MG Hector Tomahawk EV की डिलीवरी शुरू, सूरत में एक साथ 50 ग्राहकों को मिली चाबी
MG Hector Tomahawk EV की डिलीवरी आखिरकार शुरू हो गई है. सूरत में एक ही दिन में 50 ग्राहकों को इस इलेक्ट्रिक SUV की चाबी सौंपी गई. 5-सीटर और 7-सीटर विकल्पों में आने वाली इस SUV की शुरुआती कीमत ₹19.49 लाख है. वहीं BaaS के साथ इसे ₹13.99 लाख की शुरुआती कीमत में खरीदा जा सकता है. 517 KM रेंज और प्रीमियम फीचर्स वाली इस EV में और क्या खास है, जानें पूरी डिटेल.
Ramayana Katha: रावण के अंत के बाद विभीषण ने क्यों नहीं कर रहे थे अपने भाई का अंतिम संस्कार?
Ramayana Katha: रामायण कथा के अनुसार, जब लंका में रावण का वध हुआ और युद्ध समाप्त हुआ तो परिवार और उनकी पत्नी मंदोदरी तथा अन्य रानियां विलाप करने लगीं थी. इस दौरान रावण के छोटे भाई विभीषण ने अपने बड़े भाई की मृत्यु से दुखी थी. इस युद्धकांड में विभीषण ने ही श्रीराम भगवान का साथ दिया था और युद्ध जीतने में सहायता भी की थी. जब रावण का अंत हुआ तो श्रीराम ने विभीषण से कहा कि वे अपने भाई का अंतिम संस्कार करें. मगर विभीषण ने ऐसा करने से मना कर दिया. इसके बाद क्या हुआ, जो उन्होंने अंतिम संस्कार किया. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
आखिर क्यों विभीषण ने किया था इनकार?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, विभीषण उस वक्त भगवा राम से कहते थे कि रावण ने धर्म का पालन नहीं किया था. उसने दूसरे की पत्नी का हरण किया और अपने आचरण से अधर्म का मार्ग अपनाया था. विभीषण यह भी कहते हैं कि रावण ने उन्हें अपना भाई होने के बाद उनसे शत्रुओं जैसा व्यवहार रखते थे. उन्हें दुख पहुंचाते थए. इसलिए, उनके मन में रावण के अंतिम संस्कार को लेकर विरोधाभास बना हुआ था. यानी विभीषण का इनकार सिर्फ भाई से नाराजगी की वजह से नहीं था, बल्कि वह रावण के कर्मों को अंतिम संस्कार के योग्य मानने को लेकर दुविधा में थे.
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श्रीराम ने विभीषण को क्या समझाया?
विभीषण की बातें सुनकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने उन्हें समझाया कि रावण ने जीवन में चाहे जितने भी गलत कर्म किए हों, मगर मृत्यु के बाद उसके प्रति शत्रुता करना बिल्कुल भी सही नहीं है. ये स्वयं के धर्म के उचित नहीं है और उन्होंने बताया कि मेरा भाव है कि मृत्यु होने के बाद शत्रुता समाप्त हो जाती है. श्रीराम ने विभीषण को याद दिलाया कि रावण उनका भाई भी है और अब उसके प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए. श्रीराम ने यह भी कहा कि रावण पराक्रमी और वीर योद्ध था. उसकी शक्ति असीम थी, इसलिए, उसका अंतिम संस्कार करने की परंपरा के अनुसार पूरी व्यवस्था की जानी चाहिए. श्रीराम जी की बात सुनकर विभीषण मान गए और उन्होंने अपने बड़े भाई रावण के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी.
किसने किया था रावण का अंतिम संस्कार?
भगवान राम के समझाने के पश्चात रावण का अंतिम संस्कार उसके छोटे भाई विभीषण ने किया था. विभीषण लंका गए और वहां रावण के अंतिम संस्कार के लिए सामग्रियां जुटाने लगे. इसके बाद उन्होंने विधि-विधान के साथ रावण का अंतिम संस्कार किया. अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया में विभीषण ने अपने भाई के शरीर को विधि के अनुसार, तैयार कराया और उनकी चिता को अग्नि दी. इस तरह जिस विभीषण ने शुरुआत में रावण के अंतिम संस्कार से इनकार किया था, उन्होंने ही बाद में अपने बड़े भाई के अंतिम संस्कार का कर्तव्य निभाया.
रावण की मृत्यु के बाद कौन बना लंका का राजा?
कथा के अनुसार, रावण के अंतिम संस्कार के बाद श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजा बनाया था. वाल्मीकि रामायण के अगले अध्याय में विभीषण का राज्याभिषेक करवाया गया. इस दौरान लक्ष्मण जी लंका गए थे और उन्होंने ही राज्याभिषेक किया था. इस तरह रावण के अंत के बाद लंका की सत्ता विभीषण को प्राप्त हुई और उन्होंने श्रीराम का साथ देकर युद्ध में धर्म के पक्ष का समर्थन किया था और बाद में लंका का शासन संभाला. विभीषण ने श्रीराम को रावण का पुष्पक विमान भी दिया था, ताकि वे जल्द से जल्द अयोध्या लौट सके.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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