एशियन गेम्स 2026: भारत की महिला-पुरुष टीमों ने जीते गोल्ड मेडल, सीएम डॉ मोहन यादव ने दी बधाई
एशियन गेम्स 2026 में आज भारत ने अपने आप को कबड्डी का बादशाह साबित कर दिया, भारत की महिला एवं पुरुष टीमों ने फ़ाइनल मुकाबले में ईरान को हराया, मुकाबलों में कड़ी टक्कर देखने को मिली लेकिन भारत के खिलाड़ियों ने मजबूत मानी जाने वाली ईरान की टीमों को बेहतर रणनीति में उलझाकर गोल्ड पर कब्ज़ा कर लिया, ईरान को दोनों स्पर्धाओं के सिल्वर मेडल मिलेंगे
भारत के कबड्डी खिलाड़ियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि एशिया में उनके जैसा कोई नहीं है, 2023 एशियन गेम्स में गोल्ड मैडल अपने नाम करने वाली भारत की पुरुष एवं महिला टीमों ने जीत का ये सिलसिला जारी रखा और ईरान को हराकर फिर एक बार स्वर्ण पदक जीत लिया।
कबड्डी में भारत की बेटियों ने जीता गोल्ड
भारत की महिला टीम का मुकाबला पहले हुआ और उसने फ़ाइनल मुकाबले में ईरान को कड़े मुकाबले में 37-34 से मात देकर स्वर्णपदक जीत लिया भारत की बेटियों ने अच्छे खेल का प्रदर्शन करते हुए पहला हाफ खत्म होने पर 22-16 अंकों से बढ़त बना ली थी और दूसरे हाफ में ईरान की टीम के खिलाफ 37-34 के अंतर से जीत हासिल कर गोल्ड मेडल पर अपना कब्जा किया, इस मेडल एक साथ ही ये भारत के खाते में जुड़ने वाला तीसरा गोल्ड मेडल हो गया।
पुरुष टीम ने ईरान को 40-34 से हराया
भारत की बेटियों को इस जीत के लिए शुभकामनायें मिल रहीं थी इसी बीच पुरुष टीम ने भी भारत की झोली में सोना बढ़ा दिया, फ़ाइनल मुकाबले में भारत की पुरुष कबड्डी टीम ने ईरान की टीम को हारने में हालाँकि थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी, पहले हाफ का खेल खत्म होने पर भारतीय पुरुष कबड्डी टीम 17-18 के अंतर से ईरान से पीछे थी। लेकिन दूसरे हाफ में दमदार खेल दिखाते हुए भारतीय कबड्डी टीम ने 40-34 से गोल्ड मेडल जीत लिया।
सीएम डॉ मोहन यादव ने दी कबड्डी टीमों को बधाई
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दोनों कबड्डी टीमों को शुभकामनायें दी हैं उन्होंने कहा कि भारत की बेटियों ने स्वर्णिम कीर्तिमान रचते हुए शानदार खेल का प्रदर्शन किया। उनके जज्बे ने माँ भारती और तिरंगे का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियों की यह उपलब्धि भारतीय खेल जगत को गौरवान्वित करेगी और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। पुरुष खिलाड़ियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिफेंडिंग चैंपियन भारत ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित करते फाइनल में ईरान को 40-34 से पराजित कर संपूर्ण भारत को गौरवान्वित किया है।
AI से दुनिया खत्म होने का खतरा नहीं:एनवीडिया CEO बोले- 2030 तक सब ठीक रहेगा; ऑल्टमैन-मस्क की 'तबाही वाली चेतावनियों' को बेबुनियाद बताया
AI से 2030 तक मानव सभ्यता खत्म होने की चेतावनियों को चिप कंपनी एनवीडिया के फाउंडर जेंसन हुआंग ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी 0% संभावना है। हुआंग ने इन दावों को 'डूम्सडे नैरेटिव' करार दिया और लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के डर या पैनिक में न आएं। कुछ दिन पहले एंथ्रोपिक और गूगल डीपमाइंड में काम करने वाले दो रिसर्चर्स ने कहा था कि जिस तेजी से एआई डेवलप हो रहा है उससे मानव सभ्यता खत्म हो सकती है। ओपन एआई, XAI और एंथ्रोपिक के मालिक सैम ऑल्टमैन, इलॉन मस्क और डारियो अमोदेई ने भी इसका समर्थन किया था। वैज्ञानिक आधार से परे हैं ऐसी भविष्यवाणियां हुआंग ने कहा कि इस तरह की चेतावनियां और भविष्यवाणियां 'विज्ञान पर आधारित नहीं हैं'। उन्होंने कहा कि एनवीडिया का लक्ष्य उद्योग में जिम्मेदारी से प्रोडक्ट्स बनाना और लोगों को AI के प्रति जागरूक करना है, न कि समाज में बेवजह का डर फैलाना। तबाही का डर दिखाकर मौजूदा कानूनों से बचने की कोशिश हुआंग ने कहा कि इस तबाही वाले नैरेटिव की आड़ में कुछ लोग मौजूदा कानूनों से छूट पाना चाहते हैं। अगर आप बयानों के पीछे का मतलब समझें, तो वे नए सख्त नियम नहीं मांग रहे, बल्कि उन कानूनों से राहत मांग रहे हैं जो पहले से लागू हैं। यह एक समस्या है। डोनाल्ड ट्रंप भी AI के खतरे को बता चुके हैं 'झूठ' जेंसन हुआंग की तरह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी AI से खतरे की बातों को महज एक 'अफवाह' करार दिया