पाक एयरस्पेस का विकल्प बनेगा लेह-होतान रूट; चीन से बातचीत:नए रूट से सीधे पश्चिमी देश जा सकेंगे भारतीय विमान; पाकिस्तान एयरस्पेस 17 महीने से बंद
पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के बाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली भारतीय उड़ानों को अरब सागर और मस्कट के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे उड़ान का समय 45 मिनट से 2 घंटे तक बढ़ गया है। इस समस्या को दूर करने के लिए भारत चीन के साथ शिनजियांग के होतान से नया एयर रूट शुरू करने पर बातचीत कर रहा है। इस रूट में दिल्ली और मुंबई से उड़ानें लेह जाएंगी। वहां से चीनी एयरस्पेस में प्रवेश कर किर्गिस्तान के रास्ते यूरोप, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका के मौजूदा रूट से जुड़ेंगी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कहा कि दोनों देशों के बीच होतान रूट को लेकर बातचीत जारी है। हालांकि, उन्होंने रूट शुरू होने की कोई समयसीमा नहीं बताई। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
बाहुबली अनंत सिंह हुए बागी, क्या नीतीश पार्टी से निकालेंगे:विधायकी पर भी संकट, बेटे का क्या होगा; 6 सवालों में समझिए पूरी कहानी
मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की बगावत JDU सुप्रीमो नीतीश कुमार के दरबार तक पहुंच गई है। मंत्री श्रवण कुमार ने साफ शब्दों में कहा, 'इस मामले पर जल्द शीर्ष नेतृत्व फैसला लेगा।' इस बयान के बाद सियासी गलियारों में अनंत सिंह पर कड़ी कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं। क्या बाहुबली विधायक पार्टी से निकाले जाएंगे, विधायकी जाएगी, कार्रवाई के डर से बगावत छोड़ेंगे, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1ः अनंत सिंह की बगावत का पूरा मामला क्या है? जवाबः पटना स्नातक सीट पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 3 बार के विधान पार्षद नीरज कुमार को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट के अंदर 3 जिलों पटना, नालंदा और नवादा की 26 विधानसभा सीटें आती हैं। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने नीरज कुमार का खुला विरोध किया है। वे लगातार जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के साथ घूम रहे हैं और उनके लिए वोट मांग रहे हैं। 28 सितंबर को अनुज सिंह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अनंत सिंह ने कहा, 'हमको उससे कोई मतलब नहीं है कि कौन लड़ रहा है। हम पूरी तरह से अनुज सिंह का समर्थन करेंगे। उनके लिए वोट मांगने पूरे इलाके में जाएंगे।' अनंत सिंह ने आगे कहा, 'आज तक हम हारे नहीं हैं। अनुज सिंह चुनाव भी जीत जाएंगे। मेरे लिए जनता ही भगवान है। वह हमें वोट देगी।' 7 सितंबर की बैठक में नहीं बनी थी बात अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान 3 सितंबर को ही कर दिया था। इसके बाद बिहार JDU अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह और नीरज कुमार में सुलह कराने के लिए 7 सितंबर को बैठक की। लेकिन बात नहीं बनी। सवाल-2ः क्या JDU अनंत सिंह पर कार्रवाई करेगी? जवाबः 50-50 चॉंसेज है। चूंकि यह पूरा मामला पार्टी के अंदर से ज्यादा अनंत सिंह और नीरज कुमार की निजी लड़ाई का है। अनंत सिंह ने साफ कहा है, ‘यह चुनाव पार्टी के सिंबल पर नहीं लड़ा जा रहा है। मैं पार्टी नहीं, नीरज के खिलाफ हूं। नीरज ने चुनाव में हमारी मदद नहीं की है तो हम भी नहीं करेंगे।’ पार्टी भी अंदरखाने मानती है कि यह पार्टी के अंदर की नहीं, दो नेताओं की आपसी लड़ाई है। तब ही अभी तक पार्टी कार्रवाई करने के मूड में नहीं दिख रही है। पार्टी के बड़े नेता बहुत संभलकर बोल रहे हैं। इसकी तस्दीक 29 सितंबर के पार्टी के बड़े नेताओं के बयान से भी हो रही है। जैसे… सवाल-3: पार्टी अनंत सिंह पर ज्यादा से ज्यादा क्या कार्रवाई कर सकती है? जवाबः इस मामले में JDU के पास बहुत सीमित अधिकार है। वह मौटे तौर पर 3 बड़ी कार्रवाई कर सकती है। सवाल-4ः …तो क्या उनकी विधायकी जाएगी? जवाबः नहीं, सिर्फ पार्टी से बगावत या निकाल देने से उनकी विधायकी नहीं जाएगी। दरअसल, संविधान में विधायकों की सदस्यता रद्द/खत्म करने का स्पष्ट प्रावधान है। मुख्य रूप से 3 तरीके से विधायकी खत्म होती है। 