Health Tips: खाली पेट कार्डियो करने से ज्यादा फैट बर्न होता है? जानिए पूरा सच
आज के समय में अधिकतर लोग अपना वजन कम करने की जद्दोजहद में लगे हैं और इसके लिए कई तरीके भी अपनाते हैं। अमूमन माना जाता है कि खाली पेट कार्डियो करने से वजन कम करना आसान होता है। ऐसा कहा जाता है कि खाली पेट व्यायाम करने से शरीर ज्यादा चर्बी जलाता है और वजन जल्दी कम होता है।
लेकिन क्या ऐसा सच में होता है? और क्या हर किसी के लिए खाली पेट कार्डियो करना सही है? तो चलिए विस्तार से जानते हैं इस बारे में-
खाली पेट कार्डियो क्या है?
सबसे पहले समझते हैं कि खाली पेट कार्डियो क्या होता है। जब आप कई घंटों तक कुछ खाए बिना, आमतौर पर सुबह नाश्ते से पहले कार्डियो करते हैं, तो इसे खाली पेट कार्डियो कहा जाता है। इसमें ब्रिस्क वॉक करना, हल्की दौड़, साइकिल चलाना या हल्की कसरत शामिल हो सकती है।
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यह सच है कि इस दौरान शरीर ऊर्जा के लिए जमा वसा का इस्तेमाल कुछ अधिक कर सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे दिन में आपका वजन बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा तेजी से कम होगा। वजन घटाने के लिए कुल कैलोरी संतुलन और नियमित व्यायाम ज्यादा मायने रखते हैं।
वजन घटाने में कैसे मदद कर सकता है?
खाली पेट कार्डियो करना कई वजहों से फायदेमंद माना जाता है। मसलन-
- खाली पेट रहने के बाद शरीर में तुरंत उपलब्ध ऊर्जा कुछ कम होती है। ऐसे में व्यायाम के दौरान शरीर ऊर्जा के लिए वसा का इस्तेमाल बढ़ा सकता है। जिससे चर्बी कम होती है।
- सुबह नाश्ते और दिनभर के काम शुरू होने से पहले व्यायाम कर लेने का एक फायदा यह है कि आपका व्यायाम छूटने की संभावना कम हो सकती है। व्यायाम की नियमितता वजन कम करने में सहायक है।
- जो लोग हैवी वर्कआउट नहीं करना चाहते, वे भी इस नियम से खुद को अधिक एक्टिव रख पाते हैं।
क्या खाली पेट कार्डियो से वजन तेजी से घटता है?
यह बात हर किसी को समझने की जरूरत है। यह जरूरी नहीं है कि खाली पेट कार्डियो सामान्य कार्डियो से ज्यादा वजन घटाए।व्यायाम के दौरान शरीर ज्यादा वसा का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन लंबे समय में वजन घटने का असर आपकी पूरी दिनचर्या, खान-पान, कुल एनर्जी खर्च करने और व्यायाम की नियमितता पर निर्भर करता है। इसलिए अगर आपको खाली पेट व्यायाम करने में कमजोरी या चक्कर महसूस होते हैं, तो सिर्फ ज्यादा चर्बी जलाने के लिए ऐसा करना जरूरी नहीं है।
किन लोगों को खाली पेट कार्डियो से बचना चाहिए?
हर किसी के लिए खाली पेट कार्डियो अच्छा नहीं है। होता। अगर आपको व्यायाम के दौरान बार-बार चक्कर, कमजोरी, कंपकंपी या घबराहट महसूस होती है, तो खाली पेट कसरत न करें। इसके अलावा, अगर आपको मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्या है, गर्भवती हैं या फिर अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो खाली पेट व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
- मिताली जैन
अनियमित पीरियड्स और PCOS के लक्षणों को नेचुरली कंट्रोल करेंगे ये 4 योगासन
आमतौर पर महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की हार्मोनल समस्या देखने को मिलती है। यह एक ऐसी हेल्थ कंडीशन है, जो हार्मोनल असंतुलन, अनियमित पीरियड्स, थकान, मेटाबॉलिक संबंधित समस्याओं और ओवरऑल हेल्थ में बदलाव का कारण बन जाती है।
इससे परेशान होने की जरुरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपको इस लेख में 4 अलग-अलग योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप रोजाना कर सकते हैं।
उष्ट्रासन- कैमल पोज
यह योगासन एक बैक-बेंड आसन है, जो पेट और पेल्विक एरिया में स्ट्रेच लाकर पीओएस के लक्षणों को नेचुरली मैनेज करता है-
कैसे करे उष्ट्रासन- कैमल पोज?
