घर के बाहर खड़ी थी पुलिसकर्मी की 19 वर्षीय बेटी, बिना नंबर की कार में आए बदमाशों ने किया अपहरण
धार्मिक नगरी उज्जैन के लालबाई-फूलबाई क्षेत्र में मंगलवार रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक पुलिसकर्मी की 19 वर्षीय बेटी का संदिग्ध परिस्थितियों में अपहरण कर लिया गया। युवती रात करीब आठ बजे अपने घर के बाहर खड़ी थी। इसी दौरान बिना नंबर प्लेट की काले रंग की कार में सवार होकर पहुंचे दो युवक उसे जबरन गाड़ी में बैठाकर तेजी से फरार हो गए।
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी वारदात
वारदात की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और परिजनों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी। घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच करने पर अपहरण की पूरी वारदात का फुटेज सामने आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीआई प्रतीक शर्मा ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने युवती की सुरक्षित बरामदगी और बदमाशों को पकड़ने के लिए कई टीमें गठित कर दी हैं।
उर्दूपुरा के ध्रुव कुमावत का नाम आया सामने
शुरुआती जांच और स्थानीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस के हाथ महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं। इस वारदात में उर्दूपुरा निवासी ध्रुव कुमावत का नाम मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आया है, जिसके साथ एक अन्य साथी भी शामिल था। वारदात के बाद से ही आरोपी ध्रुव का मोबाइल फोन बंद आ रहा है, जिसे पुलिस की साइबर टीम लगातार ट्रेस करने की कोशिश में जुटी हुई है।
जल्द गिरफ्तारी और युवती की सुरक्षित वापसी का दावा
फिलहाल पुलिस की एक टीम सीसीटीवी फुटेज के जरिए कार के भागने के रास्ते को ट्रैक कर रही है, जबकि दूसरी टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर युवती को सकुशल बरामद कर लिया जाएगा। अपहरण के पीछे की असली वजह क्या है, इसका सही खुलासा आरोपियों के पकड़े जाने के बाद ही हो सकेगा।
जबलपुर ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जीवाड़ा, CBI ने 8 अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला किया दर्ज, 10वीं की मार्कशीट निकली फर्जी
जबलपुर में ग्रामीण डाक सेवक के पदों पर हुई भर्ती में फर्जी दस्तावेज लगाने का मामला सामने आया है। दरअसल डाकघर सब डिवीजन क्रमांक-1 के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट लवकुश पारेते ने इस संबंध में CBI को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में जनवरी 2023 और जुलाई 2024 में ग्रामीण डाक सेवक के पदों के लिए हुई भर्ती का जिक्र किया गया। भर्ती के लिए अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया था और 10वीं की मार्कशीट अपलोड की थी। चयन 10वीं में मिले अंकों के आधार पर किया गया था।
वहीं जांच के दौरान भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों की ओर से जमा की गई मार्कशीट और अंकसूची का संबंधित शिक्षा बोर्ड से सत्यापन कराया गया। सत्यापन रिपोर्ट सामने आने के बाद 8 अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद CBI ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच अब सिर्फ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है बल्कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है।
इन 8 अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी मिले
वहीं CBI से मिली जानकारी के अनुसार सत्यापन के दौरान जिन अभ्यर्थियों की मार्कशीट और अंकसूची फर्जी पाई गई उनमें मानवेंद्र सिंह सिकरवार निवासी गोपालपुरा, मुरैना, बद्री प्रसाद यादव निवासी बैरवार, टीकमगढ़, देवेंद्र सिंह चौहान निवासी गंधर्वपुर, देवास, राजा बाबू अहिरवार निवासी सुर्खी, सागर शामिल हैं। इसके अलावा रमाकांत शर्मा निवासी बैंकखंडी रोड, मुरैना, प्रदीप खरे निवासी ग्राम काजीबसाई, मुरैना, सौरभ शर्मा निवासी तहसील जौरा, मुरैना और नयन कुमार निवासी जिला सिवनी के नाम भी सामने आए हैं। जांच में इन सभी की ओर से भर्ती आवेदन के दौरान प्रस्तुत की गई मार्कशीट और अंकसूची संबंधित शिक्षा बोर्ड के सत्यापन में फर्जी पाई गई।
दस्तावेजों का स्वयं सत्यापन किया था
दरअसल ग्रामीण डाक सेवक की भर्ती में चयन 10वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर किया गया था। ऐसे में आवेदन के समय अपलोड किए गए दस्तावेजों का सत्यापन भर्ती प्रक्रिया का अहम हिस्सा था। शिकायत में बताया गया कि अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन के दौरान 10वीं की मार्कशीट अपलोड की थी और अपने दस्तावेजों का स्वयं सत्यापन किया था। बाद में संबंधित बोर्ड से कराए गए सत्यापन में दस्तावेजों की जानकारी सही नहीं पाई गई।
CBI जांच में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच
वहीं इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से यह आशंका भी जताई गई है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने में कुछ अन्य सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। इसी वजह से CBI की जांच केवल उन 8 अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, जिनकी मार्कशीट और अंकसूची फर्जी पाई गई हैं। CBI ने शिकायत के आधार पर आठों अभ्यर्थियों और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए गए इन्हें भर्ती आवेदन में किस तरह इस्तेमाल किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। सरकारी कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत को लेकर शिकायत में जताई गई आशंका की भी जांच की जा रही है।
वंदना झां, जबलपुर
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