1. दल-बदल विरोधी कानून संविधान की 10वीं अनुसूची कहती है कि किसी सदस्य की सदस्यता 3 स्थितियों में ही जा सकती है। धारा की व्याख्या में स्पष्ट लिखा है, 'चुनाव में जिस राजनीतिक पार्टी ने किसी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया था, वह उसी पार्टी का सदस्य माना जाएगा।' सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला है… 2. संवैधानिक रूप से अयोग्य होने पर संविधान के ऑर्टिकल-191(1) के तहत… 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 इस कानून की धारा 8 के तहत आपराधिक मामलों और चुनावी अपराधों के आधार पर सदस्यता रद्द होती है… सवाल-5ः पार्टी से बगावत क्या अनंत सिंह को भारी पड़ेगा? जवाबः राजनीतिक रूप से अनंत सिंह को कोई नुकसान होता नहीं दिख रहा है। क्योंकि वह खुद अगला चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। ऐसे में वह पार्टी में रहे या ना रहे, ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि, उन्हें 2 तरह से दिक्कतें हो सकती है। 1. बढ़ सकता है कानूनी पचड़ा चुनावी हलफनामे के मुताबिक, 65 वर्षीय अनंत सिंह पर 28 क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘सरकार के खिलाफ जाने का असर अनंत सिंह के कानूनी मामलों पर पड़ सकता है। ऐसा 2019 में हो चुका है।’ प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘2019 लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह ने अपनी पत्नी नीलम देवी को मुंगेर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाया था। तब पार्टी के खिलाफ जाना उन्हें भारी पड़ा था। ऐसा इस बार नहीं होगा, कहना अभी मुश्किल है।’ हालांकि, अबकी बार 2 कारणों से पहले से अलग परिस्थितियां हैं… 2. बेटे का फंस सकता है पॉलिटिकल करियर नीरज कुमार भी नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में से एक हैं। अगर उन्हें अनंत सिंह ने मदद नहीं की तो पार्टी में उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है। वैसे अनंत सिंह ने अगला चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। वह अपने बेटे को चुनाव लड़वाएंगे। इसकी तैयारी भी कर रहे हैं। ऐसे में अनंत सिंह की बगावत उनके बेटे के राजनीतिक करियर को फंसा सकता है। हालांकि, मोकामा में अनंत सिंह निर्दलीय भी चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन ऐसा उनके बेटे के साथ होगा, पक्के तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, 'विधानसभा चुनाव में अभी कम से कम 4 साल का वक्त है। तब तक राजनीति में बहुत कुछ आगे हो चुका होगा। अनंत सिंह अपने बेटे के लिए कोई ना कोई रास्त जरूर निकाल लेंगे।' सवाल-6ः क्या कार्रवाई के डर से अनंत सिंह बगावत का रास्ता छोड़ेंगे? जवाबः इसकी संभावना बेहद कम है। अनंत सिंह की राजनीति को देखें तो साफ है कि वह बिना लाग लपेट वाले नेता हैं। उन्होंने एक बार मन बना लिया तो वह अपने निर्णय से पीछे नहीं हटते हैं, चाहे रिजल्ट कुछ भी हो। पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘उन्होंने अपनी छवि एक 'बाहुबली' और 'स्वतंत्र जनाधार' वाले नेता के रूप में बनाई है। मोकामा क्षेत्र में वे पार्टी के सिंबल से ज्यादा अपने व्यक्तिगत प्रभाव के बल पर चुनाव जीतते आए हैं। वे 2015 विधानसभा चुनाव में निर्दलीय और 2020 में RJD के टिकट जीत दर्ज कर चुके हैं। इसलिए कम संभावना है कि वह अब अपना फैसला बदलेंगे।’
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