- सबसे पहले आप घुटनों के बल बैठ जाएं।
- अब घुटनों के बीच हिप्स की चौड़ाई से ज्यादा दूरी बना लें।
- हाथों को हिप्स पर रखते हुए चेस्ट को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाएं।
- फिर कंफर्टेबल महसूस होने के लिए हाथों को एड़ियों की ओर लेकर जाएं।
- इस पोजीशन में कुछ देर रहने के बाद वापस पुरानी मुद्रा में आ सकते हैं।
उष्ट्रासन के फायदे
- इससे पीठ और पैरों की मसल्स को मजबूत करने और उनमें खिंचाव देने में मदद मिलती है।
- यह चेस्ट को खोलने, हिप्स के लचीलेपन को बढ़ाने और शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाता है।
- इस आसान के करने से पेट और पेल्विक एरिया को खींचता है, जिससे यूट्रस और ओवरीज में ब्लड फ्लो तेज होता है।
प्रसारित पादोत्तानासन - वाइड लेग्ड फॉरवर्ड बेंड
असल में प्रसारित पादोत्तानासन खड़े होकर और आगे की तरफ झुककर किया जाने वाला आसन है, जिसमें शरीर के निचले हिस्से में खिंचाव आता है।
आसन की विधि
- सबसे पहले अपनी रीढ़ को सीधा और दोनों पैरों ज्यादा चौड़ा करके में खड़ी हो जाए।
- अब हिप्स से धीरे-धीरे आगे की तरफ झुकते हुए सिर को नीचे लाएं।
- अपने हाथों को जमीन पर कंधों की सीध में रखें। यदि संभव हो, तो सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर टिकने की कोशिश करें। कुछ सेकेंड के लिए सांस लेते हुए रुकें।
प्रसारित पादोत्तानासन के फायदे
- इससे पैरों को मजबूत करने में मदद मिलती है।
- यह हिप्स और थाइज के अंदरूनी हिस्से में खिंचाव देता है और लचीलेपन, स्थिरता तथा शरीर के प्रति जागरुकता को बढ़ाता है।
- पीठ के दर्द से राहत मिलती है।
- इसके अलावा सिर की ओर ब्लड और ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ता है, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।
नौकासन-बोट पोज
बोट पोज योगा करते समय शरीर की अकृति एकदम नाव जैसी हो जाती है, इसलिए इसे नौकासन या बोट पोज के नाम से जाना जाता है। यह एक आसन है, जो शरीर की कोर मसल्स को मजबूत करने और पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो को बढ़ाने में मदद करेगा।
आसन की विधि
- सबसे पहले मैट पर सीधा बैठ जाए।
- अब दोनों घुटनों को मोड़कर पैरों को फर्श पर रखें।
- फिर रीढ़ को लंब रखते हुए शरीर को थोड़ा पीछे की तरफ ले जाएं।
- अपने पैरों को उठाकर क्षमता और सुविधानुसार सीधा कर लें।
- अब हाथों को समाने की तरफ फैलाकर धीरे और समान रुप से सांस लें।
नौकासन के फायदे
- इस आसन से कोर की ताकत बढ़ती है।
- पेट के हिस्से को स्थिर रखता है और पूरे शरीर को संतुलित और कंट्रोल करता है।
परिवृत्त उत्कटासन- रिवाइटलाइज्ड चेयर पोज
इस आसन काफी पावरफुल माना जाता है। यह पीसीओएस के लक्षणों को मैनेज करता है और हार्मोनल बैलेंस को सुधारने में मदद करता है।
आसन की विधि
- सबसे पहले अपनी सुविधानुसार पैरों में उचित दूरी बनाकर खड़े हो जाएं।
- अब घुटनों को मोड़ते हुए हिप्स को पीछे की तरफ ले जाए, जैसे आप किसी चेयर पर बैठी हों।
- हथेलियों को चेस्ट के सामने रखें और स्थिरता बनाए रखते हुए सिर को धीरे-धीरे एक तरफ मोड़ें।
- कुछ समय तक इस योगासन को बार-बार दोहराएं।
परिवृत उत्काटासन के लाभ
- यह आसन थाइज और पैरों की शक्ति, संतुलन और शरीर के ऊपरी हिस्से की गतिशीलता बढ़ाता है।
- जब आप इस आसन में रीढ़ और पेट को ट्विस्ट करते हैं, तो पेट और निचले हिस्से के अंगों पर दबाव होता है।
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