पाकिस्तान की जेल में भारतीय मछुआरे की मौत, बेटे की सज़ा पूरी फिर भी क़ैद
गुजरात के मछुआरे बीजलभाई भालिया की पाकिस्तान की जेल में मौत हो गई. उनके बेटे अश्विन की सज़ा चार साल पहले पूरी हो चुकी है, लेकिन वह अब भी पाकिस्तान की जेल में बंद हैं.
Pitru Paksha 2026: आज चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध एक ही दिन, जानें पिंडदान का उत्तम मुहूर्त
Pitru Paksha 2026: आज यानी 30 सितंबर 2026 को पितृपक्ष का चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध एकसाथ मनाया जा रहा है. इन श्राद्ध के दिनों में उन दिवंगतों का तर्पण और पिंडदान किया जाएगा, जिनती मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि और पंचमी तिथि को हुआ था. यह तिथि शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों की हो सकती है. पुरखों की आत्मा की शांति के लिए उन्हें पितृपक्ष में पिंडदान दिया जाता है और तर्पण दिया जाता है. दरअसल, हिंदू धर्म में पितृपक्ष की भी विशेष मान्यता होती है. जिस प्रकार सनातन धर्म में सभी प्रकार के पर्व मनाएं जाते हैं, उसी तरह पितरों को समर्पित यह समय भी विशेष होता है. मान्यता है कि हमारे पितर भी इंतजार करते हैं कि उन्हें उनके परिवार द्वारा तर्पण मिले ताकि वे मुक्ति पा सके. श्राद्ध करने के लिए लोग गयाजी, हरिद्वार जैसे स्थलों पर भी जाते हैं.
30 सितंबर 2026 का कुतुप मुहूर्त
आज का कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा और 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. वहीं, आज अपराह्न काल दोपहर 01:22 बजे से दोपहर 03:45 बजे तक होगा.
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आज की तिथि क्यों खास है?
आज की तिथि इसलिए खास है क्योंकि 29 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 9 मिनट से शुरू होकर 30 सितंबर को दोपहर 02:55 तक रहेगी. इसके पश्चात पंचनमी तिथि का प्रारंभ हो जाएगी, जो 1 अक्टूबर को दोपहर 12:35 तक रहेगी. क्योंकि श्राद्ध करने के लिए दोपहर का अपराह्न काल उचित माना जाता है. इसलिए, आज ही के दिन दोनों तिथियों का श्राद्ध किया जाएगा.
चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
आज 30 सितंबर को चतुर्थी तिथि दोपहर 2:55 तक रहने वाली है. वहीं, इस दिन अपराह्न काल दोपहर 1 बजकर 22 मिनट तक रहेगी. इस अवधि में चतुर्थी श्राद्ध किया जाएगा.
पंचमी का भी आज होगा श्राद्ध
चतुर्थी तिथि समाप्त होते ही इसी दिन दोपहर को 2 बजकर 55 मिनट से पंचमी तिथि शुरू हो रही है. इसलिए, उस समय तक अपराह्न काल भी रहने वाला है, जो 3 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगा. यानी आज ही पंचमी का श्राद्ध करने के लिए भी मुहूर्त है. हालांकि, पंचमी तिथि 1 अक्टूबर को ही समाप्त होगी.
1 तारीख को क्यों नहीं किया जाएगा श्राद्ध?
1 अक्टूबर को भी पंचमी तिथि रहने वाली है, जो दोपहर 12:35 तक रहेगी. मगर श्राद्ध करने के लिए अपराह्न काल मुख्य माना जाता है, जो कि बाद में शुरू होगा. उस समय तक पंचमी तिथि समाप्त हो जाएगी. इसलिए, 1 अक्टूबर को पंचमी का श्राद्ध करने की मनाही है.
श्राद्ध करने के लिए इस विधि को अपनाएं
आज चतुर्थी और पंचमी तिथि पर श्राद्ध करने के लिए आपको चावल, आटे या जौ से पिंड बनाए जाते हैं. इन पिंडों को ही पितरों को अर्पित करना होता है. पिंडदान करने के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों का श्राद्ध किया जाता है. पितरों का तर्पण करने के दौरान हाथ में कुशा जरूर रखें. इसकी अंगूठी बनाकर दाएं हाथ की अनामिका उंगली में धारण करें. श्रााद्ध के बाद जरूरतमंद ब्राह्मणों की सेवा करनी चाहिए और उन्हें भोजन करवाने के साथ दक्षिणा भी दें. अंत में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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