MP TET: शिक्षकों के लिए आवेदन की तारीख बढ़ी, अब 5 अक्टूबर तक भर सकेंगे फॉर्म
मध्यप्रदेश में सेवारत शिक्षकों के लिए आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 के आवेदन की समयसीमा बढ़ा दी गई है। अब शिक्षक 5 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे। पहले आवेदन की अंतिम तारीख 18 सितंबर निर्धारित की गई थी। आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू हुई थी।
शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू हुई है। अदालत ने पात्रता परीक्षा को लेकर सेवारत शिक्षकों के लिए भी व्यवस्था स्पष्ट की है। मध्यप्रदेश में संबंधित शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने की समयसीमा दी गई है। इस अवधि में प्रदेश में कुल छह पात्रता परीक्षाएं आयोजित होंगी। इसका अर्थ ये हुआ कि शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए एक से अधिक अवसर मिलेंगे।
किन शिक्षकों के लिए जरूरी है परीक्षा
शिक्षक पात्रता परीक्षा उन सेवारत शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई है, जिन्होंने आरटीई के तहत निर्धारित टीईटी पहले पास नहीं की है। इसमें सरकारी स्कूलों में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पढ़ाने वाले अलग-अलग श्रेणियों के शिक्षक शामिल हैं। प्राथमिक स्तर पर सहायक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, सहायक अध्यापक, संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3, प्राथमिक शिक्षक विज्ञान और प्रयोगशाला शिक्षक जैसी श्रेणियां परीक्षा के दायरे में हैं। वहीं माध्यमिक स्तर पर उच्च श्रेणी शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक, अध्यापक और संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 को भी परीक्षा देनी होगी। निजी स्कूलों में प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन करने वाले शिक्षक भी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
लगभग डेढ़ लाख शिक्षक परीक्षा के दायरे में
मध्यप्रदेश में लगभग 1.50 लाख सेवारत शिक्षकों के इस परीक्षा के दायरे में हैं। शिक्षक संगठनों की ओर से परीक्षा की अनिवार्यता और प्रक्रिया को लेकर लगातार विरोध किया जा रहा है। इसी बीच लोक शिक्षण संचालनालय ने कर्मचारी चयन मंडल को आवेदन की समयसीमा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 5 अक्टूबर रखी गई है। वहीं अभ्यर्थियों को आवेदन में संशोधन के लिए 6 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। परीक्षा का आयोजन 12 अक्टूबर से प्रस्तावित है।
Budgam Encounter: बडगाम में लश्कर कमांडर हाशिम मूसा ढेर, पहलगाम हमले में था शामिल
जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग इलाके में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक आतंकी मारा गया। अधिकारियों ने उसकी पहचान हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान शाह के तौर पर की है।
भारतीय सेना की चिनार कोर के मुताबिक, यूसमर्ग के कोराग इलाके में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर जवानों ने इलाके को घेरा। चुनौती दिए जाने पर आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई।
मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी मारा गया। बाद में तलाशी अभियान में उसका शव और युद्ध में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है।
पहलगाम हमले से जुड़ा था हाशिम मूसा का नाम
हाशिम मूसा का नाम 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सामने आया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसे हमले में शामिल संदिग्ध आतंकियों में शामिल बताया था और उसकी जानकारी देने पर 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। पुलिस ने उसे पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा बताया था। पहलगाम के बैसरन इलाके में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक शामिल था।
पाकिस्तान की स्पेशल सर्विस ग्रुप से जुड़ा होने की रिपोर्ट
सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से 2025 में आई रिपोर्टों में कहा गया था कि हाशिम मूसा ने पाकिस्तान की सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) में कमांडो के तौर पर काम किया था। इसके बाद वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हुआ।
NIA की चार्जशीट में पाकिस्तान कनेक्शन का जिक्र
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिसंबर 2025 में 1,597 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को हमले की साजिश, योजना और उसे अंजाम देने से जोड़ा था। चार्जशीट में पाकिस्तानी हैंडलर साजिद जट्ट को भी आरोपी बनाया गया था।
इसके बाद जुलाई 2026 में NIA ने मामले में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की, जिसमें लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का नाम सामने आया।
ऑपरेशन कोराग में तलाशी जारी
सुरक्षाबलों का अभियान अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जवान आसपास के जंगल और पहाड़ी इलाकों में तलाशी ले रहे हैं, ताकि किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी या हथियार एवं अन्य सामान के बारे में जानकारी मिल सके।
सेना के मुताबिक, ऑपरेशन कोराग विशेष खुफिया इनपुट के आधार पर शुरू किया गया था और इसमें सेना के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा सीआरपीएफ की टीमें शामिल हैं।
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