था। अब टेक जगत दो गुटों में बंटता दिख रहा है। एक तरफ इलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज AI की रफ्तार की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हुआंग जैसे लीडर्स का मानना है कि इस खतरे को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। AI इंडस्ट्री में क्यों अहम है एनवीडिया की भूमिका? एनवीडिया ऐसे बेहद ताकतवर कंप्यूटर चिप्स (GPU) बनाती है जो AI मॉडल को चलाने और ट्रेनिंग देने के लिए बेहद जरूरी हैं। ओपनएआई और अन्य टेक कंपनियों के बनाए लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) और AI एजेंट्स एनवीडिया के इन्हीं हाई-टेक चिप्स की मदद से काम करते हैं। है। AI की दुनिया में क्या चल रहा है और इसका हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा, 4 सवालों के जरिए समझिए … सवाल-1: ‘AI हम सबको मार सकता है’ इस दावे का मतलब क्या है? जवाब: इसका मतलब यह नहीं कि AI सीधे इंसानों को मार देगा। चिंता इस बात की है कि भविष्य में AI इतना ताकतवर हो जाए कि इंसानों के कंट्रोल से बाहर निकल जाए और मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा बन जाए। एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने 9 सितंबर को इस्तीफा देते हुए चेतावनी दी कि AI भविष्य में इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इससे पहले 1 नवंबर 2023 को भारत समेत 28 देशों और यूरोपीय संघ ने भी माना था कि बेहद ताकतवर AI के कंट्रोल से बाहर होने पर मानव सभ्यता के अस्तित्व पर संकट आ सकता है। सवाल-2: AI की दुनिया में ऐसा क्या चल रहा, जिससे सभी डरे हुए हैं? जवाबः ऐसी आशंकाओं के पीछे दो बड़े आधार हैं… 1. AI अब सुपर इंटेलिजेंट बन रहा है AI को इंसानों ने बनाया और वही इसे सुधारते रहे हैं। लेकिन अब AI खुद को लगातार बेहतर बनाने में जुट गया है। वो अपनी कमियां पकड़ता है और उन्हें सुधारता है। यानी इंसानों की जरूरत घटती जा रही है। नए AI मॉडल अपनी सोच और तर्क को छिपाने में बेहतर हो रहे हैं। इससे उन पर नजर रखना मुश्किल होता जा रहा है। पहले AI से सवाल पूछो और वो जवाब देता था। लेकिन अब AI एजेंट से कहा जा सकता है कि इस समस्या को हल करो। वो खुद इंटरनेट और कंप्यूटर टूल्स का इस्तेमाल करता है, फैसले लेता है और समस्या को सुलझाता है। चाहे घंटों लग जाएं। हाल ही में 10,000 AI एजेंट्स ने 90 साल पुरानी Navier-Stokes गणित समस्या को सिर्फ 88 घंटे में सुलझा दिया। 2. इंसानों को चकमा देने लगा है AI ओपन AI के मुताबिक, जुलाई 2026 में टेस्ट के दौरान उसके दो AI मॉडल जानबूझकर टेस्टिंग से निकल भागे और चोरी की लॉगिन डिटेल्स का इस्तेमाल कर AI कंपनी Hugging Face के सर्वर तक पहुंच गए। वो भी बिना किसी इंसानी दखल के। एंथ्रोपिक के टेस्ट में मॉडल क्लॉड ओपस 4 ने खुद को बंद होने से बचाने के लिए एक अधिकारी के निजी अफेयर की जानकारी लीक करने की धमकी दी। यह टेस्ट OpenAI, Google, Meta समेत 16 बड़े मॉडल्स पर दोहराया गया और ज्यादातर मॉडल्स ने मौका मिलने पर ऐसा ही बर्ताव किया। सवाल-3: तो क्या AI को कंट्रोल नहीं किया जा सकता? जवाब: कोशिशें हो रही हैं, लेकिन अभी इन्हें पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। कंपनियां खुद सुरक्षा नियम बना रही हैं: एंथ्रोपिक और OpenAI ने खतरनाक AI क्षमताओं के लिए अपने-अपने सुरक्षा नियम बनाए हैं। लेकिन इन नियमों को कंपनियां खुद तय और बदल सकती हैं। यही सबसे बड़ी चिंता है। सरकारें भी नियम बनाने लगी हैं: अमेरिका और भारत में AI को लेकर नए नियम और गाइडलाइंस पर काम हो रहा है। लेकिन अभी दुनिया भर में AI के लिए एक जैसे सख्त नियम नहीं हैं। सवाल-4: AI अगले कुछ सालों में हमारी जिंदगी कैसे बदल सकता है? जवाब: थ्रोपिक के मालिक डारियो अमोदेई का दावा है कि अगले 1 से 5 साल में AI की वजह से एंट्री लेवल की आधी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। अगले 5 सालों में दुनिया में बेरोजगारी दर 20% तक पहुंच जाएगी। हालांकि, Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग का कहना है कि AI से नए तरह के काम और नौकरियां भी पैदा होंगी। वहीं, भारत में हुए AI समिट के दौरान डारियो अमोदेई ने दावा किया था, ‘जिन बीमारियों का इलाज सालों से नहीं मिला, AI उसका इलाज ढूंढने में काबिल है।
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