पूजा में घंटी के साथ छोटी घंटियों का इस्तेमाल क्यों होता है? जानिए मंदिर की परंपरा
मंदिरों में बड़ी घंटियों के साथ कई छोटी घंटियां भी दिखाई देती हैं। कुछ मंदिरों के प्रवेश द्वार पर बड़ी घंटी लगी होती है, जबकि परिसर के अलग-अलग हिस्सों में छोटी घंटियां लटकी रहती हैं। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के दौरान इन्हें बजाते हैं या उनके पास से गुजरते हुए उन्हें स्पर्श करते हैं।
छोटी घंटियों से जुड़ी मान्यता
धार्मिक परंपरा में घंटी की ध्वनि को पूजा के वातावरण से जोड़ा जाता है। छोटी घंटियों की आवाज मंदिर परिसर में लगातार सुनाई दे सकती है और श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक माहौल का हिस्सा बन जाती है।
कई मंदिरों में घंटियों को भगवान के सामने अपनी उपस्थिति और श्रद्धा व्यक्त करने के भाव से भी जोड़ा जाता है।
मन को एकाग्र करने का भाव
घंटी की आवाज को लेकर धार्मिक व्याख्याओं में यह बात कही जाती है कि इसकी ध्वनि पूजा के समय ध्यान को एक जगह केंद्रित करने में सहायक मानी जाती है। हालांकि इसे वैज्ञानिक निष्कर्ष के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
छोटी घंटियों का इस्तेमाल मंदिर की सजावट और धार्मिक वातावरण का हिस्सा भी होता है।
हर मंदिर की परंपरा अलग
सभी मंदिरों में घंटियों की संख्या या आकार समान नहीं होते। कुछ मंदिरों में बड़ी संख्या में छोटी घंटियां दिखाई देती हैं, जबकि कुछ जगह केवल मुख्य द्वार पर एक या कुछ घंटियां लगी होती हैं।
कहीं श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार घंटी बजाते हैं तो कहीं मंदिर की व्यवस्था के अनुसार घंटी बजाने का तरीका अलग होता है।
इसलिए छोटी घंटियों को मंदिर की धार्मिक संस्कृति, ध्वनि और श्रद्धा से जुड़ी परंपरा के रूप में समझना अधिक उचित है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): मंदिर की घंटियों से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और संप्रदायों में अलग हो सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्य या अनिवार्य नियम के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
Haryana Farmers Scheme: किसानों को बागवानी पर मिल रहा 1.40 लाख रुपये तक अनुदान, जानें आवेदन का तरीका
Haryana Farmers Scheme: किसानों को बागवानी पर मिल रहा 1.40 लाख रुपये तक अनुदान, जानें आवेदन का तरीका
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi
Samacharnama









