को विधि के अनुसार, तैयार कराया और उनकी चिता को अग्नि दी. इस तरह जिस विभीषण ने शुरुआत में रावण के अंतिम संस्कार से इनकार किया था, उन्होंने ही बाद में अपने बड़े भाई के अंतिम संस्कार का कर्तव्य निभाया.
रावण की मृत्यु के बाद कौन बना लंका का राजा?
कथा के अनुसार, रावण के अंतिम संस्कार के बाद श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजा बनाया था. वाल्मीकि रामायण के अगले अध्याय में विभीषण का राज्याभिषेक करवाया गया. इस दौरान लक्ष्मण जी लंका गए थे और उन्होंने ही राज्याभिषेक किया था. इस तरह रावण के अंत के बाद लंका की सत्ता विभीषण को प्राप्त हुई और उन्होंने श्रीराम का साथ देकर युद्ध में धर्म के पक्ष का समर्थन किया था और बाद में लंका का शासन संभाला. विभीषण ने श्रीराम को रावण का पुष्पक विमान भी दिया था, ताकि वे जल्द से जल्द अयोध्या लौट सके.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
वित्त मंत्री सीतारमण ने कतर के कारोबारियों से भारत में निवेश और व्यापार के अवसर तलाशने की अपील की
दोहा, 30 सितंबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतरी बिजनेसमैन एसोसिएशन (क्यूबीए) से भारत में व्यापार और निवेश में साझेदारी की संभावनाओं को सक्रिय रूप से तलाशने और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की अपील की। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
बातचीत के दौरान, वित्त मंत्री ने दोनों देशों में उभरते आर्थिक अवसरों पर चर्चा की।
वित्त मंत्री ने दोहा में क्यूबीए की बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित के दौरान भारत की मजबूत स्ट्रक्चरल ग्रोथ की रफ्तार का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद निवेश में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, जापान क्रेडिट रेटिंग (जेसीआर) द्वारा भारत की लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग को बीबीबी प्लस से बढ़ाकर ए माइन्स करना भी भारत में चल रहे स्ट्रक्चरल सुधारों में भरोसे का संकेत माना गया।
भारत ने वित्त वर्ष 26 में अब तक का सबसे ज्यादा सालाना ग्रॉस एफडीआई इनफ्लो 94.53 अरब डॉलर दर्ज किया, जो पिछले 15 सालों में सबसे ज्यादा है।
इससे पहले, वित्त मंत्री सीतारमण ने कतर के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. अहमद बिन मोहम्मद अल-सईद से मुलाकात की।
डॉ. अल-सईद ने 2025 में अपनी भारत यात्रा को गर्मजोशी से याद किया और कहा कि भारत में कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर - जैसे पोर्ट, एयरपोर्ट, हाईवे और बिजली - में निवेश की काफी गुंजाइश है। साथ ही, भारतीय कंपनियों के लिए कतर में फूड सिक्योरिटी, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों में निवेश के मौके हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत कतर के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने को बहुत महत्व देता है, और उन्होंने फरवरी 2025 में कतर के अमीर की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक ले जाने का भी जिक्र किया।
उन्होंने रिश्तों को रणनीतिक आयाम देने के लिए व्यापार और निवेश को अहम आधार बताया।
सरकारी बयान के मुताबिक, वित्त मंत्री ने भारत और कतर तथा अन्य खाड़ी देशों के बीच सामान्य व्यापार को फिर से शुरू करने के महत्व पर जोर दिया, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रुकावट के समुद्री आवाजाही और व्यापार शामिल है।
--आईएएनएस
एबीएस
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